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वित्त मंत्रालय: बजट प्रक्रिया में शामिल अफसर नहीं कर पाए पिता के अंतिम दर्शन, ये रही वजह

Ministry Of Finance The Officials Involved In The Budget Process Could Not See The Final Vision Of Their Father This Is The Reason

By बलराम सिंह 
Updated Date

नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय में देश का बजट पेश करने की तैयारी जोर शोर से चल रही हैं। सोमवार को हलवा रस्म के बाद बजट पेपर्स की छपाई का काम शुरू हो गया। बजट पेपर्स की छपाई नॉर्थ ब्लॉक प्रेस में होती है। यहां वित्त मंत्रालय के अधिकारी पेपर्स की छपाई तक 10 दिन बंद रहते हैं, वे किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क नहीं कर सकते, अपने घर वालों से भी बात नहीं कर सकते।

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वित्त मंत्रालय ने ट्वीट कर अपने एक अधिकारी कुलदीप कुमार शर्मा की तारीफ की है। 26 जनवरी को कुलदीप के पिता का निधन हो गया, इसके बावजूद वे घर नहीं गए। कुलदीप वित्त मंत्रालय की प्रेस में डिप्टी मैनेजर हैं। जब तक बजट पेश नहीं हो जाता, तब तक बजट प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को बाहर जाने की इजाजत नहीं होती। यानी कुलदीप अब 1 फरवरी को ही बाहर निकल सकते हैं।

बजट बनाने की प्रक्रिया आमतौर पर सितंबर से शुरू हो जाती है, जो 6 महीने तक चलती है। बजट दस्तावेज छपने की प्रक्रिया हलवा सेरेमनी से शुरू हो जाती है। इस बार हलवा सेरेमनी 20 जनवरी को हुई थी। हलवा सेरेमनी के बाद बजट प्रक्रिया से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी वित्त मंत्रालय में ही रहते हैं। बजट पेश होने से दो दिन पहले मंत्रालय को सील कर दिया जाता है। संसद में बजट पेश हो जाने के बाद ही बजट प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों को बाहर आने दिया जाता है।

बजट दस्तावेज गोपनीय रहते हैं। बजट तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी से लेकर अधीनस्थ कर्मचारी, स्टेनोग्राफर्स, टाइपराइटर्स, प्रिंटिग प्रेस के कर्मचारी और अन्य लोग दफ्तर में ही रहकर काम करते हैं। गोपनीयता बनाए रखने के लिए आखिरी वक्त पर उन्हें अपने परिवार से बात करने की भी इजाजत नहीं रहती है। इस दौरान बजट तैयार करने वाले और इसके प्रकाशन से जुड़े लोगों पर कड़ी नजर रखी जाती है। बजट प्रक्रिया में वित्त मंत्री का भाषण सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है। जिसे बजट घोषणा से सिर्फ दो दिन पहले ही छपने के लिए भेजा जाता है।

बजट दस्तावोजों को पहले राष्ट्रपति भवन में ही छापा जाता था, लेकिन 1950 में बजट का कुछ हिस्सा लीक हो गया था। ये गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट था, जिसे इंग्लैंड के एक पत्रकार ने लीक कर दिया था। इसके बाद इसे दिल्ली के मिंटो रोड स्थित सिक्योरिटी प्रेस में छापा जाने लगा। 30 साल तक सिक्योरिटी प्रेस में छापने के बाद 1980 से इसे बजट नॉर्थ ब्लॉक स्थित वित्त मंत्रालय की प्रेस में छापा जाने लगा। पिछले 40 साल से इसे यहीं छापा जा रहा है। बजट पहले सिर्फ अंग्रेजी भाषा में ही तैयार होता था, लेकिन 1955-56 से इसे हिंदी में भी छापा जाने लगा।

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