कश्मीर में 10 हजार जवानों की तैनाती का महबूबा मुफ्ती ने किया विरोध, कहा-लोगों में पैदा कर रहे हैं डर

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में 10 हजार सुरक्षाबलों की तैनाती के फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विरोध किया है। महबूबा ने कहा कि, घाटी में 10 हजार जवानों की तैनाती करके केंद्र सरकार लोगों के मन में भय पैदा कर रही है। इसके साथ ही कहा कि, जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की कोई कमी नहीं है। महबूबा ने कहा कि, जम्मू कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जो सैन्य साधनों से हल नहीं होगी। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और सुधार करने की आवश्यकता है।

    Mehbooba Mufti Protested Against The Deployment Of 10 Thousand Soldiers In Kashmir :

    बता दें कि, एनएसए अजीत डोभाल के घाटी के सीक्रेट मिशन पर आने के तत्काल बाद वहां पर 10 हजार सुरक्षाबलों को भेजने का फैसला लिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। इसके बाद कुछ कंपनियां वहां पर पहुंच गई हैं, जबकि कुछ सुरक्षाबलों की कंपनियां जंल्द ही वहां पर पहुंच जायेंगी। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी का तीन दिन का दौरा पूरा कर शुक्रवार को लौटे हैं।

    कुछ लोग कश्मीर में 100 अतिरिक्त कंपनियां भेजने को अनुच्छेद 35ए को भंग करने से पहले केंद्र की तैयारी के रूप में देख रहे हैं तो कई कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में तेजी लाने के लिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, इन 100 कंपनियों में सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ-10, एसएसबी-30 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां है। सभी कंपनी में 90 से 100 कर्मी मौजूद रहेंगे। सीआरपीएफ की आने वाली 50 कंपनियों में से नौ कंपनियां दिल्ली में संसदीय चुनाव और कांवड़िया ड्यूटी के लिए लगी हुई हैं।

    इनकी जगह बीएसएफ की 9 कंपनियां लगाई गई हैं। इस तरह से सुरक्षाबलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को कश्मीर भेजने के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो कश्मीर से 35ए हटाने को लेकर यह फैसला लिया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि आतंकवाद से लड़ने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर सरकार ने यह फैसला लिया है।

    नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में 10 हजार सुरक्षाबलों की तैनाती के फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने विरोध किया है। महबूबा ने कहा कि, घाटी में 10 हजार जवानों की तैनाती करके केंद्र सरकार लोगों के मन में भय पैदा कर रही है। इसके साथ ही कहा कि, जम्मू कश्मीर में सुरक्षाबलों की कोई कमी नहीं है। महबूबा ने कहा कि, जम्मू कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जो सैन्य साधनों से हल नहीं होगी। केंद्र सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और सुधार करने की आवश्यकता है। बता दें कि, एनएसए अजीत डोभाल के घाटी के सीक्रेट मिशन पर आने के तत्काल बाद वहां पर 10 हजार सुरक्षाबलों को भेजने का फैसला लिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अतिरिक्त कंपनियों की तैनाती को मंजूरी दी है। इसके बाद कुछ कंपनियां वहां पर पहुंच गई हैं, जबकि कुछ सुरक्षाबलों की कंपनियां जंल्द ही वहां पर पहुंच जायेंगी। बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी का तीन दिन का दौरा पूरा कर शुक्रवार को लौटे हैं। कुछ लोग कश्मीर में 100 अतिरिक्त कंपनियां भेजने को अनुच्छेद 35ए को भंग करने से पहले केंद्र की तैयारी के रूप में देख रहे हैं तो कई कश्मीर में आतंकरोधी अभियानों में तेजी लाने के लिए। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, इन 100 कंपनियों में सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ-10, एसएसबी-30 और आईटीबीपी की 10 कंपनियां है। सभी कंपनी में 90 से 100 कर्मी मौजूद रहेंगे। सीआरपीएफ की आने वाली 50 कंपनियों में से नौ कंपनियां दिल्ली में संसदीय चुनाव और कांवड़िया ड्यूटी के लिए लगी हुई हैं। इनकी जगह बीएसएफ की 9 कंपनियां लगाई गई हैं। इस तरह से सुरक्षाबलों की 100 अतिरिक्त कंपनियों को कश्मीर भेजने के पीछे कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो कश्मीर से 35ए हटाने को लेकर यह फैसला लिया जा रहा है। चर्चा यह भी है कि आतंकवाद से लड़ने और कानून व्यवस्था को मजबूत करने को लेकर सरकार ने यह फैसला लिया है।