मायावती ने बसपा उम्मीदवारों से फिर मांगा चंदा

लखनऊ। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करने के बाद बौखलाई बसपा सुप्रीमो मायावती ने वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर खड़े किए सवालों को सही साबित करने की ठान ली है। मायावती ने बुधवार को कांशीराम जयन्ती के मौके पर पार्टी के तमाम पदाधिकारियों और विधानसभा में पार्टी के उम्मीदवार रहे लोगों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर अपील करेंगी। जिसके लिए देश के शीर्ष वकीलों को खड़ा करने के लिए उन्होंने चंदे की जरूरत होगी।




11 मार्च को सामने आए 2017 विधानसभा चुनावों के नतीजे आने से पहले सामने आए रूझानों को देखते हुए ही इन चुनावों में प्रचंड बहुमत से जीती बीजेपी की विजय श्री पर यह कहते हुए प्रश्नचिन्ह लगा दिए थे कि उन्हें लगता है कि वोटिंग में प्रयोग हुई ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। जिस वजह से चुनाव परिणाम उनके खिलाफ रहे। मायावती ने यह तक कह दिया था कि ईवीएम में कुछ ऐसी छेड़छाड़ की गई है जिससे किसी भी पार्टी को गया मत बीजेपी के खाते में जुड़ गया। वह चाहतीं हैं कि यूपी विधानसभा चुनावों को बैलेट पेपर के माध्यम से करवाया जाए।




मायावती ने ईवीएम को लेकर अपनी शिकायत को भारतीय निर्वाचन आयोग के सामने भी दर्ज करवाया था। जिसे निर्वाचन आयोग ने आधारहीन करार देते हुए पार्टी को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दी थी।




मालूम हो कि मायावती के इस बयान का समर्थन समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के कार्यवाहक मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी की थी। हालांकि उन्होंने ईवीएम की विश्वसनीयता को एकबार पुन: परखने की बात कह कर इस पूरे मामले को खुद से जोड़ लिया था।

वहीं दूसरी ओर यूपी विधानसभा के साथ सामने आए पंजाब और गोवा विधानसभा चुनावों के नतीजों से असंतुष्ट नजर आए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने भी ईवीएम मशीन की विश्व​सनीयता पर सवाल उठा दिए हैं। अरविन्द केजरीवाल का दावा है कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जिन बूथों पर स्वयं वोट देने का दावा किया है वहीं उनकी पार्टी को मिले मतों की संख्या निल निकली है। ऐसे में वह चाहते हैं कि 22 अप्रैल को होने वाले दिल्ली नगर महापालिका के चुनावों में ईवीएम के स्थान पर वैलट पेपर को प्रयोग में लाया जाए।

ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ को लेकर मायावती द्वारा उठाए गए सवाल के साथ कई बड़े राजनीतिक दलों के नेता मुखर हो उठे हैं। ऐसे में चर्चा यह भी उठ खड़ी हुई है कि ईवीएम मशीन को कई ​जापान और अमेरिका जैसे देशों में विश्वसनीयता के चलते ही नकार दिया गया था। वहां वर्तमान चुनावी प्रक्रिया में ईवीएम की जगह वैलट पेपर का इस्तेमाल किया जाता है।

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