प्लास्टिक के नोट रोकेंगे नकली करेंसी का काला कारोबार

नई दिल्ली। भ्रष्टाचार, कालाधन, नकली करेंसी और आतंकवाद पर रोक लगने की जिस उम्मीद के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर की रात नोटबंदी का फैसला लिया था, वो एक महीने का समय बीतने तक दूर की कौड़ी नजर आ रहा है। इसके बावजूद देश की जनता को प्रधानमंत्री और उनकी सरकार पर भरोसा है और एक बड़ा तबका बैंकों और एटीएम की लाइनों में खड़ा होने के बावजूद नोटबंदी के फैसले का स्वागत कर रहा है। इस बीच खबरें आ रहीं हैं कि 1000 और 500 के पुरानी करेंसी नोट को अवैध घोषित कर चुकी मोदी सरकार करेंसी नोट को लेकर नया प्रयोग करने जा रही है। इस प्रयोग के तहत सरकार देश के चुनिन्दा शहरों में प्लास्टिक से बने करेंसी नोट उतारने वाली है। इस बात की जानकारी शुक्रवार को संसद में वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सत्र के दौरान दी। उन्होंने बताया कि अब प्लास्ट‍िक की करेंसी छापी जाएगी, इसके लिए मटेरियल भी खरीदा जा रहा है। उम्मीद है कि इस प्रयोग के बाद नकली करेंसी का गोरखधंधा करने वालों पर नकेल कसी जा सकेगी।




एक अन्य प्रश्न के जवाब में, मेघवाल ने कहा आरबीआई ने दिसंबर 2015 में जानकारी थी कि उन्हें होशंगाबाद पेपर मिल द्वारा भेजे गए पेपर के और नासिक नोट प्रेस से छपे 1000 रुपये के कुछ प्लास्टिक नोट मिले हैं जिनमें सुरक्षा जोख़िम नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए गए है।




भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) पिछले कई सालों से प्लास्ट‍िक करेंसी लॉन्च करने की योजना बना रहा है। कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए2 सरकार के कार्यकाल के दौरान फरवरी 2014 में संसद में बताया गया था कि था कि 10 रुपये वाले एक अरब प्लास्ट‍िक नोट छापे जाएंगे और इनके फील्ड ट्रायल के लिए 5 शहर चुने गए हैं ये शहर थे कोच्च‍ि, मैसूर, जयपुर, शिमला और भुवनेश्वर है।

क्या है प्लास्टिक के नोट के छापने के फायदे ?

1—एक अध्यययन के मुताबिक पेपर वाले नोट की तुलना में प्लास्ट‍िक नोट से ग्लोबल वार्मिंग में 32 फीसदी की कमी और एनर्जी डिमांड में 30 फीसदी की कमी आयेगी।
2—प्लास्ट‍िक वाले नोटों का वजन पेपर वाले नोटों की तुलना में कम होता है ऐसे में इनका ट्रांस्पोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन भी आसान होता है।
3—प्लास्टिक के नोटों का औसत जीवन लगभग 5 साल का होता है और उनकी नकली मुद्रा तैयार करना मुश्किल है इसके अलावा,प्लास्टिक से बने नोट कागजी नोटों की तुलना में काफी साफ होते हैंइन्हें पॉलीमर नोट भी कहा जाता है




सबसे पहले आॅस्ट्रेलिया में छापे गए थे प्लास्टिक के नोट—

आपको बता दे की सबसे पहले प्लास्टिक के नोट आॅस्ट्रेलिया में सन 1988 में छापे गये थे, आॅस्ट्रेलिया में नकली नोटों का चलन काफी बढ़ गया था, जिसको देखते हुए वहां की सरकार ने प्लास्टिक के नोट छापने का निर्णय लिया था। जिसके बाद अब भारत सरकार भी प्लास्टिक के नोट छापने की तैयारी में है।