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नर्स का पेशा छोड़ वैश्यावृति के दलदल में फंसी मारिजा, सच्चाई जानकर आपकी भी आंखें भर आएंगी

Marija Trapped In The Swamp Of Prostitution Leaving The Profession Of Nurse Knowing The Truth Will Fill Your Eyes Too

By टीम पर्दाफाश 
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नई दिल्ली: जीवन में इन्होंने ढेरों सपने देखे थे और चुना था एक पवित्र पेशा, जिसके जरिये वह मजबूरों व असहायों की उम्मीद बनना चाहती थीं। लेकिन वेनेजुएला की इन महिलाओं को दुश्वारियों व मुफलिसी ने इस हालात में लाकर खड़ा कर दिया है कि आज ये खुद मजबूर व लाचार बनकर रह गई हैं। हालात यह है कि नर्स का अपना पवित्र पेशा छोड़कर आज ये वेश्यावृत्ति को अपनाने को विवश हैं। इनकी आवाज में इनका दर्द साफ झलकता है और आंखों में कभी ना खत्म होने वाली उदासी। पहले तो वे अपनी व्यथा मन के भीतर ही कैद रखने की कोशिश करती हैं, लेकिन बार-बार पूछने पर वे छलकते आंसुओं के साथ बताती हैं कि वे कैसे अपना शरीर बेचने को मजबूर हो गई हैं।

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दो साल पहले सर्टिफाइड नर्स मारिजा वेनेजुएला की सीमा पार कर कोलंबिया पहुंची थीं। वह अपने पीछे अपनी मां और तीन बच्चों को छोड़कर आई थी। दूसरे प्रोफेशनल्स की तरह मारिजा ने भी अपने ही फील्ड में नौकरी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उम्मीद के सारे दरवाजे उसे बंद मिले। यहां तक कि सफाईकर्मी की नौकरी भी मिलना भी असंभव था। सब तरफ से निराश होकर मारिजा ने एक बहुत ही मुश्किल फैसला किया।

वेश्यावृत्ति में पड़ने के बारे में मारिजा कहती हैं, आज कोई है, कल कोई है, ये काम आसान नहीं है और बहुत खतरनाक है। लेकिन एक मां होने के नाते आप ज्यादा सोच नहीं सकते हैं, आपको जो करना है, वो करना है. (मारिजा व कई दूसरी महिलाओं के नाम इस रिपोर्ट में बदल दिए गए हैं)। जब वह अपनी पढ़ाई और नर्स के तौर पर नौकरी के दिनों को याद करती हैं तो एक अजीब सी निराशा उनकी आवाज में घुल जाती है। वह बताती हैं, यह बहुत ही परेशान करने वाला होता है क्योंकि आप लंबे समय तक काम कर चुके होते हैं। मैंने 5 सालों तक पढ़ाई की और अब लगता है कि मैंने वो साल बर्बाद कर दिए क्योंकि मैं आगे प्रैक्टिस नहीं कर सकती हूं। इतना कहते कहते वह रोने लगती हैं।

अपने घर वेनेजुएला में कभी मारिजा की आंखों में सपने हुआ करते थे लेकिन देश के आर्थिक संकट और महंगाई ने ऐसा भंवर रचा कि वह उसमें फंसकर रह गईं। सर्टिफाइड नर्स के तौर पर 15 दिनों तक काम करने के बाद वह केवल एक पैकेट आटा ही खरीद सकती थी। मामूली सी चीजें भी उसकी पहुंच से बाहर हो गई थीं। यहां तक कि वेनेजुएला में इस बात की भी गारंटी नहीं रह गई थीं कि उन्हें जो चाहिए, वह मिल ही जाएगा। कई बार उन्हें अपने बच्चे के लिए डायपर्स तक नहीं मिलते थे।

वेनेजुएला के हालात के बारे में मारिजा बताती हैं, लोग किराने की दुकानों के सामने रात बिताते हैं ताकि अगली सुबह उनका नंबर लग जाए। हाथ में टिकट लिए हुए ग्राहक खरीदारी के लिए लाइन में लगकर इंतजार करते हैं और दुकान में उस दिन जो होता है, वही खरीदकर लौट जाते हैं। कई सालों तक वेनेजुएला के लोगों ने राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को समर्थन दिया जिसने अपने पूर्ववर्ती नेता ह्यूगो चावेज की तरह देश के तेल भंडारों का इस्तेमाल किया और सामाजिक कार्यक्रम चलाए, लेकिन जब तेल की कीमतें गिरने लगीं तो अर्थव्यवस्था की हालत भी पस्त होती गई। वेनेजुएला के नागरिक मदुरो का विरोध करने लग गए।

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मारिजा भी उनमें से एक है। उसका पूरा परिवार हमेशा से चावेज का समर्थक रहा है। वह पूर्व नेता और मदुरो दोनों को देश की हालत के लिए दोषी मानती हैं। वह कहती हैं, अतीत में भुखमरी नहीं थी, किसी चीज की कमी नहीं थी, कोई देश छोड़कर नहीं भागता था। जब सब कुछ अच्छा था तो लोग छुट्टी के लिए विदेश जाते थे, जरूरतें पूरी करने के लिए नहीं।

परिवार की जरूरतों ने मारिजा को वेनेजुएला और कोलंबिया की सीमा पर स्थित कुकुटा शहर में लाकर खड़ा कर दिया जहां पर वह खाने, डायपर्स और छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर रोज संघर्ष करना पड़ता है। यह शहर बेरोजगारी के लिए बदनाम है। अगर मारिजा की मां को इसका पता चलेगा तो क्या वह उसकी मजबूरी को समझेंगी? मारिजा ने कहा, मेरी मां सुपर मॉम है, मेरी मां सब कुछ है. टूटती आवाज में वह कहती है, जिस दिन उन्हें पता चलेगा, उन्हें दुख पहुंचेगा लेकिन वह मुझे जज नहीं करेंगीं।

वेनेजुएला के आर्थिक संकट ने हर क्षेत्र के नौकरीपेशा लोगों को खाने, दवाइयों और अच्छी जिंदगी की तलाश में देश छोड़ने को मजबूर कर दिया है। इसका सबसे ज्यादा असर कोलंबिया पर पड़ रहा है। करीब 30 लाख वेनेजुएला नागरिक देश छोड़कर कोलंबिया पहुंच गए हैं। पूर्व अटॉर्नी मैल्सिया भी अपने दो बच्चों और बूढ़े मां-बाप को छोड़कर कोलंबिया बस गई हैं। वह बताती हैं, मैं उन्हें केवल ब्रेकफास्ट दे सकती थी, कई बार केवल लंच और कई बार तो बिना खाए ही सोना पड़ता था। वे स्कूल जाते हैं। मैं असंभव काम कर रही हूं। अपनी नई जिंदगी की सच्चाई के बारे में बात करने से भी डर लगता है।

वह क्लीनर और बेबीसिटर या किसी भी तरह की नौकरी की उम्मीद में कोलंबिया आई थी। जब सारे दरवाजे बंद पाए तो भी उन्होंने इस हाल में पहुंचने के बारे में कल्पना नहीं की। रोते हुए वह कहती है, जब मैं वेनेजुएला में थी तो मैं पागल हो गई थी और अब यहां भी मैं पागल हो गई हूं क्योंकि मैं वो कर रही हूं जो जिंदगी जीने के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। यह लगातार एक बोझ की तरह है। मैं हर वक्त भगवान से माफी मांगती हूं। मैं अपने बच्चों, अपने मां-बाप के बारे में सोचती हूं..ये सब आसान नहीं है, बिल्कुल भी नहीं…।

केवल नौकरीपेशा महिलाएं ही नहीं जो सेक्स वर्कर बन गई हैं। 17 साल की एरिका भी इस भीड़ का हिस्सा है। जब उसे नौकरी नहीं मिली तो वह वेश्यावृत्ति में आने को मजबूर हो गई। 17 साल की एरिका का 7 महीने का एक बच्चा है जिसे वह अपनी गोद में लेकर वेनेजुएला से कोलंबिया आई। नाबालिग होने की वजह से उसे नौकरी मिलना और भी मुश्किल था. उसे एक विकल्प मिला…सबसे भयावह..। अगर मदुरो और उनकी सरकार ने वेनेजुएला को इस स्थिति में नहीं पहुंचने दिया होता तो शायद एरिका एक वेटेरिनेरियन की पढ़ाई कर रही होती। अपने सपनों के टूटने के बावजूद वह अपने बच्चे के लिए कुछ भी करने को तैयार है। एरिका कहती है, मैं अपने बच्चे को बिना डायपर और बॉटल के नहीं रहने दूंगी। मैं एक मां हूं और मैं खुद को एक बच्चे को संभालने वाले बच्चे की तरह देखती हूं।

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