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महाराष्ट्र का संकट टला, उद्धव ठाकरे निर्विरोध MLC बने; इस मामले में बनाया रिकॉर्ड!

By टीम पर्दाफाश 
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मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों के आठ अन्य उम्मीदवारों को गुरुवार को राज्य विधान परिषद के लिए निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया. ये सभी उम्मीदवार विधान परिषद की उन नौ सीटों के लिए मैदान में थे जो 24 अप्रैल को खाली हुई थीं और जिनके लिए चुनाव अगले गुरुवार को होने थे. नौ सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई सीटों को भरने के लिए चार मई को चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी. शुरुआत में कोरोना वायरस महामारी के कारण चुनाव प्रक्रिया स्थगित कर दी गई थी.

आमतौर पर देखा जाता है कि पहले पिता विधायक या सांसद बनता है और वर्षों बाद उसका बेटा विधायक बन जाता है. लेकिन महाराष्ट्र में उल्टा हुआ है. उद्धव ठाकरे शायद पहले पिता हैं जो अपने बेटे आदित्य के बाद एमएलसी बने हैं. ​ठाकरे परिवार की तरफ से विधायक बनने वाले उद्धव दूसरे व्यक्ति हैं.

उद्धव ठाकरे 28 नवंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे. नियम के अनुसार उन्हें छह माह यानी 28 मई के पहले विधानसभा या विधान परिषद में से किसी एक सदन का सदस्य बनना जरूरी था. उन्होंने विधानसभा के बजाय विधानपरिषद का रास्ता चुना. वह शिवसेना के अध्यक्ष भी हैं. प्रदेश के राज्यपाल बीएस कोश्यारी ने हाल ही में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर विधान परिषद के चुनाव कराने का अनुरोध किया था ताकि ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के छह महीने के अंदर विधायिका में निर्वाचित होने के संवैधानिक प्रावधान को पूरा कर सकें.

नौ सीटों के लिए 14 उम्मीदवारों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे. इनमें से कागजों की छानबीन के दौरान एक उम्मीदवार का पर्चा खारज हो गया, वहीं भाजपा के अजीत गोपचडे तथा संदीप लेले, राकांपा के किरण पावस्कर और शिवाजीराव गर्जे ने 12 मई को नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद नौ ही उम्मीदवार मैदान में बचे जिनमें शिवसेना से उद्धव ठाकरे और नीलम गोरे, बीजेपी से रणजीत सिंह मोहिते पाटिल, गोपीचंद पाडलकर, प्रवीण दटके और रमेश कराड हैं. निर्विरोध निर्वाचित होने वाले उम्मीदवारों में एनसीपी के शशिकांत शिंदे और अमोल मितकरी तथा कांग्रेस के राजेश राठौड़ भी हैं.

नामांकन वापस लेने की समय सीमा दोपहर तीन बजे समाप्त हो जाने के बाद परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित किए गए. इससे पहले राज्य मंत्रिमंडल ने शुरुआत में सिफारिश की थी कि राज्यपाल अपने कोटे से ठाकरे को विधान परिषद में मनोनीत करें. दो बार सिफारिश के बावजूद राज्यपाल ने ठाकरे को विधान मंडल के उच्च सदन में मनोनीत नहीं किया जिसकी सत्तारूढ़ महाराष्ट्र विकास आघाड़ी के घटक दलों ने आलोचना की थी. ठाकरे ने इस बाबत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात करके उनके हस्तक्षेप की मांग की थी.

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