माया से मिले धोखे के बाद ‘बदले का ब्लूप्रिंट’ तैयार कर रही सपा

maya and akhilesh
माया से मिले धोखे के बाद 'बदले का ब्लूप्रिंट' तैयार कर रही सपा

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन ने जिस तरह चुनावी अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी जुगलबंदी दिखाई, ठीक उसी तरफ चुनाव परिणाम आने के बाद बसपा मुखिया मायावती के बगावती तेवर भी देखने को मिले। चुनावी नतीजों के बाद मायावती लागातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं और हार का ठीकरा सपा पर फोड़ती नजर आ रही हैं। मायावती के ऐसे रुख के बाद अब सपा खेमे में खासा नाराजगी नजर आ रही है।

Mayawati Akhilesh Yadav Sp Bsp Alliance Breakup Future Planning Blueprint Dalit Vote Bank :

सूत्रों की मानें तो सपा में अंदरखाने मायावती से मिले धोखे का बदला लेने का ब्लू प्रिंट भी तैयार किया जा रहा है। कोशिश माया के वोट बैंक में सेंधमारी की है, जिसे अखिलेश यादव संपर्क और संवाद के फॉर्मूले से अंजाम देना चाहते हैं। मायावती के आरोपों पर सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि अखिलेश यादव का चरित्र किसी को धोखा देने वाला नहीं है। लोकसभा चुनाव में सपा ने पूरी ईमानदारी से गठबंधन धर्म निभाया है।

वहीं, मायावती के लगातार हमलों पर अखिलेश यादव खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। सपा नेताओं को इस खामोशी में ही फायदा दिख रहा है। सपा को लगता है कि मायावती द्वारा गठबंधन तोड़े जाने से दलितों और पिछड़ों को तकलीफ हुई है। इसके अलावा गठबंधन टूटने से सामाजिक न्याय की लड़ाई भी कमजोर हुई है।

अब सपा की नजर अपने जनाधार को वापस लाने और दलित वोटबैंक पर है। जिसके लिए पार्टी के अंदर रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर वर्ग तक पहुंचने के लिए कहा गया है। कुल मिलाकर मायावती से मिले सियासी धोखे के बदले की स्क्रिप्ट तैयार है और अब सिर्फ एक्शन का इंतजार है।

लखनऊ। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा के गठबंधन ने जिस तरह चुनावी अभियान में बढ़-चढ़ कर अपनी जुगलबंदी दिखाई, ठीक उसी तरफ चुनाव परिणाम आने के बाद बसपा मुखिया मायावती के बगावती तेवर भी देखने को मिले। चुनावी नतीजों के बाद मायावती लागातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं और हार का ठीकरा सपा पर फोड़ती नजर आ रही हैं। मायावती के ऐसे रुख के बाद अब सपा खेमे में खासा नाराजगी नजर आ रही है। सूत्रों की मानें तो सपा में अंदरखाने मायावती से मिले धोखे का बदला लेने का ब्लू प्रिंट भी तैयार किया जा रहा है। कोशिश माया के वोट बैंक में सेंधमारी की है, जिसे अखिलेश यादव संपर्क और संवाद के फॉर्मूले से अंजाम देना चाहते हैं। मायावती के आरोपों पर सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि अखिलेश यादव का चरित्र किसी को धोखा देने वाला नहीं है। लोकसभा चुनाव में सपा ने पूरी ईमानदारी से गठबंधन धर्म निभाया है। वहीं, मायावती के लगातार हमलों पर अखिलेश यादव खामोशी अख्तियार किए हुए हैं। सपा नेताओं को इस खामोशी में ही फायदा दिख रहा है। सपा को लगता है कि मायावती द्वारा गठबंधन तोड़े जाने से दलितों और पिछड़ों को तकलीफ हुई है। इसके अलावा गठबंधन टूटने से सामाजिक न्याय की लड़ाई भी कमजोर हुई है। अब सपा की नजर अपने जनाधार को वापस लाने और दलित वोटबैंक पर है। जिसके लिए पार्टी के अंदर रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं को समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर वर्ग तक पहुंचने के लिए कहा गया है। कुल मिलाकर मायावती से मिले सियासी धोखे के बदले की स्क्रिप्ट तैयार है और अब सिर्फ एक्शन का इंतजार है।