मानसिक तनाव से भी होता हैं जबड़े में दर्द

नई दिल्ली | देशभर में टीएमडी यानी टैंपोरोमैंडिबुलर ज्वॉइट डिस्ऑर्डर से ग्रस्त लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। भारतीय आबादी का 52 प्रतिशत हिस्सा टीएमडी से थोड़ा या अधिक परेशान है और इनमें से 22 प्रतिशत मरीज दाएं और बाएं टीएमजे से प्रभावित हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक, जबड़े में दर्द का कारण मानसिक तनाव भी हो सकता है।

टीएमजे निचले जबड़े को खोपड़ी से जोड़ता है। यद्यपि टीएमजे विकारों के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें दांत एक सीध में न होना या दिमागी सदमा प्रमुख शामिल है, लेकिन इसकी एक वजह मानसिक तनाव भी हो सकता है। चेहरे में यही एकमात्र चलायमान जोड़ होता है।

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डॉ. ने कहा, टीएमजे एक बॉल एंड सॉकेट वाला जोड़ है, जो कई कारणों से खराब हो सकता है। तनाव के दौरान, लोग अक्सर अपने जबड़े को भींचते हैं या गुस्से में अपने दांत पीसने लगते हैं। इस वजह से, मांसपेशियां तनी हुई अवस्था में रहती हैं और जोड़ को आराम नहीं मिल पाता है। इससे जोड़ में सूजन, दर्द और शिथिलता हो सकती है।

डॉ. ने कहा, ऐसा कोई व्यक्ति जब अपना मुंह खोलता है या कुछ चबाता है, तब टीएमजे विकार के कारण क्लिक की आवाज आती है। यदि इस आवाज के साथ दर्द न होता हो या मुंह खोलने में असुविधा न होती हो, तो इलाज आवश्यक नहीं है। टीएमजे रोग को कुछ घरेलू उपायों से और तनाव में कमी लाकर एवं विश्राम की तकनीक से काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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उन्होंने कहा कि टीएमजे विकार के लक्षणों में जबड़े में दर्द, कान व गाल के पास खिंचवा, थकान, दांत दर्द, सिरदर्द और जंभाई लेते समय क्लिक की आवाज आना प्रमुख है।

डॉ. ने बताया, कई अन्य स्थितियां हैं जो टीएमजे विकार जैसे लक्षण पैदा करती हैं। इसमें दांत दर्द, साइनस की समस्या, गठिया या मसूढ़े के रोग शामिल हैं। एक दंत चिकित्सक सावधानीपूर्वक रोगी से बातचीत करके और कुछ परीक्षणों के जरिए पता लगा सकता है कि इस तकलीफ की असली वजह क्या है। टीएमजे विकार का उपचार थोड़ी सावधानियां बरतते हुए और इंजेक्शन व सर्जरी आदि की मदद से संभव है।

इन विकारों के लिए कुछ घरेलू उपचार :

1. ओवर-द-काउंटर दवाएं : नैप्रोक्सेन या इबुप्रोफेन जैसी दवाओं से मांसपेशियों में दर्द और सूजन से राहत मिलती है।

2.  आइस पैक : लगभग 10 मिनट के लिए चेहरे व कनपटी पर आइस पैक लगाने से मदद मिल सकती है।

3.  नरम खाद्य पदार्थ खाएं : दही, उबले आलू, पनीर, सूप, अंडा करी, मछली, फल और सब्जियां, बींस अच्छे विकल्प हैं।

4. जबड़े को ज्यादा न चलाएं : न कुछ चबाएं न जम्हाई लें। ऐसी किसी भी गतिविधि से बचें, जिससे आपको अपना मुंह ज्यादा खोलना पड़े।

5.  बैठने की अवस्था : गर्दन और चेहरे के दर्द को कम करने के लिए ठीक तरह से बैठें।

6.  विश्राम करें : योग और ध्यान जैसी तकनीकों से तनाव कम होता है और आराम मिलता है।