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महाभारत की बहु पति प्रथा देश में आज भी हैं जिंदा, यहां एक महिला के हैं कई-कई पति

Mahabharatas Multi Husband System Is Still Alive In The Country There Are Many Husbands Of A Woman Here

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: आपने महाभारत में देखा होगा की द्रौपदी के पांच पति होती हैं जिसे बहु पति प्रथा के रूप में जाना जाता हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं की यह बहु पति प्रथा आज भी भारत में जिंदा हैं। जी हाँ, भारत में हिमाचल और तिब्बत के कुछ इलाकों में यह अनोखी प्रथा आज भी देखने को मिल जाती हैं। इस प्रथा को इन इलाकों में सामाजिक मान्यता मिली हैं जिसके अनुसार एक महिला कई भाइयों के साथ विवाह कर सकती हैं।

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इस प्रथा में एक महिला को अपने पति के भाइयों से भी शादी करनी होती है। पहले वो परिवार के एक पुरुष को पति बनाती है और फिर दूसरे पुरुष भी उनको अपनी पत्नी बना लेने हैं। इस दौरान कभी भी आपस में किसी प्रकार के झगड़े और लड़ाई को जगह नहीं दी जाती। सभी भाई एक पत्नी के साथ बारी बारी से समय गुजारते हैं और आपस में कोई नाराजगी नहीं रखते।

इस बारे में एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तरी भारत में हिमाचल के किन्नौर और उत्तराखंड में चीन से सटे इलाकों में ऐसा आज भी होता है। ये सभी एक ही घर में रहते हैं और एक ही लड़की से शादी करते हैं। इस बीच यदि किसी एक पति की मौत हो जाए तो पत्नी इसका दुःख नहीं मना सकती।

इस दौरान अगर कोई भाई पत्नी के साथ समय बीता रहा होता हैं तो वो कमरे के बाहर टोपी अटका देता है। ये इस बात का संकेत है कि कमरे में पत्नी के साथ कोई भाई समय बीता रहा है। ऐसे में कोई दूसरा भाई परेशान नहीं करता है और न ही पत्नी को आवाज लगाता है।

इस प्रथा में तलाक की भी व्यवस्था की गई है। अगर किसी को तलाक चाहिए तो वो एक पारंपरिक परंपरा के अनुसार लोगों के बीच बैठकर एक लकड़ी तोड़ कर ये बताएगा कि अब अलग हो कर रहना है। इसके बाद सम्बंध खत्म हो जाते हैं लेकिन अगर फिर किसी को रिश्ते में वापस जाना हो तो उसके लिए फिर से शादी करनी होती है।

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देश के कई राज्यों में यह प्रथा पाई जाती है। इस बारे में अंग्रेजों के जमाने में जब 1911 में जनगणना हुई तब कई जातियों में और स्थानों पर इस प्रथा का उल्लेख मिलता है। बताया जाता है कि दक्षिण भारत की नीलगिरी पहाड़ियों में ही ऐसा देखा गया है। केरल में रहने वाली नायर महिलाएं भी ऐसा करती हैं। न सिर्फ केरल में बल्कि कई नायर जातियों में ये होता है। हिमाचल में और अरुणाचल की कुछ विशेष आदिवासी जनजातियों में भी ऐसा देखा गया है।

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