सपा को एक और तगड़ा झटका, MLC अशोक बाजपेयी ने दिया इस्तीफा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) से एक और एमएलसी ने पार्टी से किनारा करते हुए इस्तीफा दे दिया है। एमएलसी अशोक बाजपेयी ने बुधवार को विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा। अशोक बाजपेयी का कहना है, समाजवादी पार्टी में नेतीजी की लगातार हो रही उपेक्षा के चलते उन्होने इस्तीफा दिया है। उनका कहना है, जिसने पार्टी को खड़ा किया आज पार्टी में उसी की उपेक्षा हो रही है।

Mlc Ashok Bajpai Resigned From Mlc Ashok Bajpai Resigned From Sapa :

 

अशोक बाजपेयी की गिनती सपा के बड़े ब्राह्मण नेताओं में होती थी। वह मुलायम के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। मुलायम ने मुख्यमंत्री रहते बाजपेयी को मंत्री भी बनाया था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा ने अशोक बाजपेयी को लखनऊ सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन प्रचार शुरू होने के बाद एकाएक उनका ट‍िकट काट दिया गया। उनकी जगह पर अख‍िलेश यादव के करीबी और पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था।

बताते चलें कि बीते 12 द‍िनों में अशोक बाजपेयी के अलावा पार्टी के 3 एमएलसी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। सपा में बढ़ती बागियों की संख्या आज भले ही अखिलेश यादव को परेशान न कर रही हो लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को ऐसे नेताओं की कमी खलेगी जिनके पास अनुभव और जनाधार दोनों हैं।

 

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) से एक और एमएलसी ने पार्टी से किनारा करते हुए इस्तीफा दे दिया है। एमएलसी अशोक बाजपेयी ने बुधवार को विधान परिषद के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा। अशोक बाजपेयी का कहना है, समाजवादी पार्टी में नेतीजी की लगातार हो रही उपेक्षा के चलते उन्होने इस्तीफा दिया है। उनका कहना है, जिसने पार्टी को खड़ा किया आज पार्टी में उसी की उपेक्षा हो रही है। अशोक बाजपेयी की गिनती सपा के बड़े ब्राह्मण नेताओं में होती थी। वह मुलायम के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। मुलायम ने मुख्यमंत्री रहते बाजपेयी को मंत्री भी बनाया था। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा ने अशोक बाजपेयी को लखनऊ सीट से उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन प्रचार शुरू होने के बाद एकाएक उनका ट‍िकट काट दिया गया। उनकी जगह पर अख‍िलेश यादव के करीबी और पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा को उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था।बताते चलें कि बीते 12 द‍िनों में अशोक बाजपेयी के अलावा पार्टी के 3 एमएलसी अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। सपा में बढ़ती बागियों की संख्या आज भले ही अखिलेश यादव को परेशान न कर रही हो लेकिन इस बात में कोई संदेह नहीं है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को ऐसे नेताओं की कमी खलेगी जिनके पास अनुभव और जनाधार दोनों हैं।