महाराष्ट्र: CM की कुर्सी को लेकर तो नही फंस गया शिवसेना, NCP और कांग्रेस के बीच पेंच ?

Uddhav Thackeray, Sonia Gandhi, Sharad Pawar
महाराष्ट्र: CM की कुर्सी को लेकर तो नही फंस गया शिवसेना, NCP और कांग्रेस के बीच पेंच ?

मुम्बई। महाराष्ट्र में सीएम की कुर्सी को लेकर शिवसेना और बीजेपी का 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया। बीेजेपी से गठबन्धन टूटने के बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया। यही नही एनसीपी और कांग्रेस ने भी मौखिक रूप से शिवसेना को समर्थन देने की बात कही लेकिन शिवसेना को राज्यपाल द्वारा जब सरकार बनाने का आमंत्रण दिया गया तो एनसीपी और कांग्रेस ने लिखित समर्थन देने से इन्कार कर दिया। ऐसे में यही लग रहा है कि एकबार फिर सीएम की कुर्सी को लेकर तीनो पार्टियों में कुछ मतभेद पैदा हो गये हैं।

Maharashtra Shiv Sena Ncp And Congress Screwed Over Cms Chair :

लगातार एनसीपी और कांग्रेस आपस में बातचीत कर रही है लेकिन किसी भी फैसले पर न पंहुचना ये साफ दर्शा रहा है कुछ तो बात जरूर हो जो अटक रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना के सामने पहली शर्त रखी थी कि शिवसेना एनडीए गठबन्धन से अलग हो जाये। शिवसेना ने इस बात पर अमल करते हुए फौरन मोदी मंत्रिमंडल से अपनी पार्टी के मंत्री का स्थीपा दिलवा दिया। लेकिन कांग्रेस और एनसीपी इसके बाद भी आगे का फैसला नही ले सके।

आज जहां एक ​तरफ राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मंजूरी दे दी गयी है और राज्यपाल ने राष्ट्रपति को चिटठी भी लिखी है। वहां कांग्रेस और एनसीपी अभी भी सिर्फ बातचीत ही कर रहे हैं। हालांकि एनसीपी के नेता बार बार कहते रहे कि कांग्रेस की वजह से ही देरी हो रही है वहीं का्ंग्रेस के नेताओं में मतभेद नजर आये। लेकिन सूत्रो की माने तो एनसीपी और शिवसेना के बीच भी रोटेशनल सीएम को लेकर ही कुछ मतभेद पैदा हुए हैं। शिवसेना चाह रही है कि 5 साल तक आदित्य ठाकरे मुख्यमंत्री रहे जबकि एनसीपी चाहती है कि रोटेशनल सीएम बने। वहीं कांग्रेस चाहती है कि ठाकरे परिवार से कोई सीएम न बने।

मुम्बई। महाराष्ट्र में सीएम की कुर्सी को लेकर शिवसेना और बीजेपी का 30 साल पुराना गठबंधन टूट गया। बीेजेपी से गठबन्धन टूटने के बाद शिवसेना ने एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा किया। यही नही एनसीपी और कांग्रेस ने भी मौखिक रूप से शिवसेना को समर्थन देने की बात कही लेकिन शिवसेना को राज्यपाल द्वारा जब सरकार बनाने का आमंत्रण दिया गया तो एनसीपी और कांग्रेस ने लिखित समर्थन देने से इन्कार कर दिया। ऐसे में यही लग रहा है कि एकबार फिर सीएम की कुर्सी को लेकर तीनो पार्टियों में कुछ मतभेद पैदा हो गये हैं। लगातार एनसीपी और कांग्रेस आपस में बातचीत कर रही है लेकिन किसी भी फैसले पर न पंहुचना ये साफ दर्शा रहा है कुछ तो बात जरूर हो जो अटक रही है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस और एनसीपी ने शिवसेना के सामने पहली शर्त रखी थी कि शिवसेना एनडीए गठबन्धन से अलग हो जाये। शिवसेना ने इस बात पर अमल करते हुए फौरन मोदी मंत्रिमंडल से अपनी पार्टी के मंत्री का स्थीपा दिलवा दिया। लेकिन कांग्रेस और एनसीपी इसके बाद भी आगे का फैसला नही ले सके। आज जहां एक ​तरफ राज्यपाल की तरफ से राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मंजूरी दे दी गयी है और राज्यपाल ने राष्ट्रपति को चिटठी भी लिखी है। वहां कांग्रेस और एनसीपी अभी भी सिर्फ बातचीत ही कर रहे हैं। हालांकि एनसीपी के नेता बार बार कहते रहे कि कांग्रेस की वजह से ही देरी हो रही है वहीं का्ंग्रेस के नेताओं में मतभेद नजर आये। लेकिन सूत्रो की माने तो एनसीपी और शिवसेना के बीच भी रोटेशनल सीएम को लेकर ही कुछ मतभेद पैदा हुए हैं। शिवसेना चाह रही है कि 5 साल तक आदित्य ठाकरे मुख्यमंत्री रहे जबकि एनसीपी चाहती है कि रोटेशनल सीएम बने। वहीं कांग्रेस चाहती है कि ठाकरे परिवार से कोई सीएम न बने।