मध्यप्रदेश: SC ने स्पीकर से पूछा 6 विधायकों के इस्तीफे स्वीकार, बाकी के क्यों नहीं

SC
सुप्रीम कोर्ट: 'इंडिया' और 'भारत' को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई स्थगित

नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफा देने से मध्य प्रदेश में मचा सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की ओर से बहुमत परीक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में शिवराज सिंह चौहान ने शीर्ष अदालत से मध्यप्रदेश में जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर से पूछा था कि 16 विधायकों के इस्तीफे ना स्वीकार करने का कारण क्या है।

Madhya Pradesh Supreme Court Asks Speaker To Accept Resignation Of 6 Mlas Why Not The Rest :

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक सिद्धांत में अविश्वास मत पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि स्पीकर के समक्ष इस्तीफे या अयोग्यता का मुद्दा लंबित है। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या राज्यपाल उसके साथ निहित शक्तियों से परे काम करें या नहीं। एक अन्य सवाल है कि अगर स्पीकर राज्यपाल की सलाह को स्वीकार नहीं करता है तो राज्यपाल को क्या करना चाहिए। एक विकल्प है कि राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें।

सुनवाई के दौरान कांग्रेस के पक्ष से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कर्नाटक का आदेश पढ़ा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक के आदेश स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देता कि वो कब तक अयोग्यता पर फैसला लें, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि फ्लोर टेस्ट न हो। कर्नाटक के मामले में अगले दिन फ्लोर टेस्ट हुआ था और कोर्ट में विधायकों की अयोग्यता के मामले को लंबित होने की वजह से फ्लोर टेस्ट नहीं टाला था।

सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम कोई रास्ता निकालना चाहते हैं। ये केवल एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि ये राष्ट्रीय समस्या है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं अपना कर्तव्य तय करूंगा और दोष भी लगाऊंगा। हम उनकी स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए परिस्थितियों बना सकते हैं कि इस्तीफे वास्तव स्वैच्छिक है। हम एक पर्यवेक्षक को बेंगलुरु या किसी अन्य स्थान पर नियुक्त कर सकते हैं। वे आपके साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जुड़ सकते हैं और फिर आप निर्णय ले सकते हैं।

नई दिल्ली। ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायकों के इस्तीफा देने से मध्य प्रदेश में मचा सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान की ओर से बहुमत परीक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में शिवराज सिंह चौहान ने शीर्ष अदालत से मध्यप्रदेश में जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की है। बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा स्पीकर से पूछा था कि 16 विधायकों के इस्तीफे ना स्वीकार करने का कारण क्या है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक सिद्धांत में अविश्वास मत पर कोई प्रतिबंध नहीं है, क्योंकि स्पीकर के समक्ष इस्तीफे या अयोग्यता का मुद्दा लंबित है। इसलिए हमें यह देखना होगा कि क्या राज्यपाल उसके साथ निहित शक्तियों से परे काम करें या नहीं। एक अन्य सवाल है कि अगर स्पीकर राज्यपाल की सलाह को स्वीकार नहीं करता है तो राज्यपाल को क्या करना चाहिए। एक विकल्प है कि राज्यपाल अपनी रिपोर्ट केंद्र को दें। सुनवाई के दौरान कांग्रेस के पक्ष से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कर्नाटक का आदेश पढ़ा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्नाटक के आदेश स्पीकर के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं देता कि वो कब तक अयोग्यता पर फैसला लें, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि फ्लोर टेस्ट न हो। कर्नाटक के मामले में अगले दिन फ्लोर टेस्ट हुआ था और कोर्ट में विधायकों की अयोग्यता के मामले को लंबित होने की वजह से फ्लोर टेस्ट नहीं टाला था। सुनवाई के दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम कोई रास्ता निकालना चाहते हैं। ये केवल एक राज्य की समस्या नहीं है, बल्कि ये राष्ट्रीय समस्या है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं अपना कर्तव्य तय करूंगा और दोष भी लगाऊंगा। हम उनकी स्थिति को सुनिश्चित करने के लिए परिस्थितियों बना सकते हैं कि इस्तीफे वास्तव स्वैच्छिक है। हम एक पर्यवेक्षक को बेंगलुरु या किसी अन्य स्थान पर नियुक्त कर सकते हैं। वे आपके साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जुड़ सकते हैं और फिर आप निर्णय ले सकते हैं।