मोदी के जीएसटी ने उड़ाए योगी के मंत्री के होश

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार दावा कर रही है कि उसके द्वारा जीएसटी (यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के रूप में किया गया कर सुधार आजादी के बाद देश का सबसे बड़ा कर सुधार है। इसके लिए अखबारों और टीवी चैनलों पर प्रतिदिन करोड़ों रुपए के विज्ञापन देकर सरकार आम जनता का जीएसटी से परिचय करवा रही है। आम जनता के बीच जीएसटी को लेकर किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे इसके लिए बीजेपी शासित राज्यों की सरकारों ने अपने मंत्रियों को अपने अपने क्षेत्र में कार्यक्रम कर लोगों का भ्रम दूर करने की जिम्मेदारी सौंपी है।

यूपी की सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री रमापति शास्त्री भी जनता के बीच जीएसटी के प्रचार के लिए पहुंचे थे। मंत्री जी के कार्यक्रम की तैयारी पूरी थी। चारों ओर से समर्थकों से घिरे थे। इस दौरान मीडिया भी पहुंची और किसी पत्रकार ने मंत्री जी से जीएसटी की फुलफार्म पूछ लिया। सवाल सुनते ही मंत्री जी के होश उड़ गए। मंत्री जी के मुंह से बस एक बात बार बार निकल रही थी कि आ रहा है और आ रहा है। पत्रकारों को लगा कि शायद मंत्री जी की जुबान और दिमाग में तालमेल नहीं हो पा रहा है। मंत्री जी ने इस दौरान बेमन हंस कर परिस्थिति को साधने की कोशिश भी की लेकिन कैमरे के सामने करते तो क्या करते।

इसी दौरान उनके बगल बैठे एक व्यक्ति ने मंत्री जी को बताया भी जीएसटी का मतलब होता है गुड्स एंड सर्विस टैक्स लेकिन मंत्री जी को पहली बार में उसकी बात पर भरोसा नहीं हुआ। इसके बाद पास बैठे व्यक्ति ने एक बार फिर अपनी बात दोहराई तो मंत्री जी ने भी उसकी नकल कर अपना जवाब दे दिया।

योगी सरकार के इन मंत्री मोहदय का यह हाल तब है जब इन्हें जनता के बीच जाने से पहले जीएसटी को लेकर एक विशेष कार्यशाला में सारी जानकारियां दी जा चुकीं हैं। इसके बावजूद मंत्री जी यह बात याद नहीं रख सके कि जीएसटी किस चिड़िया का नाम है।

जब सरकार रमापति शास्त्री जैसे लोगों को जीएसटी जैसे गूढ़ विषयों पर जनता का भ्रम दूर करने के लिए भेजेगी तो आप समझ सकते हैं कि जनता का भ्रम बढ़ेगा या घटेगा। हो न हो ऐसी घटनाएं हमारे नेताओं की योग्यता की पोल जरूर खोल देतीं हैं। जो कुर्सी का मतलब जानते हैं उस कुर्सी के साथ आने वाली जिम्मेदारियों और अपने कर्तव्यों से अनजान हैं।