ममता बनर्जी ने नकारा पशुधन नियमन आध्यादेश 2017, प. बंगाल करेगा विरोध

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार द्वारा काटने के लिए पशुओं की खरीद फरोख्त को रोकने के लिए लाए गए आध्यादेश के विरोध में अब राज्य सरकारें मुखर हो रहीं हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को इस विषय में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल वधशालाओं के लिए पशुओं की बिक्री के खिलाफ लाग गए केन्द्र सरकार आध्यादेश से असहमत हैं। यह आध्यादेश राज्य सरकारों की स्वयत्ता पर सवाल खड़ा करने वाला प्रतीत हो रहा है।




अपने सचिवालय में एक प्रेस कांफ्रेन्स को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह केन्द्र सरकार के आध्यादेश को स्वीकार नहीं कर सकतीं। वह अर्टानी जरनल से सलाह लेकर इस आध्यादेश पर आगे फैसला लेंगी। उन्होंने कहा कि यह आध्यादेश राज्य सरकारों की ताकत को चुनौती देने वाला है।

ममता ने कहा कि पशुओं बाजारों की निगरानी का काम राज्य सरकारों के अंतर्गत आता है। पशु बाजार में बिकने वाले पशुओं और खरीददारों पर नजर रखने का काम राज्य सरकारों का ही है। ऐसे में केन्द्र को चाहिए वह राज्य सरकार के कार्यक्षेत्र में दखलंदाजी न करे।




उन्होंने रमजान से ठीक पहले इस आध्यादेश को लाए जाने को लेकर केन्द्र सरकार की नियत पर भी सवाल उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने एकबार फिर सवाल किया है कि कौन क्या खाएगा यह खाने वाले पर निर्भर करता है। किसी को क्या खाना है यह तय करने का अधिकार किसी को नहीं होना चाहिए।

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आपको बता दें कि केन्द्र सरकार ने हाल ही में पशुधन नियमन आध्यादेश 2017 लाकर पशुबाजारों में कत्लखानों में जाने के लिए बिकने वाले गौवंश और ऊंट जैसे पशुओं की​ बिक्री पर रोक लगाने की घोषणा की थी। जिसे लेकर केरल में यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने सार्वजनिक रुप से गौकशी कर विरोध जताया था। अब इस क्रम में पश्चिम बंगाल भी जुड़ गया है।

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