महाराष्ट्र मंत्रालय का चूहामार घोटाला: 10 सालों से मृत मालिक चला रहा है सप्लायर कंपनी

rat scam maharashtra, महाराष्ट्र मंत्रालय का चूहामार घोटाला
महाराष्ट्र मंत्रालय का चूहामार घोटाला: 10 सालों से मृत मालिक चला रहा है सप्लायर कंपनी

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय यानी मंत्रालय और उसके साथ बने एनेक्सी भवन में चूहामार गोलियों की सप्लाई को लेकर हुआ घोटाला इन दिनों सरकार के लिए किरकिरी का कारण बनी हुई है। जिसे लेकर सरकार पर अपने ही सीनियर मंत्री एकनाथ खड़से हमलावर बने हुए हैं। खड़से ने आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी को लेकर उन्होंने तमाम होहल्ला मचाया।

खड़से ने आरोप लगाया कि मंत्रालय में 3,19,400 चूहे एक सप्ताह में मार दिए गए, वो भी बिना किसी ताम झाम के। खड़से ने जिस तरह से अपनी बात कही वो वाकई में बेहद सनसनी पैदा करने वाली थी, लेकिन वास्तविकता ये है कि मंत्रालय प्रशासन ने चूहे मारने के लिए 3,19,400 गोलियां डेढ़ रूपए प्रति गोली की दर से खरीदीं थीं। इन गोलियों को छह महीनों में प्रयोग किया जाना था, जिसकी सप्लाई सात दिनों में की गई और सप्लायर कंपनी को जिसका भुगतान किया गया।

{ यह भी पढ़ें:- इस खबर के बाद नहीं खाएंगे Swiggy और Zomato का सस्ता खाना, देखें वीडियो }

यहां तक के तथ्यों को गंभीरता से देखें तो खड़से साहब के आरोप बेहद हास्यस्पद और खोखले नजर आते हैं। लेकिन उनके इन्हीं आरोपों के बीच एक ऐसा तथ्य समाने आया है, जिसने महाराष्ट्र सरकार को कठघरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

मृत मालिक के हस्ताक्षर पर चल रही कंपनी को दे दिया ठेका—

चूहामार गोलियों की सप्लाई का टेंडर करोड़ों रुपए का न होकर कुछ 4,79,100 रुपए का है। यह टेंडर महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय प्रशासन विभाग की ओर से जारी किया गया था। इस विभाग के मंत्री स्वयं सीएम देवेन्द्र फडणवीस हैं।

सचिवालय प्रशासन ने ठेका विनायक मजूर सहकारी संस्था नामक कंपनी को प्रदान किया था। जिसने चूहामार गोलियों की सप्लाई की है। जब चूहामार घोटाले को लेकर सरकार के भीतर से ही आवाज उठी तो मीडिया विनायक मजूर सहकारी संस्था के कार्यालत तक जा पहुंचा।

दस्तावेजों के मुताबिक कंपनी का रजिस्टर्ड पता 118, सी विंग, सूर्यकुंड हाउसिंग सोसायटी लि., गनपाउडर रोड, मझगांव, मुंबई दर्ज था। मीडिया भी इसी पते पर पहुंची, लेकिन यहां किसी फर्म का दफ्तर न मिलकर एक सरकारी कर्मचारी कैलाश शेंडगे का परिवार मिला। शेंडगे डाकखाने में नौकरी करते हैं और अपने परिवार के साथ इसी पते पर रहते हैं।

{ यह भी पढ़ें:- झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने स्वामी अग्निवेश को पीटा, फाड़ दिये कपड़े }

परिवार से जब बातचीत की गई तो सामने आया कि कंपनी शेंडगे परिवार के ही एक सदस्य अनमोल शेंडगे ने साल 2002 में कंपनी की शुरुआत की थी। कंपनी के कामकाज और खातों की देखभाल वामन देवकर नाम के एक संबन्धी किया करते थे। कंपनी में नुकसान हुआ तो देवकर की सलाह पर दो साल बाद ही अनमोल ने कंपनी बंद कर दी और फैसला हुआ कि कंपनी ​अब से कोई काम नहीं करेगी। साल 2008 में अनमोल शेंडगे की मृत्यु हो गई। जिसके बाद परिवार को लोगों को भारत सरकार की ओर से 1,49,000 रुपए का एक चेक जरूर प्राप्त हुआ था, जो रिफंड के रूप में 2016 में इसी पते पर पहुंचा था।

बकौल शेंडगे परिवार 2016 में ही उन्हें पता चला कि अनमोल शेंडगे की मृत्यु के बाद भी कंपनी चल रही है।जिसके लिए उन्होंने आरटीआई का सहारा लिया लेकिन उन्हें सही जानाकरी नहीं मिल सकी।

आज भी अनमोल शेंडगे के हस्ताक्षर पर ही चल रही है कंपनी—

चूहामार घोटाले ने विनायक मजूर सहकारी संस्था में चल रही घपलेबाजी को उजागर करने का काम जरूर किया है। कंपनी के मालिक अनमोल शेंडगे की मृत्यु के 10 साल बाद भी कंपनी कैसे उसके हस्ताक्षर पर काम कर रही है और सरकारी ठेके भी ले रही है ये अपने आप में बड़ा सवाल है। कंपनी को जिस गैरकानूनी अंदाज से संचालित किया जा रहा है, उसे देखकर कहा जा सकता है कि कंपनी को चलाने की मंशा गैरकानूनी कामों को अंजाम देने की ही रही होगी।

अब सवाल उठता है कि चूहामार गोलियों की सप्लाई विनायक मजूर सहकारी संस्था को मंत्रालय प्रशासन के किन अधिकारियों की मिली भगत से मिला है।

{ यह भी पढ़ें:- पैक्फेड घोटाला: कुशवाहा और सौरभ जैन समेत आठ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल }

मुंबई। महाराष्ट्र सरकार के सचिवालय यानी मंत्रालय और उसके साथ बने एनेक्सी भवन में चूहामार गोलियों की सप्लाई को लेकर हुआ घोटाला इन दिनों सरकार के लिए किरकिरी का कारण बनी हुई है। जिसे लेकर सरकार पर अपने ही सीनियर मंत्री एकनाथ खड़से हमलावर बने हुए हैं। खड़से ने आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी को लेकर उन्होंने तमाम होहल्ला मचाया। खड़से ने आरोप लगाया कि मंत्रालय में 3,19,400 चूहे एक सप्ताह में मार दिए गए, वो भी बिना किसी…
Loading...