‘मैं तुझे देख लूंगा’ कहना धमकी नहीं : गुजरात हाईकोर्ट

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‘मैं तुझे देख लूंगा’ कहना धमकी नहीं : गुजरात हाईकोर्ट

नई दिल्ली। अक्सर झगड़े में ‘मैं तुझे देख लूंगा’ कह दिया जाता है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस वाक्य को अपराध मानने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि धमकी वह होती है, जिससे किसी के दिमाग में कोई डर पैदा हो। गुजरात हाई कोर्ट ने एक वकील के खिलाफ दर्ज एफआईआर को अमान्य घोषित करते हुए यह फैसला सुनाया।

Main Tujhe Dekh Loonga Is Not Criminal Intimidation Says Gujarat High Court :

साबरकंठा जिले के वकील मोहम्मद मोहसिन छालोतिया ने 2017 में पुलिसकर्मियों को ‘देख लेने’ और हाई कोर्ट में घसीट लेने की धमकी दी थी। तब से वकील जेल में ही बंद है। गौरतलब बात यह है कि इस केस में वकील ने ही पुलिस की एफआईआर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

चोट की बात स्पष्ट नहीं होने पर हाईकोर्ट ने रद्द की याचिका

केस में पुलिस ने आईपीसी की धारा 186, 189 और 506 (1) के तहत शिकायत दर्ज की। आईपीसी 186 जनसेवक के कामकाज में दखल करने के मामले में अपराध की धारा है। आईपीसी 189 जनसेवक को धमकी देने के मामले में लागू होती है। शिकायतकर्ता ने धमकी दी थी कि- ‘मैं तुम सभी को देख लूंगा और हाईकोर्ट जाऊंगा।’ सिर्फ हाईकोर्ट से संपर्क करने की बात कहने से चोट की बात स्पष्ट नहीं होती। धारा 506 में भी पीड़ित को धमकी देने वाले व्यक्ति काे चोट पहुंचाने का इरादा स्पष्ट नहीं हुआ, इसलिए एफआईआर रद्द कर दी गई।

नई दिल्ली। अक्सर झगड़े में 'मैं तुझे देख लूंगा' कह दिया जाता है। गुजरात हाईकोर्ट ने इस वाक्य को अपराध मानने से इनकार कर दिया।कोर्ट ने कहा कि धमकी वह होती है, जिससे किसी के दिमाग में कोई डर पैदा हो। गुजरात हाई कोर्ट ने एक वकील के खिलाफ दर्ज एफआईआर को अमान्य घोषित करते हुए यह फैसला सुनाया। साबरकंठा जिले के वकील मोहम्मद मोहसिन छालोतिया ने 2017 में पुलिसकर्मियों को 'देख लेने' और हाई कोर्ट में घसीट लेने की धमकी दी थी। तब से वकील जेल में ही बंद है। गौरतलब बात यह है कि इस केस में वकील ने ही पुलिस की एफआईआर के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। चोट की बात स्पष्ट नहीं होने पर हाईकोर्ट ने रद्द की याचिका केस में पुलिस ने आईपीसी की धारा 186, 189 और 506 (1) के तहत शिकायत दर्ज की। आईपीसी 186 जनसेवक के कामकाज में दखल करने के मामले में अपराध की धारा है। आईपीसी 189 जनसेवक को धमकी देने के मामले में लागू होती है। शिकायतकर्ता ने धमकी दी थी कि- ‘मैं तुम सभी को देख लूंगा और हाईकोर्ट जाऊंगा।’ सिर्फ हाईकोर्ट से संपर्क करने की बात कहने से चोट की बात स्पष्ट नहीं होती। धारा 506 में भी पीड़ित को धमकी देने वाले व्यक्ति काे चोट पहुंचाने का इरादा स्पष्ट नहीं हुआ, इसलिए एफआईआर रद्द कर दी गई।