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अनुपम के बदले मिजाज : काम करने वालों से होती है गलती, निकम्मे दूसरों की बुराई खोजने में जिंदगी…

देश में कोरोना की दूसरी लहर से हड़कंप मचा हुआ है। ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड की मारामारी जारी है। इस बीच अब गंगा में बहते शवों और नदियों के किनारे खुले में पड़े शवों इस मामले को और ज्यादा संजीदा बना दिया है। वहीं बीते दिनों ऐसे ही कई मुद्दों को लेकर लोग सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

By संतोष सिंह 
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Moods Instead Of Anupam Workers Make Mistakes Unsuccessful Life In Finding The Evil Of Others

नई दिल्ली। देश में कोरोना की दूसरी लहर से हड़कंप मचा हुआ है। ऑक्सीजन, अस्पतालों में बेड की मारामारी जारी है। इस बीच अब गंगा में बहते शवों और नदियों के किनारे खुले में पड़े शवों इस मामले को और ज्यादा संजीदा बना दिया है। वहीं बीते दिनों ऐसे ही कई मुद्दों को लेकर लोग सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

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इसी बीच पीएम नरेंद्र मोदी के शान में कसीदे गढ़ने वाले बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर का जमीर जगा। इस बार वह सरकार की तारीफ करने के बजाए पीएम मोदी की आलोचना करते नजर आए थे। इस इंटरव्यू में कहा था इस वक्त अपनी छवि सुधारने से बेहतर है कि लोगों की जान बचाई जाए। अब अनुपम ने एक और ट्वीट किया है जो तेजी से वायरल हो गया है। इसमें अनुपम का मिजाज कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है।

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बता दें कि अनुपम खेर ने ट्वीट कर लिखा है कि गलती उन्हीं से होती है जो काम करते हैं, निकम्मों की जिंदगी तो दूसरों की बुराई खोजने में ही खत्म हो जाती है। अनुपम के इस ट्वीट के पीछे क्या मनसा है यह तो समझ पाना मुश्किल है, लेकिन लोग इसको उनके पिछले बयान से जोड़कर देख रहे हैं।

बता दें कि हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान अनुपम ने कहा था कि ‘कोरोना की दूसरी लहर के बीच देश में जो कुछ हो रहा है, उसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना जरूरी है। अधिकारियों की सार्वजनिक आलोचना ‘कई मामलों में वैध’ है। यह समझना बहुत जरूरी है कि इस समय इमेज बनाने से ज्यादा जरूरी लोगों की जान बचाना है।’

वहीं उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा था और कहा था कि ‘सरकार से स्वास्थ्य संकट के प्रबंधन में कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ हुई है लेकिन इन खामियों का फायदा दूसरे राजनीतिक दलों को अपने हक में नहीं उठाना चाहिए। इसके अलावा जब अनुपम से पूछा गया कि सरकार इस समय लोगों को राहत देने के बजाय अपनी छवि बनाने में लगी है तो इसपर उन्होंने कहा कि ‘सरकार के लिए जरूरी है कि वह इस चुनौती का डंटकर सामना करे और उन लोगों के लिए कुछ करे जिन्होंने उन्हें चुना है।’

अनुपम खेर ने गंगा और अन्य नदियों में मिलने वाले अज्ञात शवों का भी संज्ञान लिया था। अनुपम खेर ने कहा था कि सरकार को लोगों ने ही चुना है। अब उन्हें लोगों के लिए कुछ करना चाहिए। मैं मानता हूं कि जो अमानवीय होगा, वही गंगा में बहती लाशों से प्रभावित नहीं होगा।

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