महराजगंज: क्या मोदी मैजिक को काट पाएगा गठबंधन या कांग्रेस

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महराजगंज: क्या मोदी मैजिक को काट पाएगा गठबंधन या कांग्रेस

महराजगंज। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में महराजगंज जिले का परिणाम मोदी मैजिक युक्त रहा। सपा व बसपा अलग-अलग लड़ी लेकिन दोनों मिलकर भी उतने मत हासिल नहीं कर पाई जितना की पांचवी बार जीते भाजपा प्रत्याशी पंकज चौधरी को जनसमर्थन मिला। पंकज चौधरी को कुल पोल मत का 27 फीसद 471542 वोट मिला। बसपा प्रत्याशी काशीनाथ शुक्ला 13 फीसद 231084 मतों के साथ दूसरे व सपा प्रत्याशी कुंवर अखिलेश सिंह 12 फीसद मत 213974 पाकर तीसरे पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी हर्षवर्धन को एक लाख से भी कम वोट मिले।

Mahrajganj Kya Modi Magic Ko Kat Payega Gathbandhan Ya Congress :

वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा अपनी पुरानी तस्वीर के सहारे है। मोदी मैजिक व किए गए विकास कार्यों का हवाला है। सपा-बसपा गठबंधन होने से लड़ाई रोचक होने के दावे तो किए जा रहे हैं। लेकिन 2014 के चुनावी नतीजों के आंकडे बताते हैं कि बाधा मोदी मैजिक ही है। कांग्रेस प्रत्याशी सुप्रिया श्रीनेत के पास इस चुनाव में खोने के लिए कुछ़ भी नहीं है।

गठबंधन व कांग्रेस मोदी मैजिक की काट जातीय समीकरणों में खोजती नजर आ रही है। जिले में कुल करीब तीन लाख कुर्मी मतदाता हैं। जिसे पंकज चौधरी का मजबूत वोटबैंक माना जाता है। सभी उसी के जोड़-तोड़ में है। जिले में 18 फीसद मुस्लिम वोट हैं। जिसे अपने पाले में करने के लिए गठबंधन व कांग्रेस पूरा जोर लगाए हैं। गठबंधन के लिए बसपा कैडर वोट को संजोए रखना भी एक चुनौती माना जा रहा है।

करीब 17 लाख वोटर वाले महराजगंज संसदीय क्षेत्र में फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महाराजगंज और पनियरा विधान सभा क्षेत्र आते हैं। वर्तमान में नौतनवा छ़ोड सभी विधानसभाओं के विधायक भाजपाई खेमें के हैं। नौतनवा निर्दल विधायक अमनमणि भी भाजपा को समर्थन करते नजर आ रहे हैं। आंकड़े तो भाजपा के लिए ठ़ीक-ठाक लग रहे हैं। लेकिन गठबंधन भी अपने आंकड़ो के भरोसे जीत के दावे कर रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि कौन आंकडों को मतो में परिवर्तित कर पाने में सफल होगा।

जिले की आबादी 26.8 लाख है। यहां की औसत साक्षरता दर 52.86% है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 63.81% और महिलाओं की साक्षरता दर 41.25% है। वोटरों की संख्या देखी जाए तो महराजगंज में महिला मतदाता 796,767 व पुरुष मतदाता 946,234 हैं। इस तरह कुल 17,43,131 मतदाता 19 मई को यह तय करेंगे कि संसद भवन में उनकी संमस्याओं को प्रबलता से रखने कौन जाएगा।

रिपोर्ट-विजय चौरसिया/धर्मेद्र चौधरी

महराजगंज। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में महराजगंज जिले का परिणाम मोदी मैजिक युक्त रहा। सपा व बसपा अलग-अलग लड़ी लेकिन दोनों मिलकर भी उतने मत हासिल नहीं कर पाई जितना की पांचवी बार जीते भाजपा प्रत्याशी पंकज चौधरी को जनसमर्थन मिला। पंकज चौधरी को कुल पोल मत का 27 फीसद 471542 वोट मिला। बसपा प्रत्याशी काशीनाथ शुक्ला 13 फीसद 231084 मतों के साथ दूसरे व सपा प्रत्याशी कुंवर अखिलेश सिंह 12 फीसद मत 213974 पाकर तीसरे पर रहे। कांग्रेस प्रत्याशी हर्षवर्धन को एक लाख से भी कम वोट मिले। वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा अपनी पुरानी तस्वीर के सहारे है। मोदी मैजिक व किए गए विकास कार्यों का हवाला है। सपा-बसपा गठबंधन होने से लड़ाई रोचक होने के दावे तो किए जा रहे हैं। लेकिन 2014 के चुनावी नतीजों के आंकडे बताते हैं कि बाधा मोदी मैजिक ही है। कांग्रेस प्रत्याशी सुप्रिया श्रीनेत के पास इस चुनाव में खोने के लिए कुछ़ भी नहीं है। गठबंधन व कांग्रेस मोदी मैजिक की काट जातीय समीकरणों में खोजती नजर आ रही है। जिले में कुल करीब तीन लाख कुर्मी मतदाता हैं। जिसे पंकज चौधरी का मजबूत वोटबैंक माना जाता है। सभी उसी के जोड़-तोड़ में है। जिले में 18 फीसद मुस्लिम वोट हैं। जिसे अपने पाले में करने के लिए गठबंधन व कांग्रेस पूरा जोर लगाए हैं। गठबंधन के लिए बसपा कैडर वोट को संजोए रखना भी एक चुनौती माना जा रहा है। करीब 17 लाख वोटर वाले महराजगंज संसदीय क्षेत्र में फरेंदा, नौतनवां, सिसवा, महाराजगंज और पनियरा विधान सभा क्षेत्र आते हैं। वर्तमान में नौतनवा छ़ोड सभी विधानसभाओं के विधायक भाजपाई खेमें के हैं। नौतनवा निर्दल विधायक अमनमणि भी भाजपा को समर्थन करते नजर आ रहे हैं। आंकड़े तो भाजपा के लिए ठ़ीक-ठाक लग रहे हैं। लेकिन गठबंधन भी अपने आंकड़ो के भरोसे जीत के दावे कर रहा है। देखने वाली बात यह होगी कि कौन आंकडों को मतो में परिवर्तित कर पाने में सफल होगा। जिले की आबादी 26.8 लाख है। यहां की औसत साक्षरता दर 52.86% है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 63.81% और महिलाओं की साक्षरता दर 41.25% है। वोटरों की संख्या देखी जाए तो महराजगंज में महिला मतदाता 796,767 व पुरुष मतदाता 946,234 हैं। इस तरह कुल 17,43,131 मतदाता 19 मई को यह तय करेंगे कि संसद भवन में उनकी संमस्याओं को प्रबलता से रखने कौन जाएगा।

रिपोर्ट-विजय चौरसिया/धर्मेद्र चौधरी