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सोनौली संयास आश्रम के महंथ स्वामी अखिलेश्वरनन्द सरस्वती ने तुलसी पूजन दिवस पर कहा ये खास बात…

By Editor-Vijay Chaurasiya 
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महराजगंज । प्रतिवर्ष गीता जयंती के शुभ अवसर पर मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि को तुलसी पूजन दिवस मनाया जाता है, तुलसी केवल एक पौधा नहीं बल्कि धरा के लिए वरदान है और इसी वजह से हिंदू धर्म में इसे पूज्यनीय माना गया है। आयुर्वेद में तुलसी को अमृत कहा गया है क्योंकि ये औषधि भी है और इसका नियमित उपयोग आपको उत्साहित, खुश और शांत रखता है। भगवान विष्णु की कोई भी पूजा बिना तुलसी के पूर्ण नहीं मानी जाती। उक्त बातें सोनौली नगर में स्थित सन्यास आश्रम के महंथ स्वामी अखिलेश्वर नन्द सरस्वती ने बताया और सभी को 25 दिसम्बर तुलसी पूजन दिवस के दिन तुलसी पौधा घर मे लगाने चाहिए ।

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इसे अच्छे स्वास्थ्य के लिए वरदान माना जाता है और इसे ‘जड़ी-बूटियों की रानी’ कहा जाता है। आम सर्दी और फ्लू के इलाज के लिए तुलसी की चाय का सेवन किया जाता है। तुलसी के पत्तों के नियमित सेवन से खांसी आदि को रोकने में भी मदद मिलती है। यह शरीर को फिट रखने में मदद करता है।

पूजन विधि

सुबह अपने नैतिक कार्यों से निवृत होकर मां तुलसी की पूजा करनी चाहिए। पहले कुमकुम से उनका टीका करना चाहिए और उसके बाद उनकी आरती करके जल चढ़ाना चाहिए। जल चढ़ाते वक्त आपको निम्नलिखित मंत्र पढ़ने चाहिए।

महाप्रसादजननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।
आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।

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इसके बाद आप तुलसी की परिक्रमा कीजिए, आप अपनी सुविधानुसार 7, 11, 21 या 111 परिक्रमा कर सकते हैं और उसके बाद मां तुलसी का ध्यान कीजिए। इसके बाद तुलसी के पत्ते डालकर प्रसाद वितरित करें। तुलसी पूजा सुबह ही नहीं आप आज कभी भी कर सकते हैं।

तुलसी के आठ नाम

वृंदा, वृंदावनी, विश्वपावनी, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, नंदिनी, तुलसी और कृष्णजीवनी – ये तुलसी देवी के आठ नाम हैं। कहते हैं कि जो पुरुष तुलसी की पूजा करके इस नामाष्टक का पाठ करता है, उसे अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

इतिहास

कहते हैं कि भगवान श्री राम ने गोमती तट पर और वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण ने तुलसी लगायी थी। अशोक वाटिका में सीता जी ने रामजी की प्राप्ति के लिए तुलसी जी का मानस पूजन ध्यान किया था। हिमालय पर्वत पर पार्वती जी ने शंकर जी की प्राप्ति के लिए तुलसी का वृक्ष लगाया था।

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