अपर्णा यादव की सफाई, कहा जीव आश्रय से मेरा या परिवार का कोई संबन्ध नहीं

लखनऊ। आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर द्वारा 1 जुलाई को यूपी गो सेवा आयोग द्वारा जीव आश्रय एनजीओ को मिले 8 करोड़ से ज्यादा के अनुदान को लेकर खुलासा किया गया था। नूतन ठाकुर ने आरोप लगाया था कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री रहते गो सेवा आयोग द्वारा जारी होने वाले अनुदान का बड़ा हिस्सा जीव आश्रय नामक संस्था को सिर्फ इसलिए दिया गया क्योंकि यह संस्था उनके सौतेले भाई प्रतीक यादव के संरक्षण में चलती है।

नूतन ठाकुर द्वारा आरटीआई से मिली जनसूचना के आधार पर दी जानकारी को मीडिया ने प्रमुखता से लिया था। 2 जुलाई को ये खबर अखबारों में प्रकाशित होने के बाद मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव का नाम सुर्खियों में रहा। इस खबर के करीब एक सप्ताह बाद अपर्णा यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए मीडिया पर एक तरफा जानकारी के आधार पर आरोप लगाते हुए अपनी और अपने पति की छवि को धूमिल करने का आरोप लगाया है।

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अपर्णा यादव की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ती में कहा गया है कि कान्हा उपवन को संचालित करने वाली एनजीओ जीव आश्रय से उनका और उनके परिवार के किसी भी सदस्य का कोई लेना देना नहीं है। कान्हा उपवन नगर निगम द्वारा आवारा पशुओं के लिए संचालित गौशाला है। जिसकी देखरेख जीवा आश्रय एनजीओ करता है।

अपर्णा यादव की ओर से कहा गया है कि वह और उनके पति प्रतीक यादव पशु प्रेमी हैं और समय—समय पर कान्हा उपवन जाते रहते हैं। इसके अतिरिक्त उनका कान्हा उपवन और जीव आश्रय संस्था से कोई लेना देना नहीं है। मीडिया को नूतन ठाकुर के कहने बाद एक बार यह जानने की कोशिश करनी चाहिए थी कि प्र​तीक यादव और उनका जीव आश्रय से क्या लेना देना है?

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मीडिया को एक तरफा रिपोर्टिंग करने से पहले यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके इस कृत्य से किसी भी व्यक्ति या परिवार की सालों में बनी छवि धूमिल होती है। इसलिए उसे ऐसा करने से बचना चाहिए।

उन्होंने यूपी सरकार के पशुधन मंत्री के उस बयान पर भी हैरानी जताई जिसमें उन्होंने पूरी जानकारी किए बिना ही मामले की जांच करवाने का आश्वासन दे दिया।

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