हरमनप्रीत कौर के पिता ने कहा- मेरी बेटी कई बेटों पर भारी है

नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया को हरा भारतीय टीम ने महिला वर्ल्ड क्रिकेट टूर्नामेंट के फाइनल में जगह बना ली है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस मैच में हरमनप्रीत ने शानदार 171 रन नाबाद बनाकर इतिहास रच दिया, लेकिन हरमनप्रीत द्वारा इतिहास रचने के पीछे भी पूरा इतिहास है। जब वह छोटी थो तो अक्सर अपने पिता के साथ गुरु नानक स्टेडियम जाया करती थी। यह स्टेडियम उनके घर के सामने ही पड़ता था। वहां वह लड़कों के साथ क्रिकेट खेलती। इस दौरान सरकारी स्कूल टीम सदस्य हॉकी और एथलेटिक्स को भी तवज्जो देते थे। ऐसे में क्रिकेट की दुनिया में एक लड़की का पहचान बनाना काफी मुश्किल था।

2009 की बात है, जब हरमनप्रीत कौर पहली बार सुर्खियों में आई। भारतीय टी 20 टीम में चुने जाने से पूर्व उसने चैलेंजर ट्रॉफी में बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया। हरमनप्रीत ने टूर्नामेंट की दो पारियों में केवल 8 रन बनाए लेकिन 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ बनाए उनके शतक ने टीम में उनकी जगह बचाए रखी।

गुरुवार को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मैच से पहले हरमनप्रीत ने अपने कोच कमलदेश के बेटे यादविंद्र सिंह सोढी, से बात की। उनके कोच का कहना है, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमेशा ही हरमन बेहतर परफॉर्म करना चाहती हैं। ऑस्ट्रेलिया में अपना पहला वर्ल्ड कप खेलते हुए हरमन प्रीत 110 मीटर लंबा छक्का मारा था। बाद में हरमन ने बताया कि मैं सिर्फ यह देखना चाहती थी कि क्या इसके लिए अतिरिक्त वेट की जरुरत होती है। 171 रनों की उनकी इस पारी ने दुनिया को दिखा दिया है कि रनों के मामले में उनका बल्ला कहीं ज्यादा वजनी है।

पोर्ट एडिलेड क्रिकेट क्लब पर हैड कोच यादवेंद्र का कहना है, ”अपने करियर की शुरुआत में हरमन निचले क्रम में बल्लेबाजी करती थीं लेकिन मुंबई में 2013 में इंग्लैंड के खिलाफ बनाए उनके शतक ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्होंने अपनी जगह तय की।”

मैच के बाद हरमन के पिता हरमंदर भुल्लर ने कहा कि, मेरी बेटी कई बेटों पर भारी है। हरमन के पिता ने कहा कि वे अपनी बेटी को और आगे बढ़ाना चाहते हैं और वे चाहते हैं कि उनकी बेटी विश्वकप जीते और देश का नाम रोशन करे। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने उनके सपने को पूरा किया और मोगा जैसे छोटे से शहर को दुनिया के नक्शे पर ले आई।