मोदी सरकार ने किया स्पष्ट – राज्य चाहे जो कह लें, लागू करना ही पड़ेगा नागरिकता कानून

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मोदी सरकार ने किया स्पष्ट - राज्य चाहे जो कह लें, लागू करना ही पड़ेगा नागरिकता कानून

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Act ) को अपने राज्यों में लागू करने को लेकर अब तक छत्तीसगढ़, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके राज्य में लागू नहीं होगा.  लेकिन यह केवल राजनीतिक बयान भर है। सच्चाई यह है कि ऐसा कोई भी राज्य जिसे कानून में ही इससे छूट नहीं है वह इस कानून को लागू होने से नहीं रोक सकता है।

Modi Government Made It Clear No Matter What The State Says Citizenship Law Will Have To Be Implemented :

नागरिकता देने का अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन है। राज्य सरकारों पर किसी भी नागरिक को उसकी पूरी सुविधा देने का कर्तव्य है और चुनाव आयोग जरूरी दस्तावेजों के आधार पर तय करता है कि उसे मतदाता बनाया जाए या नहीं।

कई राज्यों ने लागू करने से किया है इन्कार

बुधवार को संसद में विधेयक पर जारी चर्चा के बीच ही पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से घोषणा की गई थी कि वह प्रदेश में इसे लागू नहीं होने देगी। उस वक्त संसद के अंदर ही गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि यह सभी राज्यों में लागू होगा। गुरुवार को केरल और पंजाब सरकार की ओर से भी ऐसी ही घोषणा की गई। हालांकि उन्हें इसका अधिकार ही नहीं है, बल्कि संविधान उन्हें बाध्य करता है कि संसद के कानून का पालन करे।

हर हाल में करना होगा लागू

संविधान विशेषज्ञ व वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने कहा- ‘संविधान के अनुसार तो हर राज्यों को संसद के कानून का पालन करना ही होगा। नागरिकता देने का अधिकार केंद्र के अधीन है। कोई राज्य इसे रोक नहीं सकता है।’ अगर केंद्र किसी को नागरिकता देता है तो उसे नागरिक अधिकारों से वंचित रखना भी राज्य सरकारों के बस की बात नहीं है क्योंकि संविधान की धारा के अधीन उसे उसे सारे अधिकार मिलेंगे वरना कोर्ट का दरवाजा खुला है। ऐसे में कांग्रेस और तृणमूल शासित राज्यों के बयान को राजनीतिक तौर पर ही लिया जा रहा है।

 

 

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Act ) को अपने राज्यों में लागू करने को लेकर अब तक छत्तीसगढ़, केरल, पंजाब, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश ने स्पष्ट कर दिया है कि यह उनके राज्य में लागू नहीं होगा.  लेकिन यह केवल राजनीतिक बयान भर है। सच्चाई यह है कि ऐसा कोई भी राज्य जिसे कानून में ही इससे छूट नहीं है वह इस कानून को लागू होने से नहीं रोक सकता है। नागरिकता देने का अधिकार पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन है। राज्य सरकारों पर किसी भी नागरिक को उसकी पूरी सुविधा देने का कर्तव्य है और चुनाव आयोग जरूरी दस्तावेजों के आधार पर तय करता है कि उसे मतदाता बनाया जाए या नहीं। कई राज्यों ने लागू करने से किया है इन्कार बुधवार को संसद में विधेयक पर जारी चर्चा के बीच ही पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से घोषणा की गई थी कि वह प्रदेश में इसे लागू नहीं होने देगी। उस वक्त संसद के अंदर ही गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया था कि यह सभी राज्यों में लागू होगा। गुरुवार को केरल और पंजाब सरकार की ओर से भी ऐसी ही घोषणा की गई। हालांकि उन्हें इसका अधिकार ही नहीं है, बल्कि संविधान उन्हें बाध्य करता है कि संसद के कानून का पालन करे। हर हाल में करना होगा लागू संविधान विशेषज्ञ व वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने कहा- 'संविधान के अनुसार तो हर राज्यों को संसद के कानून का पालन करना ही होगा। नागरिकता देने का अधिकार केंद्र के अधीन है। कोई राज्य इसे रोक नहीं सकता है।' अगर केंद्र किसी को नागरिकता देता है तो उसे नागरिक अधिकारों से वंचित रखना भी राज्य सरकारों के बस की बात नहीं है क्योंकि संविधान की धारा के अधीन उसे उसे सारे अधिकार मिलेंगे वरना कोर्ट का दरवाजा खुला है। ऐसे में कांग्रेस और तृणमूल शासित राज्यों के बयान को राजनीतिक तौर पर ही लिया जा रहा है।