विशेष योग में होगा मकर संक्राति, जानिए शुभ मुहूर्त और पर्व से जुड़ी कुछ खास बातें

makar sankranti

नई दिल्ली। मकर संक्रांति साल का पहला त्यौहार होता है। इस दिन सूर्य दक्ष‍िणायन से उत्तरायण होते हैं। इस दिन तड़के स्‍नान कर सूर्य उपासना करने का विशेष महत्‍व होता है। मकर संक्रांति के मौके पर खिचड़ी और तिल-गुड़ दान देने का विधान है। परंपराओं में माना जाता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। आज हम आपको संक्रांति से जुड़ी कुछ ऐसी दिलचस्प बातें बताएंगे।

Makar Sankranti Special Date Time Facts And Myths :

देश के कई राज्‍यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। प्रत्‍येक राज्‍य में इसे मनाने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन सब जगह सूर्य की उपासना जरूर की जाती है। लगभग 80 साल पहले उन दिनों के पंचांगों के अनुसार मकर संक्रांति 12 या 13 जनवरी को मनाई जाती थी, लेकिन अब इसे 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जायेगी।

साल 2018 में मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त

14 जनवरी 2018 दिन रविवार

पुण्य काल मुहूर्त- रात 02:00 बजे से सुबह 05:41 तक

मुहूर्त की अवधि- 3 घंटा 41 मिनट

संक्रांति समय- रात 02:00 बजे

महापुण्य काल मुहूर्त- 02:00 बजे से 02:24 तक

मुहूर्त की अवधि- 23 मिनट

मकर संक्रांति से जुड़ी खुच खास बातें

  • तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।
  • भगवान विष्णु ने इसी दिन असुरों का अंत किया था और इसके बाद ही युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी व सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इसी वजह स यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
  • कहा जाता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था।
  • गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
  • गंगाजी भागीरथ के पीछे आयी थीं मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं, इसीलिये इस दिन लोग गंगा स्नान भी करते हैं।
  • इस दिन मलमास समाप्त होता है और शुभ माह प्राम्भ होने के कारण लोग दान पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं।
  • इस दिन को सूर्य-शनि से जुड़ा पर्व कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं और दो माह तक रहते हैं।
  • जैसा कि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।
नई दिल्ली। मकर संक्रांति साल का पहला त्यौहार होता है। इस दिन सूर्य दक्ष‍िणायन से उत्तरायण होते हैं। इस दिन तड़के स्‍नान कर सूर्य उपासना करने का विशेष महत्‍व होता है। मकर संक्रांति के मौके पर खिचड़ी और तिल-गुड़ दान देने का विधान है। परंपराओं में माना जाता है कि इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। आज हम आपको संक्रांति से जुड़ी कुछ ऐसी दिलचस्प बातें बताएंगे।देश के कई राज्‍यों में इस पर्व को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। प्रत्‍येक राज्‍य में इसे मनाने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन सब जगह सूर्य की उपासना जरूर की जाती है। लगभग 80 साल पहले उन दिनों के पंचांगों के अनुसार मकर संक्रांति 12 या 13 जनवरी को मनाई जाती थी, लेकिन अब इसे 13 या 14 जनवरी को मनाया जाता है। इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जायेगी। साल 2018 में मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त14 जनवरी 2018 दिन रविवारपुण्य काल मुहूर्त- रात 02:00 बजे से सुबह 05:41 तकमुहूर्त की अवधि- 3 घंटा 41 मिनटसंक्रांति समय- रात 02:00 बजेमहापुण्य काल मुहूर्त- 02:00 बजे से 02:24 तकमुहूर्त की अवधि- 23 मिनटमकर संक्रांति से जुड़ी खुच खास बातें
  • तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मनाया जाता है।
  • भगवान विष्णु ने इसी दिन असुरों का अंत किया था और इसके बाद ही युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी व सभी असुरों के सिरों को मंदार पर्वत में दबा दिया था। इसी वजह स यह दिन बुराइयों और नकारात्मकता को खत्म करने का दिन भी माना जाता है।
  • कहा जाता है कि महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था।
  • गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भगीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए मकर संक्रांति पर गंगा सागर में मेला लगता है।
  • गंगाजी भागीरथ के पीछे आयी थीं मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भागीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा उनसे मिली थीं, इसीलिये इस दिन लोग गंगा स्नान भी करते हैं।
  • इस दिन मलमास समाप्त होता है और शुभ माह प्राम्भ होने के कारण लोग दान पुण्य से अच्छी शुरुआत करते हैं।
  • इस दिन को सूर्य-शनि से जुड़ा पर्व कहा जाता है क्योंकि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि में प्रवेश करते हैं और दो माह तक रहते हैं।
  • जैसा कि शनि देव मकर राशि के स्वामी हैं इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है।