भीम आर्मी की मंच साझा करने की अपील को मायावती ने ठुकराया

Mayawati (2)
भीम आर्मी की मंच साझा करने की अपील को मायावती ने ठुकराया

लखनऊ। उत्तर पद्रेश में सालों से बीएसपी पार्टी दलित हक में बात करने का दावा करती आयी है लेकिन हाल ही में भीम आर्मी भी एक नई पार्टी के तौर पर उभर कर आ रही है जो दलित हक के लिए आन्दोलन भी करते नजर आते हैं। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने हाल ही में मायावती से एक साथ मंच साझा करने की अपील की थी लेकिन उनके इस प्रस्ताव को बसपा सुप्रीमो मायावती ने खारिज कर दिया।

Mayawati Turns Down Bhim Armys Plea To Share The Stage :

आपको बता दें कि चंद्रशेखर ने मायावती को चिठ्ठी लिख सत्तारूढ़ बीजेपी से लड़ने के लिए एक साथ आने का प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए चंद्रशेखर ने मायावती को 4 पन्ने की चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने देश में साम्प्रदायिक-जातिवादी शक्तियों का बोलबाला बढ़ने का हवाला दिया था। उन्होंने लिखा था कि ‘2014 से 2019 के बीच बीजेपी की ताकत बढ़ी है, दक्षिण भारत को छोड़कर लगभग बाकी सभी ओर बीजेपी का दबदबा मजबूत हुआ है, बहुजन आंदोलन के लिए सबसे मजबूत गढ़ उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी की वापसी हुई है।’

चन्द्रशेखर ने लिखा कि बहुजन समाज के लिए यह बहुत ही कठिन दौर चल रहा है, बीजेपी के शासन में बहुजन समाज पर अत्याचार तो बढ़ा ही है उसके साथ साथ अधिकार भी छीने गए हैं। ‘आरक्षण पर भी लगातार हमले हो रहे हैं, उन्होने चिटठी में लिखा कि ‘बहुजन विचारधारा को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान कांशीराम का है, उन्होंने बहुजनों को शासक बनने का सपना दिखाया, उन सपनों को साकार करने का रास्ता भी बताया, चन्द्रशेखर का कहना है कि बीएसपी को उसी से ताकत मिली, उन्होने मायावती की भी तारीफ की।

लखनऊ। उत्तर पद्रेश में सालों से बीएसपी पार्टी दलित हक में बात करने का दावा करती आयी है लेकिन हाल ही में भीम आर्मी भी एक नई पार्टी के तौर पर उभर कर आ रही है जो दलित हक के लिए आन्दोलन भी करते नजर आते हैं। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने हाल ही में मायावती से एक साथ मंच साझा करने की अपील की थी लेकिन उनके इस प्रस्ताव को बसपा सुप्रीमो मायावती ने खारिज कर दिया। आपको बता दें कि चंद्रशेखर ने मायावती को चिठ्ठी लिख सत्तारूढ़ बीजेपी से लड़ने के लिए एक साथ आने का प्रस्ताव भेजा था। इसके लिए चंद्रशेखर ने मायावती को 4 पन्ने की चिट्ठी लिखी थी, जिसमें उन्होंने देश में साम्प्रदायिक-जातिवादी शक्तियों का बोलबाला बढ़ने का हवाला दिया था। उन्होंने लिखा था कि '2014 से 2019 के बीच बीजेपी की ताकत बढ़ी है, दक्षिण भारत को छोड़कर लगभग बाकी सभी ओर बीजेपी का दबदबा मजबूत हुआ है, बहुजन आंदोलन के लिए सबसे मजबूत गढ़ उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी की वापसी हुई है।' चन्द्रशेखर ने लिखा कि बहुजन समाज के लिए यह बहुत ही कठिन दौर चल रहा है, बीजेपी के शासन में बहुजन समाज पर अत्याचार तो बढ़ा ही है उसके साथ साथ अधिकार भी छीने गए हैं। 'आरक्षण पर भी लगातार हमले हो रहे हैं, उन्होने चिटठी में लिखा कि 'बहुजन विचारधारा को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान कांशीराम का है, उन्होंने बहुजनों को शासक बनने का सपना दिखाया, उन सपनों को साकार करने का रास्ता भी बताया, चन्द्रशेखर का कहना है कि बीएसपी को उसी से ताकत मिली, उन्होने मायावती की भी तारीफ की।