मालेगांव ब्लास्ट केस: कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर से हटा मकोका, चलता रहेगा केस

नई दिल्ली। साल 2008 में महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए ब्लास्ट मामले में लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित़़, साध्वी प्रज्ञा, रमेश उपाध्याय और अजय राहिकर को मकोका (MCOCA) में बरी कर दिया गया है। हालांकि इन पर आईपीसी की धाराओं के तहत केस चलता रहेगा। इनमें हत्या, आपराधिक साजिश की धाराएं शामिल हैं। बता दें कि 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में अंजुमन चौक पर शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट कंपनी के सामने एक बाइक पर जोरदार धमाके में 6 लोगों की मौत हो गई थी और 100 से ज्यादा लोग घाटल हो गए थे।

इसके अलावा कोर्ट ने तीन लोगों को बरी भी कर दिया है। इन आरोपियों पर आईपीसी की धारा 120 बी, 302, 307, 304, 326, 427, और 152 A के तहत मुकदमा चलेगा। हालांकि इन आरोपियों पर अनलॉफुल एक्टीविटीज (प्रिवेंशन) एक्‍ट (यूएपीए) की धारा 18 के तहत भी केस चलेगा, सभी आरोपी अभी बेल पर हैं।

NIA ने सबूत पेश किया

इस मामले की जांच करते हुए आजादपुर पुलिस ने हत्या, हत्या की कोशिश और आपराधिक साजिश के साथ कई और भी धाराएं लगाई थी। हालांकि बाद में जांच एटीएस को सौंप दी गई थी। एटीएस ने इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को गिरफ्तार किया। धमाके वाली मोटरसाइकिल साध्वी के नाम से रजिस्टर्ड थी। उसके बाद स्वामी दयानंद पांडे, मेजर रमेश उपाध्याय और कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित सहित कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। एटीएस ने इस मामले में 20 नवंबर 2008 को मकोका लगा दिया और 21 जनवरी 2009 को पहला आरोप पत्र दायर किया। जिसमें 11 गिरफ्तार और 3 फरार आरोपी दिखाए गए। लेकिन उसके बाद इस केस की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA को सौंप दी गई। NIA ने तकरीबन 4 साल की जांच के बाद 31 मई 2016 को नई चार्जशीट फाइल की थी। जिसमें रिटायर रमेश शिवाजी उपाध्याय, समीर शरद कुलकर्णी, अजय राहिरकर, राकेश धावड़े, जगदीश महात्रे, कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित, सुधाकर द्विवेदी उर्फ स्वामी दयानंद पांडे सुधाकर चतुर्वेदी, रामचंद्र कालसांगरा और संदीप डांगे के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया गया।

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इस मामले की अगली सुनवाई 15 जनवरी को एनआईए की स्पेशल अदालत में की जाएगी। बंबई हाईकोर्ट ने साल 2017 की शुरूआत में प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जमानत दे दी थी जबकि कर्नल पुरोहित को अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने जमानत पर रिहा कर दिया था।

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