मनोज सिन्हा को मिल सकती है यूपी की कमान!

लखनऊ: यूपी में मुख्यमंत्री पद को लेकर तमाम दिग्गज नेताओं के बीच चल रही दावेदारी में फिलहाल रेस में केंद्रीय संचार मंत्री मनोज सिन्हा सबसे आगे दिख रहे हैं। वैसे तो मुख्यमंत्री का नाम विधायक दल की बैठक में शनिवार को तय होने की बात कही जा रही है लेकिन यह औपचारिकता मात्र ही है। पीएम नरेंद्र मोदी यूपी के विकास की जिम्मेदारी किसको देना चाहते हैं,यह तुरुप का पत्ता शनिवार को ही खुलेगा।




भाजपा के पर्यवेक्षक भी अभी तक अंधेरे में ही हैं। रेस में सबसे आगे चल रहे मनोज सिन्हा यह कह कर बचने की कोशिश कर रहे हैं कि वह किसी रेस में शामिल नहीं हैं पर उनको भाजपा और विरोधी दलों से मिल रही बधाई से यह लग रहा है कि कुर्सी उनके ही भाग्य में है। हालांकि बाकी दावेदारों ने अभी हिम्मत नहीं हारी है। भाजपा को यूपी में मिले प्रचंड बहुमत के बाद वहां ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो जात-पात से ऊपर उठ विकास पर फोकस कर सके।

उत्तर प्रदेश के सीएम पद के लिए तमाम दिग्गज नेताओं के नाम चल रहे हैं। अतीत पर गौर करें तो प्रधानमंत्री ने हमेशा उसे ही मुख्यमंत्री बनाया है जो विधानसभा चुनाव लड़कर भाजपा विधायक दल का सदस्य बना हो। हरियाणा में मनोहर लाल खट्टर, महाराष्ट्र में देवेंद्र फड़नवीस, झारखंड में रघुवर दास हों या असम में सर्वानंद सोनोवाल ये सभी विधानसभा का चुनाव भी लड़े थे। मोदी-अमित शाह अब भी उसी फामरूले पर चल रहे हैं, उसका ताजा उदाहरण उत्तराखंड है जहां विधायक त्रिवेंद्र रावत को ताज सौंपने का फैसला किया गया है।




यदि भाजपा इसी फामरूले पर उत्तर प्रदेश में भी चली तो कोई अप्रत्याशित चेहरा सामने आ सकता है। वैसे भाजपा विधायकों में सतीश महाना, सुरेश कुमार खन्ना व ह्ृदय नारायण दीक्षित अनभुवी चेहरे हैं तो सिद्धार्थ नाथ सिंह व श्रीकांत शर्मा नए व युवा चेहरे हैं। इनमें से भी किसी को उत्तर प्रदेश की कमान मिल सकती है।अब तक गोवा ही इस फामरूले का अपवाद है जहां मनोहर पर्रिकर को केंद्र से वहां भेजा गया है। लेकिन गोवा में भाजपा के सामने गठबंधन की मजबूरी थी और सहयोगियों को पर्रिकर ही चाहिए थे।