51 साल बाद राेहतांग पास में मिलें लापता विमान एन-12 के पुर्जे

rohtang pass
51 साल बाद राेहतांग पास में मिलें लापता विमान एन-12 के पुर्जे

नई दिल्ली। देश ने अपने कई लड़ाकू विमान खोये है कुछ का मलबा मिला कुछ का आज भी लापता है और कुछ का तो अरसे बाद मिला। जी हां, हम बात कर रहे 51 साल पहले हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास के करीब लापता हुए एन-12 बीएल-534 विमान के पुर्जे डोगरा स्काउट्स और वायुसेना की संयुक्त टीम ने रविवार को बरामद किए। रक्षा विभाग ने जानकारी दी कि डोगरा स्काउट्स ने पश्चिमी कमान मुख्यालय की मदद से ढाका ग्लेशियर में 5240 मी. की ऊंचाई पर खोज शुरू की थी।

Missing Aircraft N 12 Parts Found In Rohtang Pass After 51 Years :

दरअसल, 51 साल पहले दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में कुल 96 जवान सवार थे जिनके शव आज तक बरामद नहीं हो पाए है। टीम को वायुसेना के इस विमान का एयरो इंजन, ढांचा, इलेक्ट्रिक सर्किट्स, एयर ब्रेक, कॉकपिट का दरवाजा और यात्रियों का कुछ सामान मिला है। डोगरा स्काउट्स ने 26 जुलाई को खोज शुरू की थी। ये 7 फरवरी 1968 को लापता हुआ था।

बता दें, सर्च अभियान का पहला फेज 3 अगस्त को शुरू किया गया था, जो 18 अगस्त को खत्म हुआ। यह सर्च अभियान हवाई दुर्घटना स्थल (17292 फीट) तक चलाया गया। टीम ने इस ग्लेशियर में 80 डिग्री तक ढाल वाली दुर्गम चोटियों पर जवानों के शव और दुर्घटनाग्रस्त जहाज के मलबे की तलाश की। एयर फोर्स ने 6 अगस्त को सेना का यह सर्च ऑपरेशन ज्वाइन किया और विशेष टीम के सदस्यों को बर्फ के नीचे दबे विमान के मलबे को पहचानने में मदद की। 7 फरवरी 1968 में एयरफोर्स के एन-12 (बीएल-534) को 96 जवानों को चंडीगढ़ से लेह में छोड़कर आने का टास्क मिला था।

नई दिल्ली। देश ने अपने कई लड़ाकू विमान खोये है कुछ का मलबा मिला कुछ का आज भी लापता है और कुछ का तो अरसे बाद मिला। जी हां, हम बात कर रहे 51 साल पहले हिमाचल प्रदेश के रोहतांग पास के करीब लापता हुए एन-12 बीएल-534 विमान के पुर्जे डोगरा स्काउट्स और वायुसेना की संयुक्त टीम ने रविवार को बरामद किए। रक्षा विभाग ने जानकारी दी कि डोगरा स्काउट्स ने पश्चिमी कमान मुख्यालय की मदद से ढाका ग्लेशियर में 5240 मी. की ऊंचाई पर खोज शुरू की थी। दरअसल, 51 साल पहले दुर्घटनाग्रस्त हुए विमान में कुल 96 जवान सवार थे जिनके शव आज तक बरामद नहीं हो पाए है। टीम को वायुसेना के इस विमान का एयरो इंजन, ढांचा, इलेक्ट्रिक सर्किट्स, एयर ब्रेक, कॉकपिट का दरवाजा और यात्रियों का कुछ सामान मिला है। डोगरा स्काउट्स ने 26 जुलाई को खोज शुरू की थी। ये 7 फरवरी 1968 को लापता हुआ था। बता दें, सर्च अभियान का पहला फेज 3 अगस्त को शुरू किया गया था, जो 18 अगस्त को खत्म हुआ। यह सर्च अभियान हवाई दुर्घटना स्थल (17292 फीट) तक चलाया गया। टीम ने इस ग्लेशियर में 80 डिग्री तक ढाल वाली दुर्गम चोटियों पर जवानों के शव और दुर्घटनाग्रस्त जहाज के मलबे की तलाश की। एयर फोर्स ने 6 अगस्त को सेना का यह सर्च ऑपरेशन ज्वाइन किया और विशेष टीम के सदस्यों को बर्फ के नीचे दबे विमान के मलबे को पहचानने में मदद की। 7 फरवरी 1968 में एयरफोर्स के एन-12 (बीएल-534) को 96 जवानों को चंडीगढ़ से लेह में छोड़कर आने का टास्क मिला था।