डिस्काम मेरठ के एमडी आशुतोष निरंजन ने PVVNL को बनाया नंबर वन

IAS Ashutosh Niranjan
डिस्काम मेरठ के एमडी आशुतोष निरंजन ने PVVNL को बनाया नंबर वन
लखनऊ । उत्तर प्रदेश में ऐसे गिने चुने आईएएस अधिका​री हैं जिन्होंने अपनी हर नई तैनाती के साथ एक नई मिशाल पेश की है। ऐसा ही एक नाम डिस्काम मेरठ के एमडी आशुतोष निरंजन का है। जिन्होंने अपनी कार्यशैली से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL-पीवीवीएनएल) के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों की विद्युत वितरण ​व्यवस्था और विद्युत राजस्व वसूली को बदल कर रख दिया है। अपनी प्रबंधन क्षमताओं को साबित करते हुए निरंजन ने न सिर्फ विद्युत वितरण तंत्र…

लखनऊ । उत्तर प्रदेश में ऐसे गिने चुने आईएएस अधिका​री हैं जिन्होंने अपनी हर नई तैनाती के साथ एक नई मिशाल पेश की है। ऐसा ही एक नाम डिस्काम मेरठ के एमडी आशुतोष निरंजन का है। जिन्होंने अपनी कार्यशैली से पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PVVNL-पीवीवीएनएल) के अंतर्गत आने वाले 14 जिलों की विद्युत वितरण ​व्यवस्था और विद्युत राजस्व वसूली को बदल कर रख दिया है। अपनी प्रबंधन क्षमताओं को साबित करते हुए निरंजन ने न सिर्फ विद्युत वितरण तंत्र के अतिरिक्त अधिभार को घटाने काम किया बल्कि शहरी इलाकों में 6,59,462 नए कनेक्शन देकर बिजली की बड़ी चोरी को रोकने का कारनामा कर दिखाया।

उनकी इसी मेहनत की वजह से पीवीवीएनएल राजस्व वसूली के मामले में नंबर वन बन गया है। पीवीवीएनएल ने वित्तीय वर्ष 2017—18 के लिए रिकार्ड 12,870 करोड़ की वसूली की है, जोकि 2016—17 के मुकाबले 1810 करोड़ अधिक बताई जा रही है। ये परिणाम उस सूरत में आए हैं, जब इस वित्तीय वर्ष में एकमुश्त समाधान योजना नहीं लाई गई।

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उन्होंने विभागीय अधीनस्थों और कर्मचारियों से ईमानदारी से अपनी ड्यूटी करने और बिजली उपभोक्ताओं को ईमानदारी से नियमित बिल भुगतान करने के लिए अपील की। बिजली की बचत और बेहतर प्रयोग के लिए उपभोक्ताओं में जागरुकता लाने का काम किया। उनके नेतृत्व में डिस्काम मेरठ के अंतर्गत आने वाले मेरठ, गाजियाबाद, नोएडा, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडल में 7 लाख से अधिक अनमीटर्ड ग्रामीण कनेक्शनों को मीटर्ड किया गया।

आपको बता दें कि 2009 बैच के आईएएस आशुतोष निरंजन अपनी पिछली तैनातियों के दौरान भी व्यवस्था परिवर्तन के कई उदाहरण पेश कर चुके हैं। निर्वासित सपा सरकार के सूचना विभाग के निदेशक रहते हुए, उन्होंने लखनऊ आगरा एक्सप्रेस वे प्रोजेक्ट में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में मिले अ​तिरिक्त प्रभार को बखूबी अंजाम दिया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत पूरा करवाने में अहम भूमिका निभाई। जिसके बाद उन्हें गोंडा के जिलाधिकारी के रूप में तैनाती पाने के बाद उन्होंने ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर हजारों जरूरतमंदों को मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने का काम किया। वर्तमान सरकार में वह डिस्काम में केस्को के एमडी बने। केस्को में उनके द्वारा किए गए कार्यों से प्रभावित होकर ही उन्हें डिस्काम मेरठ का एमडी बनाया गया था।

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