चमत्कार, 700 ग्राम वजन के साथ जन्मे बच्चे की डॉक्टर ने बचाई जान

लखनऊ। यूपी के बिजनौर में एक निजी नर्सिंग होम के डाक्टरों चमत्कार कर दिखाया है। डाक्टरों की सूझबूझ से 24 सप्ताह के गर्भस्थ शिशु की डॉक्टरों ने जान बचा ली है। नवजात का वजन 700 ग्राम बताया जा रहा है। डाक्टरों का कहना है कि इतने वजन के बच्चे का जीवित रहना अपने आप में चमत्कार है क्योंकि मेडिकल साइंस कहती है कि गर्भस्थ शिशु का प्रसव के समय वजन ढाई किलो होना चाहिए। जैसी परिस्थितियों में इस नवजात का जन्म हुआ है उन परिस्थितियों में नवजात को अमेरिका जैसे देशों में जीवित बचा पाना मुश्किल हो जाता है।




बिजनौर निवासी शाकिर की पत्नी नजारा गर्भवती थी। 16 नवंबर को अचानक तबियत बिगड़ने पर शाकिर नजारा को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां डाक्टरों ने परीक्षण के बाद प्रसव करवाने की सलाह दी। डाक्टरों को पूरी उम्मीद थी कि प्रसव के बाद प्रसूता की जान बच जाएगी लेकिन नवजात की जान बचाना नामुमकिन होगा क्योंकि शाकिर की पत्नी का गर्भ मात्र छह माह यानी 24 सप्ताह का था। डाक्टरों ने प्रसव के बाद देखा तो 700 ग्राम वजन के साथ दुनिया में आए नवजात की सांसे चल रहीं थी। जिसे देखकर डाक्टर चकित तो थे ही साथ में उनके सामने समस्या नवजात को जीवित रखने की थी।

परिस्थिति और अस्पताल में मौजूद इंतजामात को देखते हुए जिला अस्पताल के डाक्टरों ने शाकिर को नवजात को लेकर किसी निजी नर्सिंगहोम में भर्ती करवाने के लिए कहा। आनन फानन में बिजनौर के राज मल्टी स्पेश्यिलिटी हॉस्पिटल में नवजात को भर्ती करवा दिया।




निजी अस्पताल के संचालक डाक्टर सिद्धार्थ बताते हैं कि मेडिकल साइंस के मुताबिक छह माह के गर्भस्थ शिशु की जान बच पाना नामुमकिन है। इसके बावजूद ईश्वर की ईच्छा ही कहेंगे कि यह नवजात प्रकृति के नियमों और मेडिकल साइंस की मान्यताओं को झूठा साबित कर इस दुनिया में सांस ले रहा है। नवजात जब उनके अस्पताल में आया था तो उसका वजन 700 ग्राम था। 15 दिनों के इलाज के बाद अब उसका वजन बढ़कर 1200 ग्राम हो गया है। बच्चे को विशेष निगरानी में रखा गया है। अमेरिका में भी इस तरह के केस में नवजात को बचना नामुमकिन माना जाता है। डाक्टरी की भाषा में इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है।