मासूमों की कब्रगाह बने सरकारी अस्पताल, यूपी के बाद महाराष्ट्र में 55 नवजातों की थमी सांसे

नासिक। यूपी के गोरखपुर, फर्रुखाबाद के बाद अब महाराष्ट्र के नासिक का सरकारी अस्पताल मासूमों की कब्रगाह बन गया। यहां पिछले महीने 55 मासूमों की मौत हो गयी। अस्पताल प्रशासन इलाज में लापरवाही की बात से साफ इंकार कर रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है, मृतक बच्चों को गंभीर हालत में निजी अस्पताल से लाया गया था, जिन्हे बचा पाना नामुमकिन था। वहीं स्वास्थ्य मंत्री दीपक सावंत का कहना है, यह तथ्य है कि शिशुओं को अंतिम स्थिति में सरकारी अस्पताल लाया गया। उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी अस्पतालों में जल्द ही एक ‘प्रोटोकॉल’ का पालन होगा।

इस मामले का खुलासा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एजाज पठान का आरोप है कि नासिक के जिला अस्पताल में छोटे बच्चों के लिये जो वेंटिलेटर मशीन चाहिये वो उपलब्ध ही नहीं हैं। कुपोषित इलाकों के बच्चों के इलाज के लिये नासिक शहर में कोई भी उचित व्यवस्था नहीं है।

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नासिक के सिविल सर्जन सुरेश जगदले के मुताबिक, इस साल अप्रैल के बाद से 187 शिशुओं की मौत हुई, जबकि पिछले महीने 55 शिशुओं की जान गई है। वहीं परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में ऑक्सीजन, वेंटिलेटर सहित अन्य जरूरी चिकित्सा सामान नहीं होने की वजह से बच्चों की मौत हो रही है।

यूपी में चर्चित रहा गोरखपुर का बीआरडी अस्पताल-

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बता दें कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में करीब 40 नवजातों की मौत के बाद काफी विवाद हुआ था, योगी सरकार पर कई सवालिया निशान खड़े हुए थे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की बात कही थी। गोरखपुर में बच्चों की मौत के लिए ऑक्सीजन की कमी को जिम्मेदार बताया गया, लेकिन प्रशासन ने इससे इंकार किया था।