मोदी सरकार ने 2019 में हासिल की कई उपलब्धियां, 2020 में करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना

narendra modi
मोदी सरकार ने 2019 में हासिल की कई उपलब्धियां, 2020 में करना पड़ेगा चुनौतियों का सामना

नई दिल्ली। दूसरी बार बनी मोदी सरकार के लिए 2019 काफी अच्छा रहा। 2019 लोकसभा चुनाव में 303 सीट हासिल कर पूर्णबहुमत के साथ दूसरी बार बनी मोदी सरकार ने पहले तो जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया फिर संसद में नागरिकता संशोधन कानून पास करवाने में भी सफल रही लेकिन 2020 आते आते देश में आर्थिक तंगी हो गयी और लगातार जीडीपी गिरती चली गयी। वहीं दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर भी प्रदर्शनो का दौर अभी भी जारी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए 2020 काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है।

Modi Government Achieved Many Achievements In 2019 Challenges To Be Faced In 2020 :

सत्ता में बने रहने की चुनौतियां

जहां एक तरफ 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 2014 से भी ज्यादा सीटें हासिल की वहीं राज्य के चुनाव में लगातार बीजेपी की सत्ता छिनती जा रही है। 2019 लोकसभा चुनाव से कुछ महीनो पहले बीजेपी से राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता छिन गयी वहीं चुनाव के बाद हाल ही में महाराष्ट और झारखंड भी बीजेपी को गंवाना पड़ा। ऐसे में साल 2020 में दिल्ली और बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर होगी, बीजेपी एकबार फिर मोदी लहर की उम्मीद कर रही है।

अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की चुनौती

तीन तलाक, अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली थी लेकिन उस दौरान किसी ने कोई प्रदर्शन नही किया था। लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुस्लिम सड़कों पर उतर आये और शांति पूर्ण मार्च के नाम पर कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए। विरोध का ही असर था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सफाई देनी पड़ी है कि इस कानून से देश के किसी भी मुसलमान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बात जम्मू-कश्मीर की करें तो अभी भी पूरी तरह से हालात सामान्य नही हैं और घाटी के सैकड़ों राजनीतिक और सामाजिक नेता अभी भी नजरबंद हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय के भरोसे को जीतने की मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है।

अर्थव्यवस्था को सुधारने की चुनौती

2019 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था की सुस्ती से जूझना पड़ रहा है। लगातार देश में जीडीपी गिरती चली जा रही है। इसकी वजह से सरकार का राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया है। देश की आर्थिक स्थिति डगमगाने से इसका असर नौकरियों से लेकर व्यापार पर भी पड़ रहा है, प्याज के दाम अभी भी आसमान छू रहे हैं। हालांकि मोदी सरकार का दावा है कि वह तमाम कोशिशें कर रही है लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी पर नही ला पा रहे हैं। आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि जनवरी से मार्च 2020 तक खाने-पीने की वस्तुओं में महंगाई बढ़ेगी। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

एनडीए को टूटने से बचाने की चुनौती

2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शिवसेना पार्टी भी शामिल थी, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी दोनो पार्टियों ने मिलकर लड़ा लेकिन 50 50 फार्मुले और सीएम की कुर्सी को लेकर दोनो पार्टियों में मतभेद हुआ जिसका फायदा कांग्रेस और एनसीपी ने उठा लिया और महाराष्ट्र में मिलकर सरकार बना ली। इस तरह से सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना बीजेपी से नाता तोड़कर अलग हो गई है। झारखंड में भी बीजेपी की सहयोगी आजसू नाराज हुई और दोनो ने विधानसभा चुनाव अलग अलग लड़ा, नतीजा सबके सामने रहा, बीजेपी ने यहां भी सत्ता खो दी। ऐसे में बीजेपी के बनने वाले नए अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने साल 2020 में एनडीए के कुनबे को जोड़कर रखने की चुनौती है। खासकर बीजेपी के लिए आने वाले दिनो में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में जेडीयू के साथ बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती है। 2015 में बीजेपी जेडीयू से अलग हुई थी तो बिहार में उसे करारी सिकस्त् झेलनी पड़ी थी। हालांकि बाद में जेडीयू ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बना ली।

नई दिल्ली। दूसरी बार बनी मोदी सरकार के लिए 2019 काफी अच्छा रहा। 2019 लोकसभा चुनाव में 303 सीट हासिल कर पूर्णबहुमत के साथ दूसरी बार बनी मोदी सरकार ने पहले तो जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया फिर संसद में नागरिकता संशोधन कानून पास करवाने में भी सफल रही लेकिन 2020 आते आते देश में आर्थिक तंगी हो गयी और लगातार जीडीपी गिरती चली गयी। वहीं दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर भी प्रदर्शनो का दौर अभी भी जारी है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए 2020 काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। सत्ता में बने रहने की चुनौतियां जहां एक तरफ 2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने 2014 से भी ज्यादा सीटें हासिल की वहीं राज्य के चुनाव में लगातार बीजेपी की सत्ता छिनती जा रही है। 2019 लोकसभा चुनाव से कुछ महीनो पहले बीजेपी से राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सत्ता छिन गयी वहीं चुनाव के बाद हाल ही में महाराष्ट और झारखंड भी बीजेपी को गंवाना पड़ा। ऐसे में साल 2020 में दिल्ली और बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कंधों पर होगी, बीजेपी एकबार फिर मोदी लहर की उम्मीद कर रही है। अल्पसंख्यकों का भरोसा जीतने की चुनौती तीन तलाक, अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों में काफी नाराजगी देखने को मिली थी लेकिन उस दौरान किसी ने कोई प्रदर्शन नही किया था। लेकिन नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और एनआरसी को लेकर अल्पसंख्यक समुदाय खासकर मुस्लिम सड़कों पर उतर आये और शांति पूर्ण मार्च के नाम पर कई जगह हिंसक प्रदर्शन भी हुए। विरोध का ही असर था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सफाई देनी पड़ी है कि इस कानून से देश के किसी भी मुसलमान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बात जम्मू-कश्मीर की करें तो अभी भी पूरी तरह से हालात सामान्य नही हैं और घाटी के सैकड़ों राजनीतिक और सामाजिक नेता अभी भी नजरबंद हैं। ऐसे में अल्पसंख्यक समुदाय के भरोसे को जीतने की मोदी सरकार के सामने बड़ी चुनौती है। अर्थव्यवस्था को सुधारने की चुनौती 2019 लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था की सुस्ती से जूझना पड़ रहा है। लगातार देश में जीडीपी गिरती चली जा रही है। इसकी वजह से सरकार का राजकोषीय घाटा काफी बढ़ गया है। देश की आर्थिक स्थिति डगमगाने से इसका असर नौकरियों से लेकर व्यापार पर भी पड़ रहा है, प्याज के दाम अभी भी आसमान छू रहे हैं। हालांकि मोदी सरकार का दावा है कि वह तमाम कोशिशें कर रही है लेकिन अर्थव्यवस्था पटरी पर नही ला पा रहे हैं। आरबीआई ने अनुमान लगाया है कि जनवरी से मार्च 2020 तक खाने-पीने की वस्तुओं में महंगाई बढ़ेगी। ऐसे में देश की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। एनडीए को टूटने से बचाने की चुनौती 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए में शिवसेना पार्टी भी शामिल थी, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव भी दोनो पार्टियों ने मिलकर लड़ा लेकिन 50 50 फार्मुले और सीएम की कुर्सी को लेकर दोनो पार्टियों में मतभेद हुआ जिसका फायदा कांग्रेस और एनसीपी ने उठा लिया और महाराष्ट्र में मिलकर सरकार बना ली। इस तरह से सबसे पुरानी सहयोगी शिवसेना बीजेपी से नाता तोड़कर अलग हो गई है। झारखंड में भी बीजेपी की सहयोगी आजसू नाराज हुई और दोनो ने विधानसभा चुनाव अलग अलग लड़ा, नतीजा सबके सामने रहा, बीजेपी ने यहां भी सत्ता खो दी। ऐसे में बीजेपी के बनने वाले नए अध्यक्ष और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने साल 2020 में एनडीए के कुनबे को जोड़कर रखने की चुनौती है। खासकर बीजेपी के लिए आने वाले दिनो में बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में जेडीयू के साथ बेहतर तालमेल बनाने की चुनौती है। 2015 में बीजेपी जेडीयू से अलग हुई थी तो बिहार में उसे करारी सिकस्त् झेलनी पड़ी थी। हालांकि बाद में जेडीयू ने आरजेडी से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बना ली।