राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों की जाति पर बहस पी​ड़ादायी: मीरा कुमार

Mira Kumar

Mira Kumar Shows Her Disappointment With Discussion Of Cast In President Election News

नई दिल्ली। देश की राजनीति में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीति अपने चरम पर है। एक ओर सत्तारूढ़ राजग ने रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो दूसरी ओर यूपीए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतारकर मुकाबले को कड़ा बना दिया है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है ​क्योंकि दोनों ही उम्मीदवार दलित राजनीति का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि राजनीति विश्लेषक इस चुनाव को दलित बनाम दलित करार दे रहे हैं। लेकिन यह बात मीरा कुमार को पीड़ा दे रही है।

अपने लिए समर्थन के लिए अलग अलग राज्यों में जाकर विधायकों का समर्थन जुटाने में लगी मीराकुमार ने शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि यह पहला राष्ट्रपति चुनाव है जिसमें उम्मीदवारों की जाति की चर्चा की जा रही है। न जाने ऐसे क्या कारण हैं कि देश का उच्च शिक्षित वर्ग भी जातिवादी मा​नसिकता से ऊपर उठकर सोच नहीं पा रहा है।

उन्होंने कहा कि देश आधुनिक काल में पहुंच चुका है, लेकिन ऐसी बहसें स्पष्ट कर देतीं हैं कि लोगों की मानसिकता अभी भी बदली नहीं है। यह बहुत चिंतित करने वाला है कि हमारी सोच बदली नहीं है।

उन्होंने कहा कि जब रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया उसी समय से उनकी जाति को लेकर बहस शुरू हुई, किसी के पास चर्चा का और कोई विषय नहीं था। हमें देखना होगा हम कहां खड़े हैं। हम सभी देश की तरक्की चाहते हैं, सुविधाओं में सुधार चाहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी सोच को व्यापक बनाए, यह जाति आ​धारित न हो लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में आज भी जातिवाद है। दलितों को निम्न और तुच्छ माना जाता है। देश के जितने भी चुनाव होते हैं उनमें सर्वाधिक दलितीकरण होता है। हमें जातिवाद की सोच से बाहर निकला पड़ेगा। दलितों के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ खड़ा होना स्वागत योग्य होना चाहिए लेकिन राष्ट्रपति जैसे चुनाव में दलित राजनीति को लेकर बहस करना गलत है।

नई दिल्ली। देश की राजनीति में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर राजनीति अपने चरम पर है। एक ओर सत्तारूढ़ राजग ने रामनाथ कोविंद को अपना उम्मीदवार घोषित किया है तो दूसरी ओर यूपीए पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतारकर मुकाबले को कड़ा बना दिया है। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है ​क्योंकि दोनों ही उम्मीदवार दलित राजनीति का हिस्सा रहे हैं। यही वजह है कि राजनीति विश्लेषक इस चुनाव को दलित बनाम दलित करार दे रहे हैं। लेकिन…