रिलायंस कम्युनिकेशंस और सिस्टेमा के विलय को मंजूरी, जानें क्या होंगे बदलाव

नई दिल्ली। रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के विलय को मंजूरी मिल गयी है। रिलायंस कम्यूनिकेशंस लिमिटेड को टेलिकॉम डिपार्टमेंट की ओर से सिस्टेमा श्याम टेलिसर्विसेज लिमिटेड के वायरलेस बिजनस के विलय की मंजूरी मिली है। इस सौदे के बाद अब देश में मोबाइल कंपनियों की संख्या घटकर 10 रह जाएगी।

Merger Of Sistema Shyam Teleservices With Reliance Communications :

इस डील के मुताबिक एसएसटीएल का सारा वायरलैस बिजनेस एसेट्स आर-कॉम के अधीन आ जाएगा। हालांकि इसका एमटीएस ब्रैंड स्वतत्र रुप से काम करता रहेगा। दूरसंचार विभाग ने इस सौदे को 20 अक्टूबर को मंजूरी दी है। इस सौदे के तहत एसएसटीएल की समूची वायरलैस कारोबारी संपत्तियां आरकॉम के अधीन आएंगी।

रिलायंस कम्यूनिकेशंस के मुताबिक इस विलय के चलते कंपनी को 20 लाख अतिरिक्त सबस्क्राइबर्स मिलेंगे। इसके अलावा उसके रेवेन्यू में भी 700 करोड़ रुपये सालाना का इजाफा होगा। सिस्टेमा के कुल 30 लाख वायरलेस सबस्क्राइबर्स हैं। इस सौदे को दूरसंचार विभाग की मंजूरी ऋण बोझ से दबी आरकॉम के लिए कुछ राहत माना जा रहा है क्योंकि एयरसेल के साथ उसका प्रस्तावित विलय सौदा इसी महीने टूट गया।

ट्राई की ओर से सितंबर में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 60 फीसदी यूजर ही फिलहाल ऐक्टिव हैं। इस डील से आर-कॉम के पास 800/850 MHz बैंड स्पेक्ट्रम की भी क्षमता होगी और उसे इससे 4G LTE सर्विसेज में भी मदद मिलेगी।

नई दिल्ली। रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के विलय को मंजूरी मिल गयी है। रिलायंस कम्यूनिकेशंस लिमिटेड को टेलिकॉम डिपार्टमेंट की ओर से सिस्टेमा श्याम टेलिसर्विसेज लिमिटेड के वायरलेस बिजनस के विलय की मंजूरी मिली है। इस सौदे के बाद अब देश में मोबाइल कंपनियों की संख्या घटकर 10 रह जाएगी। इस डील के मुताबिक एसएसटीएल का सारा वायरलैस बिजनेस एसेट्स आर-कॉम के अधीन आ जाएगा। हालांकि इसका एमटीएस ब्रैंड स्वतत्र रुप से काम करता रहेगा। दूरसंचार विभाग ने इस सौदे को 20 अक्टूबर को मंजूरी दी है। इस सौदे के तहत एसएसटीएल की समूची वायरलैस कारोबारी संपत्तियां आरकॉम के अधीन आएंगी। रिलायंस कम्यूनिकेशंस के मुताबिक इस विलय के चलते कंपनी को 20 लाख अतिरिक्त सबस्क्राइबर्स मिलेंगे। इसके अलावा उसके रेवेन्यू में भी 700 करोड़ रुपये सालाना का इजाफा होगा। सिस्टेमा के कुल 30 लाख वायरलेस सबस्क्राइबर्स हैं। इस सौदे को दूरसंचार विभाग की मंजूरी ऋण बोझ से दबी आरकॉम के लिए कुछ राहत माना जा रहा है क्योंकि एयरसेल के साथ उसका प्रस्तावित विलय सौदा इसी महीने टूट गया। ट्राई की ओर से सितंबर में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक इनमें से 60 फीसदी यूजर ही फिलहाल ऐक्टिव हैं। इस डील से आर-कॉम के पास 800/850 MHz बैंड स्पेक्ट्रम की भी क्षमता होगी और उसे इससे 4G LTE सर्विसेज में भी मदद मिलेगी।