मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल चयन स​मिति बैठक से​ किया किनारा

मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल चयन स​मिति बैठक से​ किया किनारा
मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकपाल चयन स​मिति बैठक से​ किया किनारा

नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस के संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से गुरुवार को होने वाली लोकपाल चयन समिति बैठक में शामिल होने के लिए भेजे गए बुलावे को स्वीकार नहीं किया है। खड़गे का आरोप है कि 2013 में यूपीए द्वारा बनाए गए इस कानून की याद एनडीए को चार साल बाद आई है। बैठक के लिए मिले बुलावे में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया, न कि विपक्ष के नेता के रूप में। जबकि कानून के मुताबिक उन्हें विपक्ष के नेता की हैसियत से चयन समिति की बैठक में ​शामिल किया जाना चाहिए था। इसीलिए उन्होंने बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिया।

खड़गे ने अपने तर्क के पक्ष में कहा कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून 2013 के तहत लोकपाल के चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया, नेता विपक्ष और एक कानून के जानकार को रखे जाने का प्रवधान है। वर्तमान लोकसभा में किसी भी राजनीतिक दल को सांसदों की संख्या के आधार पर विपक्ष का दर्ज हासिल नहीं है, लेकिन विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी का नेता होने के लिहाज उन्हें समिति में विपक्ष के नेता के रूप में शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा न किया जाना प्रधानमंत्री ​की नियत पर सवाल खड़े करता है।

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उन्होने कहा कि मुख्य अतिथि के रूप में बुलावा भेजना दर्शता है कि प्रधानमंत्री कार्यालय राजनीतिक औपचारिकता को निभाना चाहता था। वहां बुलाकर उनसे मतदान करवाया जाता, जो उन्हें मंजूर नहीं था, इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर बैठक में न शामिल होने के अपने कारणों की जानकारी प्रदान की।

आपको बता दें कि लोकपाल की नियुक्ति में हो रही देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस पर भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल ने जबाव दिया था कि 1 मार्च को लोकपाल चयन बोर्ड की बैठक होनी है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई को 6 मार्च तक के लिए लंबित कर दिया था।

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नई दिल्ली। लोकसभा में कांग्रेस के संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से गुरुवार को होने वाली लोकपाल चयन समिति बैठक में शामिल होने के लिए भेजे गए बुलावे को स्वीकार नहीं किया है। खड़गे का आरोप है कि 2013 में यूपीए द्वारा बनाए गए इस कानून की याद एनडीए को चार साल बाद आई है। बैठक के लिए मिले बुलावे में उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया, न कि विपक्ष के नेता…
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