शहीदों का अपमान करने वाली मिस तुर्की 2017 से छिन गया खिताब

शहीदों का अपमान करने वाली मिस तुर्की 2017 से छिन गया खिताब

एक कहावत तो आपने सुनी होगी कि पुराने पाप आदमी का पीछा नहीं छोड़ते। ऐसा ही कुछ तुर्की में हुआ जहां गुरुवार को मिस तुर्की 2017 का ताज जीतने वाली 18 वर्षीय आइतिर एसेन को चंद घंटों बाद ही अपना ताज लौटाना पड़ा। मिस तुर्की बनने के बाद एसेन मिस वर्ल्ड 2017 कंपटीशन के लिए तुर्की का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी शुरू करतीं लेकिन इससे पहले आयोजकों के सामने उनका एक पुराना विवादित ट्वीट सामने आ गया जिसे देखने के बाद एसेन से उनका खिताब वापस लेने का फैसला किया गया।

दरअसल हुआ कुछ ऐसा कि एसेन के विजेता बनने के बाद आयोजकों की नजर एक ऐसे ट्वीट पर पड़ी जिसमें मिस तुर्की बन चुकीं एसेन ने तुर्की के शहीदों का अपमान किया था। एसेन ने वह ट्वीट 15 जुलाई 2017 को उस समय किया था जब पूरा तुर्की एक वर्ष पहले सेना द्वारा की गई तख्ता पलट की कोशिश में मारे गए 250 नागरिकों की शहादत को याद कर रहा था। इस आयोजन को तुर्की सरकार के आदेश पर मनाया गया था। एसेन ने इस आयोजन को लेकर किए ट्वीट में लिखा, 15 जुलाई को सेलीब्रेट करने के लिए मुझे पीरियड्स हो रहे हैं, मेरा यह खून शहीदों के खून को दर्शाता है।

मिस तुर्की 2017 कॉन्टेस्ट के आयोजकों की ओर से एसेन के इस पुराने ट्वीट को आपत्तिजनक और अस्वीकार्य करार देते हुए, निर्णायक मंडल के ​फैसले को बदलते हुए चंद घंटों में ही खिताब वापस लेने की घोषणा कर दी।

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आयोजको का कहना था कि प्रतियोगिता के खत्म होने के बाद उनकी नजर एसेन की विवादित ट्वीट पर पड़ी। जिसके बाद एक बैठक बुलकार इस विषय पर चर्चा की गई और ​अंत में सभी निष्कर्ष पर पहुंचे। मिस तुर्की पेजेंट के आयोजक इस प्रकार की विचारधारा से प्रभावित लोगों को आगे नहीं बढ़ाना चाहते।

वहीं एसेन का कहना है कि उनका ट्वीट किसी राजनीतिक महात्वाकांक्षा से प्रभावित नहीं था, उन्होंने एक 18 वर्षीय लड़की के रूप में वह ट्वीट किया था। अपने देश का सम्मान करना उन्होंने बचपन से सीखा है। उनकी नियत किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। इसके बावजूद लोगों आयोजकों को उनके ट्वीट को लेकर गलतफहमी हुई।

बताया जा रहा है कि एसेन का खिताब छीने जाने के बाद 2017 की मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में तुर्की का प्रतिनिधित्व करने के लिए रनर अप रहीं आस्ली सुमेन चीन जाएंगी।

आपको बता दें कि 2016 में तुर्की में सेना द्वारा अंजाम दी गई तख्ता पलट की कोशिश में 250 लोग मारे गए थे। इस घटना के बाद तुर्की सरकार ने तकरीबन 150,000 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया था और 50,000 से ज़्यादा लोगों को जेलों में भी डाला गया था।