राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया बंकर म्यूजियम का उद्घाटन

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मुंबई। मुंबई में राजभवन के नीचे जमीन के अंदर ब्रिटिश कालीन सुरंगनुमा ऐतिहासिक बंकर अब बेहद आकर्षक देश के अंडरग्राउंड म्यूजियम में तब्दील हो चुका है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों इस बंकर म्यूजियम का उद्घाटन हुआ है।

Maharashtra President Ramnath Kovind Inaugurates Bunker Museum :

करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों के वक्त में बने इस विशाल काय घातक हथियारों से लैस सुरंगनुमा अंडरग्राउंड बंकर को अंग्रेजी शासन के ताकतवर गवर्नर को दुश्मनों से बचाने और राजभवन से सुरक्षित बचाकर निकालने के बनाया गया था। 60 साल से ये बंकर बंद पड़ा था और 2016 में इस अंडरग्राउंड सचरंगनुमा बंकर को फिर से खोला गया था। ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान करीब 1885 के आस पास बने सुरंगनुमा बंकर बेहद खास है।

अरब सागर किनारे राजभवन के ठीक नीचे जमीन में बने इस बेहद खास बंकर को अब ऐतिहासिक देश के अंडरग्राउंड म्यूजियम के रूप में संरक्षित कर दिया गया है। इस बंकर में हर उन ऐतिहासिक वस्तुओं को संजों कर रखा गया जिसे देख कर आप हैरत में पड जायेंगे। अंग्रेजों के ताकतवर शासकों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाये गए बंकर को अब म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है।

ये बंकर करीब पनद्रह हजार स्क्वायर फुट क्षेत्रफल में फैला है। इसकी लंबाई करीब 150 मीटर सुरंग नुमा है। इस अंडरग्राउंड बंकर में कुल 13 कमरे हैं। जमीन के नीचे बने इस बंकर में ताजी हवा, सूरज की रौश्नी और जलनिकासी की सुविधायें बेहद खास तरीके से बनाई हैं। बंकर में हथियार और गोलाबारुद रखे जाते थे और अंग्रेजी शासकों की सुरक्षा में कोई सेंध ना हो इसका ख्याल रखा जाता था।

दक्षिण मुंबई के बेहद पॉश इलाके में बसा राजभवन तीन ओर से अरब सागर से घिरा है और बेहद आकर्षित करने वाली ऐतिहासिक धरोहर है। अब राजभवन के नीचे जमीन में बने इस बंकर को म्यूजियम में तब्दील कर लोगों के लिए खोलने की तैय्यारी है।

इस सुरंगनुमा बंकर में हथियार और गोलाबारुद रखे जाते थे और अंग्रेजी शासकों को सुरक्षित दूसरे ठिकानो तक पहुंचाने की इस सुरंग में पूरी सुविधा बनाई गई थी। राजभवन परिसर में अंग्रेजों के वक्त मे बनी 150 मीटर लंबे एक बंकर को कई दशकों पहले पहले बंद कर दिया गया था और साल 2016 में इसका पता लगा तो इसे फिर से खोला गया था।

मुंबई। मुंबई में राजभवन के नीचे जमीन के अंदर ब्रिटिश कालीन सुरंगनुमा ऐतिहासिक बंकर अब बेहद आकर्षक देश के अंडरग्राउंड म्यूजियम में तब्दील हो चुका है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों इस बंकर म्यूजियम का उद्घाटन हुआ है। करीब सवा सौ साल पहले अंग्रेजों के वक्त में बने इस विशाल काय घातक हथियारों से लैस सुरंगनुमा अंडरग्राउंड बंकर को अंग्रेजी शासन के ताकतवर गवर्नर को दुश्मनों से बचाने और राजभवन से सुरक्षित बचाकर निकालने के बनाया गया था। 60 साल से ये बंकर बंद पड़ा था और 2016 में इस अंडरग्राउंड सचरंगनुमा बंकर को फिर से खोला गया था। ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान करीब 1885 के आस पास बने सुरंगनुमा बंकर बेहद खास है। अरब सागर किनारे राजभवन के ठीक नीचे जमीन में बने इस बेहद खास बंकर को अब ऐतिहासिक देश के अंडरग्राउंड म्यूजियम के रूप में संरक्षित कर दिया गया है। इस बंकर में हर उन ऐतिहासिक वस्तुओं को संजों कर रखा गया जिसे देख कर आप हैरत में पड जायेंगे। अंग्रेजों के ताकतवर शासकों की सुरक्षा के मद्देनजर बनाये गए बंकर को अब म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया है। ये बंकर करीब पनद्रह हजार स्क्वायर फुट क्षेत्रफल में फैला है। इसकी लंबाई करीब 150 मीटर सुरंग नुमा है। इस अंडरग्राउंड बंकर में कुल 13 कमरे हैं। जमीन के नीचे बने इस बंकर में ताजी हवा, सूरज की रौश्नी और जलनिकासी की सुविधायें बेहद खास तरीके से बनाई हैं। बंकर में हथियार और गोलाबारुद रखे जाते थे और अंग्रेजी शासकों की सुरक्षा में कोई सेंध ना हो इसका ख्याल रखा जाता था। दक्षिण मुंबई के बेहद पॉश इलाके में बसा राजभवन तीन ओर से अरब सागर से घिरा है और बेहद आकर्षित करने वाली ऐतिहासिक धरोहर है। अब राजभवन के नीचे जमीन में बने इस बंकर को म्यूजियम में तब्दील कर लोगों के लिए खोलने की तैय्यारी है। इस सुरंगनुमा बंकर में हथियार और गोलाबारुद रखे जाते थे और अंग्रेजी शासकों को सुरक्षित दूसरे ठिकानो तक पहुंचाने की इस सुरंग में पूरी सुविधा बनाई गई थी। राजभवन परिसर में अंग्रेजों के वक्त मे बनी 150 मीटर लंबे एक बंकर को कई दशकों पहले पहले बंद कर दिया गया था और साल 2016 में इसका पता लगा तो इसे फिर से खोला गया था।