महाराष्ट्र: पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस को मिली जमानत, चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले छिपाने का आरोप

Devendra Fadnavis
महाराष्ट्र: पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस को मिली जमानत, चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामले छिपाने का आरोप

नागपुर। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने के मामले में नागपुर अदालत के सामने पेश हुए। नागपुर की अदालत ने फडणवीस को 15,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। आपको बता दें कि 2014 के चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर उनके खिलाफ 2 लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया था।

Maharashtra Former Cm Devendra Fadnavis Gets Bail Accused Of Hiding Criminal Case In Election Affidavit :

गौरतलब है कि फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाने का आरोप है। ये दो मुकदमे नागपुर के हैं जिनमें एक मानहानि का और दूसरा ठगी का है। इस मामले में फड़णवीस की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि मुख्यमंत्री और राजनीतिक लोगों के खिलाफ 100 मुकदमे रहते हैं। किसी के चुनावी हलफनामे में न देने पर कार्रवाई नहीं हो सकती।

वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाई है इसलिए कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने पूछा था कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई या फिर गलती से हुआ, इस मामले को क्यों न ट्रायल के लिए भेजा जाए।

नागपुर। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों की जानकारी नहीं देने के मामले में नागपुर अदालत के सामने पेश हुए। नागपुर की अदालत ने फडणवीस को 15,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। आपको बता दें कि 2014 के चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर उनके खिलाफ 2 लंबित आपराधिक मामलों का खुलासा नहीं किया था। गौरतलब है कि फडणवीस पर 2014 के चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मुकदमों की जानकारी छिपाने का आरोप है। ये दो मुकदमे नागपुर के हैं जिनमें एक मानहानि का और दूसरा ठगी का है। इस मामले में फड़णवीस की ओर से कोर्ट में कहा गया था कि मुख्यमंत्री और राजनीतिक लोगों के खिलाफ 100 मुकदमे रहते हैं। किसी के चुनावी हलफनामे में न देने पर कार्रवाई नहीं हो सकती। वहीं याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि उन्होंने चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाई है इसलिए कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने पूछा था कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई या फिर गलती से हुआ, इस मामले को क्यों न ट्रायल के लिए भेजा जाए।