बसपा से मायावती के भाई आनन्द कुमार जाएंगे राज्यसभा

मायावती, Mayawati, मायावती के भाई आनन्द कुमार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दूसरे के ​का विरोध कर सत्ता में काबिज रहने वाली बसपा और सपा अपने आस्तित्व को बचाने के लिए साथ हो चले हैं। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनावों में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के उम्मीदवारों को सशर्त समर्थन दे दिया है। जिसके एवज में मायावती राज्यसभा चुनावों में अपनी पार्टी के एक उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर चुकीं हैं। सपा के प्रति नरम हुए अपने के रूख को गठबंधन का नाम मिलते ही मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा को हराने के लिए वोटों का हस्तांतरण कर रहीं है।

Mayawatis Brother Anand Kumar Will Be Bsp Candidate For Rajya Sabha :

बसपा का वोटबैंक सपा के साथ जुड़कर क्या परिणाम बनाता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इस हस्तांतरण की कीमत के रूप में मायावती ने सपा की मदद से राज्यसभा में अपनी पार्टी के लिए एक सीट पक्की कर ली है।

बसपा की ओर राज्यसभा में अपनी सीट के लिए आवश्यक गणित जुटा लेने की खबरों के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि पार्टी अपना उम्मीदवार किसे बनाएगी। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि अब मायावती के ​पास खुद को छोड़कर कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसे वह राज्यसभा में भेजना चाहेंगी।अगर मायावती के तेवरों की बात की जाए तो वह राज्यसभा जाने के बजाय 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देना चाहती हैं।

ऐसे में एक नया नाम सामने आया है, जो मायावती के उत्तराधिकारी और उनके छोटे भाई आनंद कुमार का है। बसपा के सूत्रों की माने तो मायावती ने आनंद कुमार को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर उनका सक्रिय राजनीति में पदापर्ण करवाने की भूमिका तैयार कर ली है। आनंद कुमार राज्यसभा में पार्टी का नेतृत्व करेंगे तो ​लोकसभा चुनावों में भाजपा को घेरने की जिम्मेदारी स्वयं मायावती उठाएंगी।

बसपा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के मामलो में उछल चुका है आनंद कुमार का नाम —

उत्तर प्रदेश की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती और उनकी सरकारें जब जब भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए याद की जातीं हैं तो उनके साथ आनंद कुमार का नाम भी जोड़ जाता रहा। पार्टी के मंचों पर गिने चुने मौकों पर नजर आए आनंद कुमार कभी नोएडा अथॉरिटी के मुलाजिम हुआ करते थे। बहन मायावती के आशीर्वाद से उन पर लक्ष्मी की ऐसी कृपा बरसी की उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर चंद सालों में ही हजारों करोड़ का बिजनेस अंपायर खड़ा कर लिया। आज आनंद कुमार को 1500 करोड़ की संपत्ति का मालिक बताया जाता है। ​मायावती के खिलाफ शुरू हुई आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी जांच का दायरा आनंद कुमार तक जा चुका है। साल 2012 के यूपी विधानसभा चुनावों में आनंद कुमार की कई बेनामी कंपनियां का जिक्र हुआ था।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दूसरे के ​का विरोध कर सत्ता में काबिज रहने वाली बसपा और सपा अपने आस्तित्व को बचाने के लिए साथ हो चले हैं। गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनावों में बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के उम्मीदवारों को सशर्त समर्थन दे दिया है। जिसके एवज में मायावती राज्यसभा चुनावों में अपनी पार्टी के एक उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कर चुकीं हैं। सपा के प्रति नरम हुए अपने के रूख को गठबंधन का नाम मिलते ही मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि वह भाजपा को हराने के लिए वोटों का हस्तांतरण कर रहीं है।बसपा का वोटबैंक सपा के साथ जुड़कर क्या परिणाम बनाता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन इस हस्तांतरण की कीमत के रूप में मायावती ने सपा की मदद से राज्यसभा में अपनी पार्टी के लिए एक सीट पक्की कर ली है।बसपा की ओर राज्यसभा में अपनी सीट के लिए आवश्यक गणित जुटा लेने की खबरों के बाद सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि पार्टी अपना उम्मीदवार किसे बनाएगी। ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है कि अब मायावती के ​पास खुद को छोड़कर कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसे वह राज्यसभा में भेजना चाहेंगी।अगर मायावती के तेवरों की बात की जाए तो वह राज्यसभा जाने के बजाय 2019 के लोकसभा चुनावों की तैयारी पर ज्यादा ध्यान देना चाहती हैं।ऐसे में एक नया नाम सामने आया है, जो मायावती के उत्तराधिकारी और उनके छोटे भाई आनंद कुमार का है। बसपा के सूत्रों की माने तो मायावती ने आनंद कुमार को राज्यसभा भेजने की तैयारी कर उनका सक्रिय राजनीति में पदापर्ण करवाने की भूमिका तैयार कर ली है। आनंद कुमार राज्यसभा में पार्टी का नेतृत्व करेंगे तो ​लोकसभा चुनावों में भाजपा को घेरने की जिम्मेदारी स्वयं मायावती उठाएंगी।बसपा सरकार में हुए भ्रष्टाचार के मामलो में उछल चुका है आनंद कुमार का नाम —उत्तर प्रदेश की तीन बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती और उनकी सरकारें जब जब भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए याद की जातीं हैं तो उनके साथ आनंद कुमार का नाम भी जोड़ जाता रहा। पार्टी के मंचों पर गिने चुने मौकों पर नजर आए आनंद कुमार कभी नोएडा अथॉरिटी के मुलाजिम हुआ करते थे। बहन मायावती के आशीर्वाद से उन पर लक्ष्मी की ऐसी कृपा बरसी की उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर चंद सालों में ही हजारों करोड़ का बिजनेस अंपायर खड़ा कर लिया। आज आनंद कुमार को 1500 करोड़ की संपत्ति का मालिक बताया जाता है। ​मायावती के खिलाफ शुरू हुई आय से अधिक संपत्ति के मामले में भी जांच का दायरा आनंद कुमार तक जा चुका है। साल 2012 के यूपी विधानसभा चुनावों में आनंद कुमार की कई बेनामी कंपनियां का जिक्र हुआ था।