मंत्री जी के बेशर्म बोल, ‘अरे भाई मर गए तो मर गए. अब उनको लेकर क्या रोना’

Minister Vishnu Savara Insensitive Comment On Malnutrition Death In Maharashtra

मुंबई। सरकार चाहे कितनी भी तरक्की की बातें कर ले लेकिन आदिवासियों की स्थिति आज भी वहीं की वहीं है। कोई सरकार उनकी परिस्थितियों का मजाक उड़ाती है तो कोई उनकी परेशानी का मजाक उड़ाती है। भाजपा सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्री विष्‍णु सावरा ने आदिवासियों को लेकर एक ऐसा शर्मनाक बयान दिया है जिसको लेकर हड़कंप मंच हुआ है। उन्होंने आदिवासियों की मौत को एक आम बात बताते हुए कहा है कि जो मर गया उसको लेकर क्या रोना। कोशिश करो की आगे ऐसा ना हो।




ये पूरा मामला आदिवासी कल्याण मंत्री के चुनावक्षेत्र पालघर ज़िले का हैं। मंत्री जी क्षेत्र का दौरा करने गए थे इस दौरान इलाकाई लोगों ने मंत्री जी को बताया कि कुपोषण की वजह से यहाँ पर 600 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं पर सरकार ने अभी तक कोई भी मदद नहीं की है। इस पर मंत्री जी ने कहा कि अरे भाई मर गए तो मर गए न, अब उसका क्या? कोशिश करो कि इसके आगे ऐसा न हो। अपने इसी बयान के कारण मंत्री जी विवादों में फंस गए हैं।

लोगों में दिखा गुस्सा

मंत्री जी के दौरे को लेकर लोगों के बीच गुस्सा था क्योंकि वो उस परिवार से दो हफ्ते बाद मिले जहाँ कुपोषण से मौत हुई थी। गुरुवार को जब सावरा पालघर के मोखाड़ा इलाके में नेता जी उस परिवार से मिलने पहुंचे जहाँ पर कुपोषण की वजह से मौत हुई थी तो बच्चे की माँ ने उनको बाहर ही रोक दिया। गुस्साए लोगों ने मंत्री जी को गाँव से बाहर खदेड़ दिया।

बयान से पलटे

विवाद बढ़ता देख विष्णु सावरा अपने बयान से पलट गए। उन्होंने कहा कि मेरे कहने का ये मतलब नहीं था जो निकाला जा रहा है। मेरे बयान को गलत तरीके से बताया जा रहा है। मैंने इस तरह का बयान नहीं दिया था। हालांकि मंत्री जी को अपने बयान की वजह से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की डांट भी खानी पड़ी।




क्या कहते हैं आकड़े

उल्लेखनीय है कि हजारों आदिवासी कुपोषण की वजह से अपनी जान गवां देते है और यह आंकड़ा दिन प्रति दिन बढ़ता जा रहा है। इस साल भी अब तक कुपोषण की वजह से 126 मौतें हो चुकी हैं। इतनी मौत हो जाने के बावजूद सरकार आदिवासियों के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। मौतों के आंकड़ों के बारे में राज्य सरकार कहती है कि 1 अप्रैल 2015 से जुलाई 2016 तक 683 बच्चे कुपोषण के शिकार हो चुके हैं, जबकि विपक्ष दुगनी मौतें होने का दावा कर रहा है।

कोमल निगम की रिपोर्ट

मुंबई। सरकार चाहे कितनी भी तरक्की की बातें कर ले लेकिन आदिवासियों की स्थिति आज भी वहीं की वहीं है। कोई सरकार उनकी परिस्थितियों का मजाक उड़ाती है तो कोई उनकी परेशानी का मजाक उड़ाती है। भाजपा सरकार के आदिवासी कल्याण मंत्री विष्‍णु सावरा ने आदिवासियों को लेकर एक ऐसा शर्मनाक बयान दिया है जिसको लेकर हड़कंप मंच हुआ है। उन्होंने आदिवासियों की मौत को एक आम बात बताते हुए कहा है कि जो मर गया उसको लेकर क्या रोना।…