महोबा बीएसए कार्यालय में जलती मिलीं बच्चों की किताबें, डीएम ने दिए जांच के आदेश

महोबा। सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर क्या है ये किसी से छुपा नहीं है। साल गुजर जाती है लेकिन बच्चों को किताबें नहीं मिल पातीं, अगर किताबें पहुंच जातीं हैं तो उन्हें बांटा नहीं जाता और साल गुजर जाने के बाद उन्हें रद्दी समझ कर आग के हवाले कर दिया जाता है। उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला महोबा ​के बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में। जहां सर्व शिक्षा अभियान के तहत नि:शुल्क बांटी जाने वाली किताबों का ढ़ेर लगाकर आग लगा दी गई। इन सभी किताबों के अंतिम पृष्ठ यानी जिल्द के पिछले हिस्से में राष्ट्रगान भी लिखा था। जब इस विषय में जिलाधिकारी अजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने तत्काल जांच के आदेश देते कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

प्रदेश सरकार सर्व शिक्षा अभियान के तहत सरकारी प्राइमरी स्कूलों में नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध करवाने के लिए हजारों करोड़ रुपए खर्चा करती है। ये किताबें जिन बच्चों के भविष्य को सुधारने की ताकत रखतीं है उन तक नहीं पहुंच पातीं क्योंकि इस काम की जिम्मेदारी जिन हाथों को सौंपी गई है वे इन किताबों को बोझ मानते हैं। ऐसा ​इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि ऐसी हजारों किताबें महोबा के बीएसए कार्यालय के पास बने बीआरसी परिसर में जलती पाई गईं। आग के ढ़ेर में धुआं देती नजर आई किताबें जिले के सरकारी स्कूलों में बांटने के लिए बीएसए कार्यालय पहुंचाई गईं थी। एक एक किताब पूरी तरह सुरक्षित थी, लेकिन उन्हें आग के हवाले कर रहे कर्मचारियों को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था।

मौके पर मीडिया को देख किताबें जला रहे कर्मचारी भाग खड़े हुए। किताबों के जलाए जाने के बारे में पूछा गया तो बताया गया कि पुरानी होने की वजह से इन्हें जला दिया गया। जिसके बाद सवाल उठा कि क्या ऐसा कोई नियम है जिसके तहत पुरानी किताबों को जला दिया जाता है।

कुछ ऐसे ही सवालों के साथ मीडिया महोबा जिलाधिकारी के कार्यालय पहुंची तो जिलाधिकारी ने बीएसए अमित कुमार को मौके पर भेजकर मामले में जाँच कर कार्यवाही करने के आदेश दिया। किताबों पर राष्ट्रगान लिखे होने की बताए जाने पर बीएसए ने तुरंत आग बुझवाने का आदेश दिया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

इस खबर के माध्यम से हम शिक्षा विभाग के ​अधिकारियों को मात्र यह संदेश देना चाहते हैं कि किताबें कभी बेकार नहीं होती। हो सकता है कि अगले सत्र में नई किताबें छप जाएं लेकिन पुरानी किताब भी अपने अंदर ज्ञान ही छुपाए है, जिससे किसी बच्चे को शिक्षित किया जा सकता है।