मालेगांव ब्लास्ट: नौ साल बाद लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित को मिली बेल, सेना की गाड़ी से रवाना

मुंबई। साल 2008 के मालेगांव ब्लास्ट मामले में आरोपी लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत प्रसाद पुरोहित नवी मुंबई की तालोजा जेल से रिहा हो गए हैं। नौ साल बाद जेल से रिहा हुए कर्नल पुरोहित को लेने के लिये सेना के कई अधिकारी पहुंचे हुए थे। कर्नल पुरोहित को सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को बेल मिली थी। पुरोहित जेल से बाहर आते ही सेना की अपनी यूनिट को रिपोर्ट करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के एक दिन बाद कर्नल पुरोहित ने कहा कि वह जल्द से जल्द सेना में फिर से शामिल होना चाहते हैं। कर्नल पुरोहित को सशर्त जमानत दी गई है, वह बिना कोर्ट की अनुमित के विदेश नहीं जा सकेंगे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, पुरोहित को 20 जनवरी 2009 को गिरफ्तारी के बाद सस्पेंड कर दिया गया था। उस वक्त वे सेना की पचमढ़ी स्थित यूनिट में तैनात थे। सेना के सूत्रों के मुताबिक, सेना के सस्पेंड अफसर या जवान को जमानत मिलने पर उसे 24 घंटे में अपनी यूनिट में रिपोर्ट करना होता है। सेना मामले के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उसके सस्पेंशन का रिव्यू करती है।

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ATS कर रही थी मामले की जांच-

मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच पहले एटीएस के पास थी। बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए) को सौंपी गई। एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा को क्लीन चिट दी थी, जबकि कर्नल पुरोहित की बेल का विरोध किया था। एनआईए का मानना है कि जो आरोप पुरोहित के खिलाफ हैं वो गंभीर प्रकृति के हैं। एनआईए का मानना था कि कर्नल पुरोहित को बेल मिलने का ये सही समय नहीं है।

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साल 2008 में हुआ था मालेगांव ब्लास्ट-

साल 2008 में हुए मालेगांव धमाके में 6 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में 100 लोग जख्मी हो गए थे। 29 सितंबर 2008 को मालेगांव में एक बाइक में बम लगाकर विस्फोट किया गया था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित के साथ स्वामी दयानंद, अजय राहिरकर, राकेश धावडे, रमेश उपाध्याय, श्यामलाल साहू, शिवनारायण कालसांगरा, सुधाकर चतुर्वेदी, जगदीश म्हात्रे और समीर कुलकर्णी आरोपी हैं।

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