अस्पताल में शादी का फंक्शन, तेज म्यूजिक से परेशान मरीज

कानपुर: यॅू तो सरकारी और अदालती दोनों तरफ से आदेश है कि अस्पतालों को साईलेन्स जोन में रखा जाय। लेकिन कानपुर के जिला महिला अस्पताल को एक कर्मचारी की बहन की शादी के लिये पूरी तरह से बारातशाला में तब्दील कर दिया गया। शादी के धूम घड़ाके से बारातियों ने भले ही जश्न मनाया हो लेकिन मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।




कानपुर के सरकारी महिला अस्पताल एएचएम डफरिन में शुक्रवार की रात नजारा बदला बदला था। आम तौर शाम होते होते यहाॅ स्टाफ काफी कम हो जाता है और रह जाते हैं तो ईलाज कराने के लिये बिस्तर पर पड़े मरीत और उनके तीमारदार। लेकिन इस रात की रौनक ही कुछ दूसरी थी। इमरजेन्सी वार्ड रंगीन बल्बों की रोशनी से नहाया हुआ था तो वातावरण में लजीज व्यन्जनों की खुशबू तैर रही थी और ऐसा इसलिये था कि इस सरकारी अस्पताल को एक रात के लिये बारातशाला में तब्दील कर दिया गया था।

अस्पताल के ही एक कर्मचारी की बहन का विवाह था। चॅूकि उसे अस्पताल परिसर में सरकारी आवास मिला हुआ था इसलिये उसने अस्पताल से विवाह समारोह आयोजित करने की अनुमति माॅगी। लड़की की शादी थी सो सहृदयता दिखाते हुए अस्पताल प्रबंधन ने उसे अनुमति प्रदान कर दी। लेकिन मरीजों को इससे कितनी दिक्कत होगी। शादी बारात के होहुल्लड और बारात के विदा होने पर जूठन की कितनी गन्दगी पसरी रह जायगी, इस पर कोई ध्यान नही दिया गया।

इस विवाह की खबर मीडिया को लगी तो सारा नजारा कैमरे में कैद हो गया। अस्पताल का मुख्य द्वार से लेकर भीतर इमरजेन्सी वार्ड को दुल्हन की तरह सजाया गया था। अस्पताल की विशाल इमारत को ऐसे सजाया गया था मानों कि यह किसी जमींदार की हवेली हो। इस मामले में जब अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डा0 नीता चौधरी से बात की गयी तो पहले उन्होने अस्पताल की बेटी की शादी की दुहाई दी लेकिन डाक्टरों और स्टाफ के आर्थिक सहयोग से शादी किसी बारातशाला से हो सकती थी ताकि अस्पताल के साईलेन्स जोन का नियम न टूटता और मरीजों को दिक्कत न होती, इस पर डा0 चौधरी ने अस्पताल की चाबी मेट्रन के पास होने की बात कहकर सारा दोष उन पर मढ़ दिया।

कानपुर के जिला अस्पतालों की दबंगई का अन्दाज इससे भी लगाया जा सकता है कि हर नवरात्र में उनकी यूनियन अस्पताल परिसर में देवी जागरण कराती है। इस दौरान बड़े बड़े लाउडस्पीकर बजाये जाते हैं। उन्हें मरीजों की दिक्कत से कोई लेना देना नहीं होता और धार्मिक स्वतन्त्रता के नाम पर जिला प्रशासन भी खामोश तमाशा देखता है। ऐसे में अस्पताल में अब शादी बारात की नयी परम्परा भी सृजित हो गयी है।