मनोहर लाल खट्टर: पिता मजदूर, बेटा बनना चाहता था डॉक्टर, कपड़ा कारोबारी से बन गया मुख्यमंत्री

MANOHAR LAL KHATTAR
मनोहर लाल खट्टर: पिता मजदूर, बेटा बनना चाहता था डॉक्टर, कपड़ा कारोबारी से बन गया मुख्यमंत्री

नई दिल्ली। आज बात उस नेता की होगी जिसके पिता मजदूरी करते थे। जो खुद भी साइकिल पर घूमकर सब्जियां बेचता था। जिंदगी में मुश्किलों से कभी नहीं हारा और डटकर उनका सामना किया। आज वह नेता दूसरी बार एक राज्य का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है।

Manohar Lal Khattar Workers Son Will Take Oath As Cm Again :

यह नेता कोई नहीं बल्कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं। वह चंडीगढ़ में राज्यपाल से मुलाकात करने पहुंच गए हैं। कुछ देर में ही वह सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसी के साथ वह एक नया इतिहास रचेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पंजाबी परिवार से हैं। लम्बे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे। वहां पर उन्होंने पीएम मोदी के साथ भी काम किया। लेकिन कभी इनके परिवार के हालात इतने खराब थे कि साइकिल पर सब्जियां बेचने जाया करते थे।

मनोहर लाल खट्टर के पिता हरबंस लाल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय परिवार सहित रोहतक आ गए थे। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उनके पिता और दादा को मजदूरी तक करनी पड़ी। जैसे-तैसे करके पैसे इकट्ठे किए गए और थोड़ी जमीन खरीदकर खेती शुरू की।

मनोहर लाल खट्टर पांच भाई हैं। एक भाई जगदीश दिल्ली में रहते हैं और एक भाई गुलशन बनियानी गांव में ही खेती देखते हैं। उनके दो भाई रोहतक में रहते हैं। उनसे छोटे तीसरे नंबर के भाई चरणजीत ही नौकरी करते थे। मनोहर लाल का मकान 1974 में बनियानी में बना था। यह 150 गज की जमीन पर बना है, जिसमें तीन कमरे हैं।

मनोहर लाल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज से की। उनके पिता उन्हें आगे पढ़ने देना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा उनके काम में हाथ बटाए, लेकिन मनोहर आगे पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहते थे। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घरवालों से पैसे उधार लेकर दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर मेडिकल की तैयारी करने लगे।
मनोहर लाल ने तीन बार प्री मेडिकल दिया, पर क्लीयर नहीं हो सकता। तभी उन्होंने कमाई करने के लिए दुकान करने की सोची और दिल्ली के सदर मार्केट में कपड़ों की दुकान खोल ली। पांच भाइयों में सबसे बड़े मनोहर लाल को शुरू से ही जल्दी उठने की आदत थी। वे ना केवल खुद जल्दी उठते थे बल्कि, सभी भाइयों को भी उठाकर खेत ले जाते थे।

मनोहर लाल 24 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 1979 इलाहाबाद में हुए विश्व हिंदू परिषद के समागम में पहुंचे और कई संतों और संघ के प्रचारकों से मिले। 1980 में उन्होंने ताउम्र आरएसएस से जुड़ने और शादी न करने का फैसला लिया। उनके इस फैसले का घरवालों ने काफी विरोध किया, पर वे नहीं माने।

लगातार 14 साल गुजरात, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जैसे 12 राज्यों में काम करने के बाद उन्हें 1994 में संघ की तरफ से एक्टिव राजनीति में आने का मौका मिला। 1995 में बीजेपी ने उन्हें हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया। 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन कर बीजेपी को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई। फिर जब देखा कि बंसीलाल सरकार की ठीक नहीं जा रही तो आलाकमान को सपोर्ट वापसी के लिए राजी किया।

बीजेपी ने इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला को बाहर से सपोर्ट देने का फैसला किया। बाद में इनेलो के साथ इस गठबंधन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें जीत ली। 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान करनाल सीट से उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत दर्ज कर हरियाणा के सीएम बने।

प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच कई समानताएं हैं। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के पहली बार मुख्यमंत्री बने तब उनके पास सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था। मोदी की तरह मनोहर लाल भी पहली बार ही विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री बन थे। मोदी की तरह मनोहर लाल भी ऐसे नेता हैं, जिन पर पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है और दोनों ही आपस में दोस्त भी हैं। अब वे दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेंगे।

नई दिल्ली। आज बात उस नेता की होगी जिसके पिता मजदूरी करते थे। जो खुद भी साइकिल पर घूमकर सब्जियां बेचता था। जिंदगी में मुश्किलों से कभी नहीं हारा और डटकर उनका सामना किया। आज वह नेता दूसरी बार एक राज्य का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। यह नेता कोई नहीं बल्कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर हैं। वह चंडीगढ़ में राज्यपाल से मुलाकात करने पहुंच गए हैं। कुछ देर में ही वह सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इसी के साथ वह एक नया इतिहास रचेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर पंजाबी परिवार से हैं। लम्बे समय तक आरएसएस से जुड़े रहे। वहां पर उन्होंने पीएम मोदी के साथ भी काम किया। लेकिन कभी इनके परिवार के हालात इतने खराब थे कि साइकिल पर सब्जियां बेचने जाया करते थे। मनोहर लाल खट्टर के पिता हरबंस लाल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय परिवार सहित रोहतक आ गए थे। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उनके पिता और दादा को मजदूरी तक करनी पड़ी। जैसे-तैसे करके पैसे इकट्ठे किए गए और थोड़ी जमीन खरीदकर खेती शुरू की। मनोहर लाल खट्टर पांच भाई हैं। एक भाई जगदीश दिल्ली में रहते हैं और एक भाई गुलशन बनियानी गांव में ही खेती देखते हैं। उनके दो भाई रोहतक में रहते हैं। उनसे छोटे तीसरे नंबर के भाई चरणजीत ही नौकरी करते थे। मनोहर लाल का मकान 1974 में बनियानी में बना था। यह 150 गज की जमीन पर बना है, जिसमें तीन कमरे हैं। मनोहर लाल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज से की। उनके पिता उन्हें आगे पढ़ने देना नहीं चाहते थे। वे चाहते थे कि उनका बेटा उनके काम में हाथ बटाए, लेकिन मनोहर आगे पढ़ाई कर डॉक्टर बनना चाहते थे। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घरवालों से पैसे उधार लेकर दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर मेडिकल की तैयारी करने लगे। मनोहर लाल ने तीन बार प्री मेडिकल दिया, पर क्लीयर नहीं हो सकता। तभी उन्होंने कमाई करने के लिए दुकान करने की सोची और दिल्ली के सदर मार्केट में कपड़ों की दुकान खोल ली। पांच भाइयों में सबसे बड़े मनोहर लाल को शुरू से ही जल्दी उठने की आदत थी। वे ना केवल खुद जल्दी उठते थे बल्कि, सभी भाइयों को भी उठाकर खेत ले जाते थे। मनोहर लाल 24 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 1979 इलाहाबाद में हुए विश्व हिंदू परिषद के समागम में पहुंचे और कई संतों और संघ के प्रचारकों से मिले। 1980 में उन्होंने ताउम्र आरएसएस से जुड़ने और शादी न करने का फैसला लिया। उनके इस फैसले का घरवालों ने काफी विरोध किया, पर वे नहीं माने। लगातार 14 साल गुजरात, हिमाचल, जम्मू कश्मीर जैसे 12 राज्यों में काम करने के बाद उन्हें 1994 में संघ की तरफ से एक्टिव राजनीति में आने का मौका मिला। 1995 में बीजेपी ने उन्हें हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया। 1996 में बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन कर बीजेपी को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई। फिर जब देखा कि बंसीलाल सरकार की ठीक नहीं जा रही तो आलाकमान को सपोर्ट वापसी के लिए राजी किया। बीजेपी ने इसके बाद ओमप्रकाश चौटाला को बाहर से सपोर्ट देने का फैसला किया। बाद में इनेलो के साथ इस गठबंधन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटें जीत ली। 2014 में विधानसभा चुनाव के दौरान करनाल सीट से उन्होंने पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत दर्ज कर हरियाणा के सीएम बने। प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के बीच कई समानताएं हैं। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के पहली बार मुख्यमंत्री बने तब उनके पास सरकार चलाने का कोई अनुभव नहीं था। मोदी की तरह मनोहर लाल भी पहली बार ही विधायक बनने के बाद मुख्यमंत्री बन थे। मोदी की तरह मनोहर लाल भी ऐसे नेता हैं, जिन पर पारिवारिक जिम्मेदारी नहीं है और दोनों ही आपस में दोस्त भी हैं। अब वे दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेंगे।