महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट करने के लिए तो नहीं लगाई गई आवास-विकास परिषद में आग…?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को अवकाश के दिन आवास विकास परिषद के मुख्यालय में भीषण आग लग गई। परिषद के वित्त विभाग में लगी आग से हड़कंप मच गया। आग लगने की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल की गाड़ियों ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग लगने का कारण शार्टसर्किट बताया जा रहा है। लेकिन बताया जा रहा है कि साजिशन आग लगाई गई है।




दरअसल, सतर्कता जांच के एक मामले में महत्वपूर्ण दस्तावेज सीपीएफ विभाग के पास वाले ही कमरे में रखे हैं। आग लगने व नुकसान की जांच के लिए संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। जानकारी के मुताबिक, माल एवेन्यू स्थित आवास एवं विकास परिषद के मुख्यालय में वित्त विभाग के सीपीएफ विभाग रात करीब आठ बजे आग लग गई। धुआं उठता देख कैंटीन के एक कर्मचारी ने इसकी जानकारी सुरक्षा गार्ड को दी। इस पर सुरक्षा कर्मियों ने दमकल और पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही दमकल की तीन गाड़ियां और पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद जबतक आग पर काबू पाया गया तब कर्मचारियों के पीएफ एकाउंट से जुड़ी फाइलें राख हो गईं। इसकी सूचना मिलते ही मौके पर आवास आयुक्त व सचिव आरपी सिंह भी पहुंच गए।

विभागीय सूत्रों की माने तो उनका कहना है कि अवकाश के दिनों में कार्यालय में एसी प्लांट को बंद कर दिया जाता है जबकि बिजली सप्लाई भी उपयोग न होने पर बंद कर दी जाती है। ऐसे में शार्ट सर्किट कैसे लग सकती है वह भी शनिवार के दिन। वित्तीय संगठन के नेता मूल शंकर मिश्रा के अनुसार जांच के लिए कमेटी बनाई गई है। आग लगने के कारण व आग से नुकसान के लिए अलग अलग दो कमेटी जांच करेंगी। इसके बाद ही सही मायने में कारण का पता चल सकेगा। हालांकि बताया जा रहा है कि शार्ट सर्किट से आग लगी है।

सूत्र बताते हैं कि जिस कमरे में आग लगी है उसके पास के ही कमरे में लॉन आवंटन संबंधी फाइलें रखी हैं। बताया जा रहा है कि इसकी जांच सतर्कता जांच एजेंसी कर रही है। ऐसे साजिश के तहत आग लगाई गई जिससे जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ न लग सके। वहीं यह भी कहा जा रहा है कि कार्यालय परिसर में करोड़ों की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगे हैं जबकि सुरक्षा व्यवस्था के लिए भूतपूर्व सैनिकों की ड्यूटी लगती है। हालांकि सीसीटीवी कैमरे दिन में ही काम करते हैं जबकि रात में यह बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में इस व्यवस्था पर भी सवाल खडे़ हो रहे हैं। इस मामले में आवास आयुक्त आरपी सिंह का कहना है कि जांच कमेटी बनाई गई है। घटना की जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी।




आवास आयुक्त रुद्र प्रताप सिंह ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। आग की घटना की जानकारी मिलते ही उसी दिन वह शाम को मौके पर पहुंच गए थे। सोमवार को कार्यालय खुलने के बाद उन्होंने मामले की जांच का आदेश दिया है। इसके लिए उन्होंने संयुक्त सचिव अनिल यादव की अध्यक्षता में कमेटी बनायी है। कमेटी में बिजली, सिविल व लेखा विभाग के इंजीनियरों व अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। कमेटी सभी पहलुओं की जांच के बाद अपनी रिपोर्ट आवास आयुक्त को देगी। रुद्र प्रताप सिंह, आवास आयुक्त ने कहा है कि मामले की जांच के लिए कमेटी बना दी गई है। फाइलें जली हैं। वैसे इन फाइलों का रिकार्ड मिल जाएगा। क्योंकि इनका ब्योरा कम्प्यूटर में दर्ज था। यहां का कम्प्यूटर सुरक्षित बच गया है। ऐसे में रिकार्ड मिलने की पूरी उम्मीद है। आग लगने के कारणों की जांच व नुकसान के आंकलन के लिए कमेटी बनायी गयी है।

एनसी भण्डारी, सहायक अभियन्ता, अनुरक्षण, आवास विकास का कहना है कि अवकाश होने की वजह से शनिवार को कार्यालय की बिजली बत्ती बन्द थी। एयरकण्डीशन व अन्य उपकरण भी बंद थे। ऐसे में शार्ट सर्किट से आग लगने की आशंका नहीं है। आग कैसे लगी यह तो जांच का विषय है। हो सकता है किसी ने सिगरेट वगैरह पीकर एक दिन पहले फेंका हो। जिससे सुलग कर आग लगी हो।