बुलंदशहर कांड : आस्था, दिखावा, हिंसा या फिर राजनीति ?

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बुलंदशहर कांड : आस्था, दिखावा, हिंसा या फिर राजनीति ?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर मे​ जिस तरीके से एक आॅन ड्यूटी इंस्पेक्टर को मौत के घाट उतार दिया, उसने जहां एक तरफ प्रदेश के सरकार के इकबाल पर सवालिया निशान लगा दिया, वहीं दूसरी तरफ इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए। जिस निर्ममता के साथ इंस्पेक्टर को भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया, उसने अब ये कह पाना मुश्किल हो गया है ये ​घटना आस्था, दिखावा और लोगों की​ हिंसक मानसिकता की देन है या​ फिर राजनीति के तहत इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को रास्त के हटाया गया है।

Mob Attacked The Police Station In Bulandshahr Police Inspector Dies In Firing Suspected Of Cow Slaughter 2 :

घटना के बाद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के बेटे ने कहा कि पापा के पास अक्सर अंजान लोगों के फोन आते थे और वो लोग उनके द्वारा की जा रही विवेचनाओं को प्रभावित करने का प्रयास करते थे, हालाकि शहीद इंस्पेक्टर बेटे ने ये भी कहा कि पापा कभी भी इन लोगों से नहीं डरे और वो इमानदारी के साथ अपना फर्ज निभाते रहे। अब सवाल उठता है कि जब सुबोध कुमार को धमकियां मिल रही थी, तो उनका विभाग मौन क्यों रहा? जिस जगह गोहत्या को लेकर भड़की हिंसा ने इतना बड़ा रूप ले लिया था वहां एक इंस्पेक्टर को चंद सिपाहियों के सा​थ क्यों भेजा गया? क्या इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को फू्र प्रूफ प्लानिंग के तहत मारा गया है?

फिलहाल इस पूरे मामलें में सुबोध की बहन ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि मेरे भाई की हत्या षत्रयंत्र तहत हुई है। बहन ने ये भी कहा कि भाई की हत्या साजिस पुलिसकर्मियों ने ही करवाई है। फिलहाल परिजनों ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। बतां दें कि बुलंदशहर के स्याना गांव में रविवार रात कुछ लोगों ने दो ढाई दर्जन मवेशियों को काट दिया था। वहां बवाल शुरु हुआ तो पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने वहां से भीड़ को हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब वो लोग नहीं हटे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, बस इतने में पथराव शुरु हो गया। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के साथ रहे पुलिसकर्मी तो वहां से भाग खड़े हुए। इसके बाद भीड़ ने उन्हे पकड़ लिया और खेतों में ले जाकर उल्टा लटकाकर पीटने के बाद गोली मार दी। पीएम रिपोर्ट में उनकी आंख के पास गोली लगने की पुष्टि हुई है।

बिसाहड़ा कांड की कर रहे थे विवेचना

बता दें कि बुलंदशहर हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह बिसाहड़ा कांड के जांच अधिकारी थे। जिसमें गोहत्या के शक में भीड़ ने अखलाक नाम शख्स को पीट—पीटकर मार डाला था। बता दें कि सुबोध कुमार सिंह एटा के रहने वाले थे, हालाकि उनका एक घर मेरठ में भी है। तीन साल पहले उनका गाजियाबाद से ट्रांसफर हुआ था। शहीद इंस्पेक्टर की बहन का कहना है कि अखलाक केस की वजह से ही उसके भाई की हत्या की गई है। सबसे बड़ी बात जो उसने बोली वो ये कि भाई की हत्या की साजित पुलिसकर्मियों ने ही रची है।

भीड़ ने छीन ली थी सुबोध की सर्विस पिस्टल, वायरलेस और लाउडस्पीकर

बताया जा रहा है कि जब दंगे ने विकराल रूप में ले लिया तो सुबोध कुमार सिंह ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को शांत रहने की बात बोल रहे थे। तभी कुछ लोगों ने उनपर हमला बोल दिया और उनके हाथ लाउडस्पीकर छीनने के साथ ही उनकी सर्विस पिस्टल और वायरलेस छीन लिया गया। बताया जा रहा है कि सुबोध कुमार सिंह को गोली उन्ही की सर्विस पिस्टल से मारी गई है। सूत्रों का कहना है कि सुबोध से पिस्टल योगेश नामक शख्स ने छीना था, जो कि बजरंग दल से ताल्लुक रखता है।

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर मे​ जिस तरीके से एक आॅन ड्यूटी इंस्पेक्टर को मौत के घाट उतार दिया, उसने जहां एक तरफ प्रदेश के सरकार के इकबाल पर सवालिया निशान लगा दिया, वहीं दूसरी तरफ इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए। जिस निर्ममता के साथ इंस्पेक्टर को भीड़ ने मौत के घाट उतार दिया, उसने अब ये कह पाना मुश्किल हो गया है ये ​घटना आस्था, दिखावा और लोगों की​ हिंसक मानसिकता की देन है या​ फिर राजनीति के तहत इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को रास्त के हटाया गया है।घटना के बाद इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के बेटे ने कहा कि पापा के पास अक्सर अंजान लोगों के फोन आते थे और वो लोग उनके द्वारा की जा रही विवेचनाओं को प्रभावित करने का प्रयास करते थे, हालाकि शहीद इंस्पेक्टर बेटे ने ये भी कहा कि पापा कभी भी इन लोगों से नहीं डरे और वो इमानदारी के साथ अपना फर्ज निभाते रहे। अब सवाल उठता है कि जब सुबोध कुमार को धमकियां मिल रही थी, तो उनका विभाग मौन क्यों रहा? जिस जगह गोहत्या को लेकर भड़की हिंसा ने इतना बड़ा रूप ले लिया था वहां एक इंस्पेक्टर को चंद सिपाहियों के सा​थ क्यों भेजा गया? क्या इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह को फू्र प्रूफ प्लानिंग के तहत मारा गया है?फिलहाल इस पूरे मामलें में सुबोध की बहन ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि मेरे भाई की हत्या षत्रयंत्र तहत हुई है। बहन ने ये भी कहा कि भाई की हत्या साजिस पुलिसकर्मियों ने ही करवाई है। फिलहाल परिजनों ने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। बतां दें कि बुलंदशहर के स्याना गांव में रविवार रात कुछ लोगों ने दो ढाई दर्जन मवेशियों को काट दिया था। वहां बवाल शुरु हुआ तो पुलिस वहां पहुंची। पुलिस ने वहां से भीड़ को हटाने का प्रयास किया, लेकिन जब वो लोग नहीं हटे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया, बस इतने में पथराव शुरु हो गया। इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के साथ रहे पुलिसकर्मी तो वहां से भाग खड़े हुए। इसके बाद भीड़ ने उन्हे पकड़ लिया और खेतों में ले जाकर उल्टा लटकाकर पीटने के बाद गोली मार दी। पीएम रिपोर्ट में उनकी आंख के पास गोली लगने की पुष्टि हुई है।

बिसाहड़ा कांड की कर रहे थे विवेचना

बता दें कि बुलंदशहर हिंसा में शहीद हुए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह बिसाहड़ा कांड के जांच अधिकारी थे। जिसमें गोहत्या के शक में भीड़ ने अखलाक नाम शख्स को पीट—पीटकर मार डाला था। बता दें कि सुबोध कुमार सिंह एटा के रहने वाले थे, हालाकि उनका एक घर मेरठ में भी है। तीन साल पहले उनका गाजियाबाद से ट्रांसफर हुआ था। शहीद इंस्पेक्टर की बहन का कहना है कि अखलाक केस की वजह से ही उसके भाई की हत्या की गई है। सबसे बड़ी बात जो उसने बोली वो ये कि भाई की हत्या की साजित पुलिसकर्मियों ने ही रची है।

भीड़ ने छीन ली थी सुबोध की सर्विस पिस्टल, वायरलेस और लाउडस्पीकर

बताया जा रहा है कि जब दंगे ने विकराल रूप में ले लिया तो सुबोध कुमार सिंह ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को शांत रहने की बात बोल रहे थे। तभी कुछ लोगों ने उनपर हमला बोल दिया और उनके हाथ लाउडस्पीकर छीनने के साथ ही उनकी सर्विस पिस्टल और वायरलेस छीन लिया गया। बताया जा रहा है कि सुबोध कुमार सिंह को गोली उन्ही की सर्विस पिस्टल से मारी गई है। सूत्रों का कहना है कि सुबोध से पिस्टल योगेश नामक शख्स ने छीना था, जो कि बजरंग दल से ताल्लुक रखता है।