मोदी सरकार नए साल में दे सकती है ये बड़ा तोहफा, बढ़ने लगेगा आपका बैंक बैलेंस

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लखनऊ। हम सब साल 2017 को विदाई देने की तैयारी में हैं। राजनीतिक लिहाज से बेहद गरम रहे इस साल में हमारे देश ने बड़ा बदलाव देखा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों को नई सरकारें मिलीं तो बिहार में 2017 में बना महागठबंधन ढह गया। तमाम सियासी उठापटक के बीच देश को जीएसटी के रूप में नई प्रत्यक्ष कर व्यवस्था मिली। मंहगाई, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास की दरों ने खूब सुर्खियां बटोरीं तो केन्द्र की सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को कई मोर्चों पर घेरा गया। नये साल यानी 2018 के स्वागत के साथ ही देश में नई सियासी गरमी पैदा होगी।

इस बीच खबरें आ रहीं हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार अब जीएसटी को अपना बड़ा हथियार बनाने वाली है। देश में मंहगाई के सबसे बड़े कारण के रूप में देखे जाने वाले पेट्रोल और डीजल को केन्द्र सरकार जीएसटी के दायरे में ला सकती है। जिसके बाद 75 से 78 रुपए प्रति लीटर मिलने वाले पेट्रोल की कीमतें लगभग आधी रह जाएंगी। वहीं डीजल के रोज चढ़ते दाम भी जमीन पर आ जाएंगे।

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सूत्रों की माने तो जीएसटी के सकारात्मक परिणामों से केन्द्र सरकार के साथ ही राज्य सरकारों का उत्साह भी बढ़ गया है। जीएसटी के नकारात्मक परिणामों की आंशका के चलते उपजे जिस डर के कारण राज्य सरकारों ने पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के अंतर्गत आने का विरोध किया था, वह अब खत्म हो चुका है। केन्द्र और राज्य सरकारों के बीच पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर आम सहमति बनती नजर आ रही है। अधिकांश राज्य इस विषय पर अपना समर्थन दे चुके हैं, जबकि शेष जल्द ही इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेंगे।

जिस डीजल और पेट्रोल पर आम जनता को करीब 100 फीसदी से ज्यादा टैक्स भरना पड़ रहा है। संभव है कि भविष्य में वह टैक्स जेब का बजन बढ़ाता नजर आए। जिसके बाद बाजार में अन्य वस्तुओं के मूल्यों में भी भारी गिरावट की संभावना पैदा होगी। आम आदमी मंहगाई की मार से न सिर्फ राहत महसूस कर सकेगा ​बल्कि पहली बार सस्ताई का अहसास भी करेगा।

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जनवरी 2018 में​ मिल सकती है खुशखबरी—

ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने की घोषणा जनवरी के पहले सप्ताह में की जा सकती है। जिसे 15 जनवरी से लागू किया जाएगा।

जीएसटी में इन बड़े बदलावों की उम्मीद —

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1: जीएसटी कांउसिल दैनिक जरूरत की व​स्तुओं को लिए बने 5 प्रतिशत के स्लैब को घटाकर 2 प्रतिशत तक ले जा सकती है।

3: 28 प्रतिशत के स्लैब को खत्म कर 25 प्रतिशत का नया स्लैब बनाया जा सकता है। जिसमें लग्जरी वस्तुओं और सेवाओं के लिए सीमित किया जाएगा।

4: 18 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में आने वाले कई आइटम 12 प्रतिशत स्लैब में डाले जा सकते हैं।

5: कारोबारियों को जीएसटी फाइलिंग में सहूलियत देने की दिशा में अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

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लखनऊ। हम सब साल 2017 को विदाई देने की तैयारी में हैं। राजनीतिक लिहाज से बेहद गरम रहे इस साल में हमारे देश ने बड़ा बदलाव देखा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों को नई सरकारें मिलीं तो बिहार में 2017 में बना महागठबंधन ढह गया। तमाम सियासी उठापटक के बीच देश को जीएसटी के रूप में नई प्रत्यक्ष कर व्यवस्था मिली। मंहगाई, औद्योगिक विकास और आर्थिक विकास की दरों ने खूब सुर्खियां बटोरीं…
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