मोदी ने दिया वही पुराना व घिसा-पिटा भाषण: मायावती

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भारतीय जनता पार्टी व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सोमवार को यहां आयोजित परिवर्तन रैली को फ्लॉप बताया है। उन्होंने कहा कि रैली में भाड़े की भीड़ के साथ-साथ टिकटार्थियों द्वारा जुटाये गये जमावड़े व भाजपा द्वारा पूरी ताक़त झोंकने के बाद भी अपेक्षित भीड़ नहीं जुट सकी। उन्होंने कहा कि यह रैली ‘‘कुर्सियों वाली रैली’ ही साबित हुई, जिसमें आम जनता की भागीदारी काफी कम रही तथा रैली की लगभग 40 हजार कुर्सियों में से ज्यादातर पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी ही डटे रहे।




मायावती ने सोमवार को यहां जारी बयान में कहा कि नोटबन्दी के प्रभाव के कारण भाजपा की ‘‘परिवर्तन यात्रायें’ पूरे प्रदेश में काफी फीकी रही हैं। इनमें जन भागीदारी काफी कम रही है। नोटबन्दी का खास असर व लोगों की इस सम्बन्ध में नाराजगी सोमवार को भाजपा की यात्राओं की समाप्ति पर हुई ‘‘परिवर्तन रैली’ में देखने को भी मिली। भाजपा ने इसे भांपते हुये लगभग 40 हजार कुर्सियों का ही इंतजाम किया था और इन कुर्सियों को भी दूर-दूर लगाया गया था, ताकि पूरा ‘‘रमाबाई अम्बेडकर मैदान’ भरा-भरा लगे। बसपा प्रमुख ने कहा कि इतना ही नहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भाषण भी ज्यादातर मामलों में वही पुराना व घिसा-पिटा ही था। उनका भाषण आम जनता की उम्मीद पर खरा नहीं उतर पाया और नववर्ष में उनका पहला राजनीतिक सम्बोधन 31 दिसम्बर के देश के नाम सम्बोधन की तरह ही निराश करने वाला था।




नववर्ष में भी नोटबन्दी से देशवासियों को कुछ राहत देने वाली बात उन्होंने की ही नहीं, जबकि यह ज्वलन्त समस्या है। इसके विपरीत जले पर नमक छिड़कते हुये पेट्रोल, डीजल व रसोई गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ाकर नववर्ष में आम जनता की कमर तोड़ने वाला कड़वा ‘‘तोहफा’ जरूर उनकी सरकार ने लोगों को दे दिया है। इसकी बसपा कड़े शब्दों में निन्दा करती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा मोबाइल एप ‘‘भारत इंटरफेस फार मनी’ के अंग्रेजी नाम से लांच किया गया। उसको ‘‘भीम’ उपनाम से प्रचारित कर दलित समाज के लोगों को बरगलाने का प्रयास किया गया। अगर प्रधानमंत्री मोदी की नीयत साफ होती, तो इसका नाम ही बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के नाम पर सीधा कर दिया गया होता।