आज है मातृ नवमी, जानें श्राद्ध में क्या है इसका खास महत्व

आज है मातृ नवमी, जानें श्राद्ध में क्या है इसका खास महत्व
आज है मातृ नवमी, जानें श्राद्ध में क्या है इसका खास महत्व

लखनऊ। आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी का श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में नवमी तिथि को बेहद खास माना जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष की मातृ नवमी 23 सितंबर यानि आज के दिन पड़ रही है, इस दिन परिवार की उन सारी महिलाओं की पूजा की जाती है और उनके नाम से श्राद्ध भोज किया जाता है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। जाने मातृ नवमी से जुड़ी अन्य जानकारी….

Matra Navami 2019 Shradh Date And Time Importance In Shardh Paksha :

मातृ नवमी का महत्व

  • मान्यता है कि मातृ नवमी का श्राद्ध कर्म करने से जातकों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार मातृ नवमी का श्राद्ध करने वालों को धन, संपत्ति, ऐश्वर्य प्राप्त होता है और इनका सौभाग्य हमेशा बना रहता है।
  • मातृ नवमी श्राद्ध के दिन घर की बहुओं को उपवास रखना चाहिए।
  • इस श्राद्ध को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है।
  • इस दिन गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराने से सभी मातृ शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    ऐसे करें मातृ नवमी का श्राद्ध

  • सुबह स्नान करने के बाद घर की दक्षिण दिशा में हरा वस्त्र बिछाएं।
  • सभी पूर्वज-पितरों के फोटो या प्रतीक रूप में एक सुपारी हरे वस्त्र पर स्थापित करें।
  • पितरों के निमित्त, तिल के तेल का दीपक जलाएं, सुगंधित धूप जलाएं, जल में मिश्री और तिल मिलाकर तर्पण करें।
  • इस दिन परिवार की पितृ माताओं का विशेष श्राद्ध करें और आटे का एक बड़ा दीपक जलाएं।
  • पितरों की तस्वीर पर तुलसी की पत्तियां अर्पित करनी चाहिए. जातक को भगवत गीता के नौंवे अध्याय का पाठ भी करना चाहिए।
  • गरीबों या ब्राह्मणों को लौकी की खीर, पालक, मूंगदाल, पूड़ी, हरे फल, लौंग-इलायची तथा मिश्री के साथ भोजन दें।
  • भोजन कराने के बाद धन-दक्षिणा देकर इन सभी को विदा करें।
लखनऊ। आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी का श्राद्ध किया जाता है। श्राद्ध पक्ष में नवमी तिथि को बेहद खास माना जाता है। इस बार श्राद्ध पक्ष की मातृ नवमी 23 सितंबर यानि आज के दिन पड़ रही है, इस दिन परिवार की उन सारी महिलाओं की पूजा की जाती है और उनके नाम से श्राद्ध भोज किया जाता है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। जाने मातृ नवमी से जुड़ी अन्य जानकारी.... मातृ नवमी का महत्व
  • मान्यता है कि मातृ नवमी का श्राद्ध कर्म करने से जातकों की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
  • शास्त्रों के अनुसार मातृ नवमी का श्राद्ध करने वालों को धन, संपत्ति, ऐश्वर्य प्राप्त होता है और इनका सौभाग्य हमेशा बना रहता है।
  • मातृ नवमी श्राद्ध के दिन घर की बहुओं को उपवास रखना चाहिए।
  • इस श्राद्ध को सौभाग्यवती श्राद्ध भी कहा जाता है।
  • इस दिन गरीबों या ब्राह्मणों को भोजन कराने से सभी मातृ शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे करें मातृ नवमी का श्राद्ध
  • सुबह स्नान करने के बाद घर की दक्षिण दिशा में हरा वस्त्र बिछाएं।
  • सभी पूर्वज-पितरों के फोटो या प्रतीक रूप में एक सुपारी हरे वस्त्र पर स्थापित करें।
  • पितरों के निमित्त, तिल के तेल का दीपक जलाएं, सुगंधित धूप जलाएं, जल में मिश्री और तिल मिलाकर तर्पण करें।
  • इस दिन परिवार की पितृ माताओं का विशेष श्राद्ध करें और आटे का एक बड़ा दीपक जलाएं।
  • पितरों की तस्वीर पर तुलसी की पत्तियां अर्पित करनी चाहिए. जातक को भगवत गीता के नौंवे अध्याय का पाठ भी करना चाहिए।
  • गरीबों या ब्राह्मणों को लौकी की खीर, पालक, मूंगदाल, पूड़ी, हरे फल, लौंग-इलायची तथा मिश्री के साथ भोजन दें।
  • भोजन कराने के बाद धन-दक्षिणा देकर इन सभी को विदा करें।