बिहार-झारखंड शुक्रवार को बंद, नक्सलियों ने किया बंद का ऐलान

पटना। बिहार-झारखंड का प्रमुख नक्सली संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) का एक सदस्य आशीष दा गुमला के पालकोट में हुए पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया। जिसके बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन माओवादियों ने अपने साथी के मारे जाने के विरोध में शुक्रवार को झारखंड-बिहार में एक दिन का बंद ऐलान किया है। उन्होनें पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा कि आशीष मुठभेड़ में नहीं मारा गया बल्कि उसकी हत्या की गई है।




बिहार-झारखंड में बंद का ऐलान स्पेशल एरिया कमेटी द्वारा किया गया है। नक्सलियों ने पुलिस के अभियान को ऑपरेशन ग्रीन हंट पार्ट-2 का नाम दिया है। झारखंड पुलिस के प्रवक्ता आइजी एमएस भाटिया ने बताया कि शुक्रवार के दिन बंद को देखते हुए माओवादियों द्वारा पर्चे बांटे गए है। जिसके बाद से ही पुलिस सतर्क है। सभी जिलों को निर्देश दिया जा चुका है।

हाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों पर हुई गोलीबारी को ध्यान में रखते हुए खूंटी पुलिस ज्यादा सतर्क हो गई है, कहीं बंदी के दौरान नक्सली उस क्षेत्र को निशाना ना बना सकें। बंदी के दिन इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए जाने का खूंटी एसपी अनीस गुप्ता ने दावा किया है। भाकपा नक्सली संगठन पीएलएफआई के बंद के दौरान अक्सर दहशत फैलाते हैं। इसलिए नक्सलियों की हर गतिबिधि पर पुलिस की पैनी नजर है। साथ ही एसपी ने ऐसे इलाकों कि पहचान की है जहां नक्सलियों की सक्रियता अधिक होती है, इन जगहों पर खास नजर रखी जा रही है।

कौन था आशीष दा ?

माओवादियों का सैक मेंबर सह हार्डकोर उग्रवादी आशीष दा लगभग एक-डेढ़ साल से पालकोट के जंगलों में कैंप कर रखा था। आशीष दा झारखंड-बिहार में माओवादियों का एक थिंक टैंक के रूप में पहचान रखता था। पुलिस को लंबे समय से उसकी तलाश थी, पालकोट के बीहड़ों में आश्रय लेने के बाद कभी कभी वह सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने आया करता था।

भाकपा माओवादी का कब हुआ संगठन

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) या भाकपा माओवादी भारत का प्रमुख भूमिगत नक्सली संगठन है। इसकी स्थापना दो खूंखार नक्सली संगठनों के आपसी विलय के बाद हुई। माओइस्ट कम्युनिस्ट सेंटर यानी एमसीसी और भाकपा माले, पीपुल्सवार ने साल 2004 में 21 सितम्बर को आपस में विलय कर लिया। वैसे विलय की आधिकारिक घोषणा उसी साल 14 अक्टूबर को की गयी। विलय के बाद तदर्थ केन्द्रीय कमेटी बनी जिसका महासचिव पीपुल्स वार नेता गणपति को बनाया गया। उनका सही नाम मुप्पला लक्ष्मणा राव है। 22 जून, 2009 को भारत सरकार ने भाकपा माओवादी को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए इसे प्रतिबंधित कर दिया गया था।