एरच परियोजना की धांधली दरकिनार, GIEPL को 400 करोड़ का ठेका देने की तैयारी में मंत्री धर्मपाल सिंह

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह इन दिनों घोटालेबाजों और भ्रष्टाचारियों पर पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहे हैं। सिंचाई विभाग की ठेकेदार कंपनी GIEPL को मंत्री जी के आदेश पर हुई जांच में दोषी तो पाया गया लेकिन विभाग ने गुपचुप तरीके से कार्रवाई को अंजाम देते हुए कुछ इंजीनियरों को बली का बकरा बना दिया और मंत्री जी ने कंपनी को धांधली में पारंगत पाते हुए 400 करोड़ का नया टेंडर देने का मन बना लिया। सूत्रों की माने तो मंत्री जी के विशेष निर्देश पर टेंडर में ऐसी शर्ते शामिल की जा रहीं हैं जिससे टेंडर मंत्री जी की चहेती कंपनी को ही मिल सके।

झांसी के निर्माणाधीन एरच बांध परियोजना का निर्माण करने वाली कंपनी मेसर्स घनाराम इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड (GIEPL) को सिंचाई मंत्री द्वारा आदेशित जांच में धांधली का दोषी पाया गया है। जांच रिपोर्ट मंत्री जी तक पहुंची और उसके बाद गायब हो गई। विभागीय रिकार्ड में एरच परियोजना के कुछ इंजीनियरों के खिलाफ निलम्बन की कार्रवाई अंजाम दी गई है। जिसमें जीआईईपीएल को पूरी तरह से बचा दिया गया।

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GIEPL को 400 करोड़ का ठेका देने की तैयारी में मंत्री धर्मपाल सिंह

 

सूत्रों की माने तो 2015 में शुरू हुई एरच बांध परियोजना का ठेका जीआईईपीएल को सत्ता में अपनी पकड़ के बूते हासिल हुआ था। शिलान्यास के समय इस परियोजना की अनुमानित लगात 612 करोड़ आंकी गई। परियोजना शुरू हुई तो इसकी लागत बढ़कर 1000 करोड़ से पार कर गई। परियोजना की बढ़ती लागत ने ही जीआईईपीएल और परियोजना से जुड़े सिंचाई विभाग के अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए।

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इस दौरान प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और यूपी में सीएम योगी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। झांसी के ही पार्टी नेताओं ने सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से शिकायत कर इस परियोजना में धांधली होने का सवाल उठाया तो मंत्री जी ने भी जांच के आदेश कर दिए।

जांच दोषी पाई गई जीआईईपीएल —

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सूत्रों की माने तो विभागीय जांच में समाने आया कि जीआईईपीएल ने परियोजना से जुड़े विभाग के इंजीनियरों की मिली भगत से बड़े स्तर पर धांधली को अंजाम दिया। अधिकारियों की जीआईईपीएल से ऐसी सांठगांठ थी कि कंपनी को हमेशा एडवांस पेमेंट किया जाता रहा। कंपनी ने बांध ​के निर्माण के साथ—साथ आसपास के इलाके में बेहिसाब खनन करवाया। जिसमें भारी तादात में पत्थर निकला। इस पत्थर का प्रयोग कहां हुआ इसका हिसाब किसी के पास नहीं मिला।

कंपनी ने विभागीय अधिकारियों को मोटा कमीशन खिलाकर 612 करोड़ की योजना को 1083 करोड़ का करवा दिया। विभागीय के कई इंजीनियर ऐसे थे जिन्होंने अपने रिटायरमेंट से ठीक पहले जीआईईपीएल को करोड़ों का फायदा करवाया।

केवल अधिकारियों पर गिरी गाज —

सिंचाई विभाग ने एरच बांध परियोजना की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किए बिना ही विभाग के कई इंजीनियरों पर कार्रवाई कर दी। जिनमें कुछ रिटायर इंजीनियरों के नाम भी शामिल थे। उम्मीद की जा रही थी कि​ सिंचाई विभाग जीआईईपीएल को ब्लैकलिस्ट करेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। केवल कुछ इंजीनियरों को निलंबित कर खानापूर्ती कर दी गई। आरोप है कि विभागीय मंत्री के कहने पर ही जांच रिपोर्ट को दबाया गया और जीआईईपीएल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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मंत्री और जीआईईपीएल के बीच हुइ सांठगांठ —

पर्दाफाश के सूत्रों की माने तो एरच परियोजना में जीआईईपीएल के धांधली को धर्मपाल सिंह हजम कर गए हैं। मंत्री और कंपनी के बीच तगड़ी डील हो चुकी है। इस डील के तहत ही मंत्री जी ने झांसी में प्रस्तावित 400 करोड़ के वीअर ( नदी के बीच बनने वाले एक तरह का बांध, जिसके माध्यम से नदी में जल के प्रवाह और प्रवाहित जल की मात्रा को नियंत्रित किया जाता है) के निर्माण के लिए जीआईईपीएल को आश्वस्त कर दिया है।

पर्दाफाश के सूत्रों का तो कहना यहां तक है कि मंत्री जी के ​इशारे पर वीअर के डीपीआर में ऐसी शर्तें डाली गईं हैं, जिनके आधार पर केवल जीआईईपीएल ही एक मात्र ऐसी कंपनी होगी जो इस टेंडर की ​टेक्निकल शर्तों को पूरा कर सकेगी। सीधे तौर पर यह टेंडर जीआईईपीएल को मिलना तय है।

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